हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रही स्वंयभू महाज्ञानी कंगना के ताजा बयान पर अमिताभ बच्चन को ये तय करना है कि वे इस पर अपना सर कैसे पीटना पसंद करेंगे।
कंगना ने सदी के महासितारे के लिए सार्टिफिकेट दिया है कि पूरे देश में सिर्फ दो सितारों की इज्जत है, जिसमें से दूसरे भाग्यशाली बच्चन हैं। पहला कौन है, ये बताने की जरुरत नहीं है। इस तर्क पर फिल्म इंडस्ट्री में भाजपा के दूसरे फौजीदार, जैसे अक्षय कुमार, अजय देवगन, अनुपम खेर, मधुर भंडारकर, आर माधवन, अशोक पंडित, पहलाज निहलानी, नाना पाटेकर, विवेक ओबेराय, इत्यादि भी रोना-पीटना कर सकते हैं। भाजपा प्रेम में पहली बार पड़ी लारा दत्ता पर भी क्या बीती होगी
फिल्म वालों को जाने दीजिए, उन्होंने तो तेजस्वी के नाम पर अपनी ही पार्टी के नेता को गुंडा बता दिया। लालू प्रसाद के बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रताप की जगह उन्होंने बंगलुरु में भाजपा के सरदर्द बने तेजस्वी सूर्या को निशाने पर ले लिया।

ये मामला गलती से जुबां फिसलने का होता, तो कोई भी समझ सकता था कि चुनावों की गहमागहमी में ऐसा हो जाता है, लेकिन मामला जब कंगना का हो, तो कोई उनकी इस भाषा पर ताज्जुब नहीं करता, क्योंकि उनसे बेहतर भाषा की उम्मीद करने वाले हमेशा मायूस हुए हैं और ये सब बेवजह नहीं है। मोदी मंडन में देश की आजादी को 2014 में तय करने और मोदी को नारायण का अवतार घोषित करने के बाद कंगना किसी के लिए कुछ भी कह सकती हैं। चुनाव अभी चल रहा है। 4 जून को तय होना है कि मंडी की जनता ने कंगना के लिए क्या फैसला किया, लेकिन तब तक इस बेलगाम अदाकारा की जुबां से अभी और भी मजेदार जुमलेबाजी की उम्मीद की जा सकती है। कंगना इन चुनावों में क्या करती हैं, ये आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तो वक्त साबित कर चुका है कि एक होनहार अभिनेत्री कैसे अपने ही पांवों पर कुल्हाड़ी मार सकती है, इसका वे लाजवाब उदाहरण हैं। आनेवाले दिनों में उनकी जुमलेबाजी के नए किस्सों का इंतजार कीजिए।

चुनावी समर में उतरे दो सितारों का मामला समझ में नहीं आया। कभी देश और सोनिया मैडम के आदेश के तेवर दिखाने वाले गोविंदा सियासत में लौटे, तो क्या सिर्फ एक चुनावी गाड़ी में खड़े होकर हाथ हिलाने के लिए लौटे थे। उनके लिए माना जा रहा था कि वे एक बार फिर उसी सीट से किस्मत आजमाएंगे, जहां से वे 2004 में कांग्रेस के टिकट पर लड़कर पहली बार संसद पंहुचे थे। इस बार जब टिकट पक्का नहीं हुआ था, तो काहे चले आए। इनसे बेहतर तो प्रभुराम वाले अरुण गोविल रहे, जिन्होंने टिकट की गारंटी के बाद जय भाजपा का नारा लगाया।
दूसरी बात अनुपमा फेम हीरोइन बंगाली हीरोइन रुपाली गांगुली को तो ये भी समझ में नहीं आया कि वे किसलिए भाजपा के दफ्तर पंहुच गईं। वहां पंहुचकर भी वे अनुपमा फेम डायलागबाजी ही करती नजर आईं कि उनको ख्याल आया कि राजनीति के महायज्ञ में आहूति दे दी जाए। टिकट न मिला, तो क्या करेंगी
बाकी, अनुपम खेर का सदमा समझा जा सकता है। उनकी इतनी भक्ति के बाद भी गुजराती साहेब ने उनकी पत्नी का पत्ता साफ कर दिया और उनको भी टरका दिया। परेश रावल को तो बहुत पहले साइड लाइन किया जा चुका है।
काफी दिनों से सपा और भाजपा के बीच झूलने के बाद कांग्रेस में ही रहे राजबब्बर यूपी में लखनऊ से लेकर आगरा और फिरोजाबाद से लेकर फतेहपुर सीकरी और गाजियाबाद तक चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार यूपी को छोड़कर वो इस बार कांग्रेस के टिकट पर हरियाणा के गुड़गाव जा पंहुचे हैं। भगवान भला करे उनका।
चर्चा शाटगन सिन्हा की दुलारी बिटिया सोनाक्षी सिन्हा की इसलिए रही, क्योंकि उन्होंने अपने पिता के लिए प्रचार नहीं किया। बंगाल की आसनसोल सीट पर उनकी मां पूनम को तो देखा गया, लेकिन सोनाक्षी मुंबई में संजय लाली भंसाली की वेबसीरिज हीरामंडी के प्नमोशन में बिजी रहीं। ऐसा लगता है कि फिल्मों और टीवी की दुनिया को लेकर भाजपा का कोटा पूरा हो सकता है और कांग्रेस वालों ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।
कमेंट बाक्स में आप ही बताईए कि फिल्म इंडस्ट्री से चुनाव में उतरी किस सेलिब्रिटी को संसद जाने का रास्ता मिलेगा और सबसे बड़ा सवाल, दिल्ली की सत्ता किसे मिलेगी ?
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