Thursday, September 14, 2023

मोदी के रास्ते पर शाहरुख ?

                                                              

                                                                              
सीन 1

मुंबई के बांद्रा इलाके में समंदर के ठीक सामने बने शाहरुख खान के आलीशान बंगले मन्नत के एक बड़े से हाल में तकरीबन पचास-साठ पत्रकारों का जमावाड़ा होता है। मौका था, शाहरुख खान की रिलीज होने वाली एक फिल्म का। कलमवीरों (प्रिंट मीडिया के पत्रकार) के साथ शाहरुख खान बेतकल्लुफ होकर तमाम मुद्दों पर बतियाते रहते हैं। ये बातचीत होने के बाद शाहरुख वन टू वन सभी का हालचाल पूछते हैं और उनके साथ सेल्फी खिंचाते हैं। 


Cut to 
26 नवंबर 2008. मुंबई में आतंकवादी हमला होता है। इसके कुछ दिनों बाद 12 दिसंबर को यशराज की नई फिल्म रब ने बनादी जोड़ी रिलीज होने वाली थी। इस फिल्म को लेकर मन्नत में शाहरुख खान के इंटरव्यू होते हैं। शाहरुख खान की टीम मीडिया को एडवांस में ही बता दिया जाता है कि आतंकवादी हमले को लेकर शाहरुख खान कोई कमेंट नहीं करेंगे। एंटरटेनमेंट  मीडिया वाले बगैर किसी ना-नुकुर के खुशी खुशी इंटरव्यूज करके अपने घर चले जाते हैं। 

Cut to 

मन्नत में मीडियावालों का एक और जमावाड़ा। मौका ईद का था और मीडिया का हर बड़ा-छोटा पत्रकार मन्नत में दाखिल होकर खुश होता है। मीडिया के दोस्तों के सामने शाहरुख खान तशरीफ लाते हैं और खान साहब को ईद की मुबारकबाद देने के लिए मीडियावालों में होड़ लग जाती है। सालों तक ये सिलसिला बना रहता है। इस किस्म की मुलाकातें मीडिया के साथ शाहरुख खान के रिश्तों को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।  

Cut to 

तारीख 2 नवंबर। एक बार फिर मन्नत में मीडिया का जमावाड़ा होता है। बर्थडे-ब्वाय मीडिया के सामने केक काटते हैं और एक फैन से भी बड़े फैन की तरह मीडिया वाले Happy birthday SRK के नारे लगाते हैं। इस मौके पर मीडिया वालों से घिरे शाहरुख आफ बीट बातों में कुछ खबरों पर रिएक्ट भी कर देते थे और कुछ मीडिया वालों के लिए वहीं से ब्रेकिंग खबरों का जुगाड़ भी हो जाता है।  

Cut to 

25 जनवरी, 2023. चार साल के गैप के बाद कामयाबी के तमाम दावों और वादों के साथ यशराज की नई फिल्म पठान रिलीज होती है। रिलीज से पहले मीडिया शाहरुख खान के इंटरव्यू का इंतजार कर रहा था। तमाम इंतजार के बाद यशराज की मीडिया टीम की ओर से बताया जाता है कि  शाहरुख खान कोई इंटरव्यू नहीं करेंगे। फिल्म की महासफलता के बाद पठान का एक इवेंट होता है, लेकिन यहां भी शाहरुख कोई इंटरव्यू नहीं करते।  

Cut to 
7 सितंबर, 2023. पठान की महासफलता के बाद शाहरुख खान की अगली फिल्म जवान रिलीज होती है। ये फिल्म शाहरुख खान की अपनी कंपनी रेडचिल्ली एंटरटेनमेंट में बनी और इस बार उनकी टीम मीडिया को बता देती है कि शाहरुख खान कोई इंटरव्यू नहीं करेंगे। पठान को लेकर कहा जा रहा था कि मीडिया को लेकर सारे फैसले यशराज की टीम कर रही थी, जिसमें शाहरुख खान का कोई दखल नहीं होता था, लेकिन जवान को लेकर 'नो मीडिया' का फैसला शाहरुख खान की टीम अपने बास की मर्जी से करती है। याद करें, तो रेडचिल्ली की हैप्पी न्यू ईयर, चेन्नई एक्सप्रेस, दिलवाले, रईस और जीरो फिल्मों  के रिलीज से पहले शाहरुख खान मीडिया को भर भरकर इंटरव्यू देते हैं। दिलवाले के रिलीज के वक्त तो लगातार तीन दिनों तक मन्नत में मीडिया का जमावाड़ा होता था।                             

                                                                    सीन 2

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी के शासनकाल में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर स्पेशल फ्लाइटस लैंड होती हैं। इन विमानों में मुख्यमंत्री के विशेष बुलावे पर दिल्ली-मुंबई से लेकर देश के दूसरे हिस्सों से पत्रकारों को सीएम खम्मन ढोकला खिलाते हैं। मोदी की मेजबानी से खुश पत्रकार उनके शब्दों में, मोदी के सबसे धमाकेदार इंटरव्यू को लेकर बल्ले बल्ले करते हैं।

Cut to
मकर संक्रांति 2014. अहमदाबाद में पतंगबाजी के त्यौहार के लिए मुख्यमंत्री के विशेष बुलावे पर आए सलमान खान उनके साथ पतंगबाजी करने पंहुचते हैं और मीडिया के कैमरों के सामने मोदी की जमकर तारीफ करते हैं। सलमान खान के साथ मोदी के रिश्तों का चैप्टर वैसे भी अलग था। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सलमान खान को हिट एंड रन केस में मुंबई हाईकोर्ट दोषी ठहराता है। सलमान के वकीलों की टीम फौरन इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करती है और चंद घंटों में ही सलमान को दोषमुक्त करार दे दिया जाता है। इसी तरह से राजस्थान में काले हिरणों के शिकार के मामले में हाईकोर्ट सलमान के खिलाफ केस ही रद्द कर देता है। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं होता है। मोदी के साथ सलमान के रिश्तों की एक बानगी 2019 में देखी गई, जब प्रधानमंत्री के तौर पर  दूसरे शपथ ग्रहण समारोह में बुलावा भेजा जाता है और सलमान वहां हाजिरी लगाने पंहुचते हैं।

Cut to 

सन 2007 में तीखे सवालों के लिए चर्चित इंग्लिश पत्रकार करण थापर के साथ मोदी का एक इंटरव्यू तय होता है और मोदी इंटरव्यू के लिए हाजिर हो जाते हैं। करण थापर जब गुजरात के 2002 के दंगों को लेकर तीखे सवाल होते हैं, तो तिलमिलाए मुख्यमंत्री कुछ पलों बाद ही 'दोस्ती बनी रहे' के टैग के साथ इंटरव्यू अधूरा छोड़कर चले जाते हैं। ये अलग बात है कि उस दिन के बाद मोदी को कभी अपने इस दोस्त की याद नहीं आती है और न कभी आएगी। 

Cut to 
2019 में संसदीय चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री निवास पर कुछ चैनलों के पत्रकारों को बुलाया जाता है। इस दौरान इंटरव्यू के नाम पर मोदी से पाकेट में पर्स रखने और कभी न थकने को लेकर सवाल (जो पहले से पीएम आफिस से क्लीयर किए गए थे) होते हैं। प्रधानमंत्री भी पीछे नहीं रहते। पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा एलओसी पार करके पाकिस्तान के बालाकोट (पाकिस्तान) पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर वे रडार में छिपे बादलों को लेकर ऐसी बात बताते हैं, जिसकी कोई मिसाल नहीं मिलती।  

Cut to 

2019 के संसदीय चुनावों के दौरान ही मोदी के साथ एक स्पेशल इंटरव्यू तय होता है। इस इंटरव्यू के लिए किसी पत्रकार को नहीं, बल्कि ऐसे शख्स को चुना जाता है, जिन्होंने इससे पहले इंटरव्यू  दिए जरुर,  लेकिन कभी किसी का इंटरव्यू नहीं किया। अक्षय कुमारपिंक कलर की पेंट पहनकर पीएम हाउस पंहुचते हैं और सवाल करते हैं कि प्रधानमंत्री आम काटकर खाते हैं या चूसकर खाते हैं। इस धांसू सवाल के बाद पत्रकार अक्षय फिर कभी किसी और का इंटरव्यू करने की हिम्मत नहीं करते। 

Cut to 

2024 के चुनावों में कुछ समय ही बाकी है। पिछले दस सालों में प्रधानमंत्री द्वारा एक भी प्रेस कांफ्रेंस न करने को लेकर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। चर्चा इस बात को लेकर भी है कि किस तरह से इस सरकार ने मीडिया को दो हिस्सों में बांट दिया। एक हिस्सा गोदी मीडिया बन गया, जो सत्तारुढ़ पार्टी के सामने चरणचुंबक बनकर काम करता है और विरोधी दलों के खिलाफ मोर्चा खोलता है। इस गोदी मीडिया के कथित पत्रकार सत्ताधीशों द्वारा हुए अपनेअपमान को भी प्रसाद समझकर ग्रहण करते हैं। दूसरे हिस्से में मीडिया के वो पत्रकार हैं, जो डिजिटल प्लेटफार्म पर सत्ताधारी नेताओं की शह पर मिलने वाली धमकियों की परवाह न करते हुए सत्ता के असली चेहरों को सामने लाते हैं। इस मीडिया के कई पत्रकारों को कई बार सत्ता विरोधी रिपोर्टिंग पर जेल तक भेजा जाता है। 

                                                                          Scene 3 

सवाल एक- 

एक तरफ देश के प्रधानमंत्री मीडिया को इंटरव्यू देना पसंद नहीं करते। दूसरी तरफ देश के सबसे बड़े सितारे भी मीडिया को इंटरव्यू देना पसंद नहीं करते। क्या ये मात्र संयोग है? 

सवाल दो-

पठान और जवान के बाद इसी साल दिसंबर में आनेवाली राजकुमार हीरानी की फिल्म को लेकर भी शाहरुख खान नो मीडिया का टैग जारी रखेंगे ? 

सवाल तीन- 

अगर शाहरुख खान नो मीडिया की पालिसी पर कायम रहते हैं, तो क्या मीडिया उनका बायकाट करेगा या किंग खान जिंदाबाद के साथ ता था तथैया करता रहेगा। 

आखिरी सवाल- 

क्या SRK सचमुच NO MEDIA के लिए  मोदी से Influence हुए होंगे? एक बार जरुर सोचिए और ईमानदारी से कमेंट कीजिए 


शाहरुख खान से जुड़े ये लिंक भी पढ़िए-


जवान की सफलता का एक सच ये भी

शाहरुख खान और जवान- नया तीर, नई कमान

गदर और पठान की सफलता में आग लगाने वाला कौन

यहां से कहां जाएगा बादशाह का सफर


#Shahrukhkhan #SRK #Modi #narendramodi #PM #Mannat #media #Eid #happybirthday #Pathan #Yashraj #jawan #redchillientertainment #nomedia #ahmadabad #airport #salmankhan #makarsankranti #kitefly #nationalmedia #godimedia #media #akshaykumar #PMhouse #Delhi #election2019 #election2024 #rajkumarhirani #dunki






Sunday, September 10, 2023

जवान की सफलता का एक सच ये भी..

जवान के रिलीज होने से कुछ दिन पहले लिखे ब्लाग (शाहरुख खान की जवान- नया तीर नया निशान) में साफ तौर पर लिखा गया था कि शाहरुख खान का सुपर स्टारडम जिस मकाम पर पंहुच चुका है, वहां आंकड़ों की बाजीगरी से उनकी फिल्मों का आकलन करना न्यायसंगत नहीं होगा, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि करोड़ों के बजट से बनने वाली उनकी फिल्मों की होने वाली कमाई के आंकड़ों की अहमियत न समझी जाए। 

शाहरुख खान की जवान- नया तीर, नया निशान का लिंक 

https://anujalankar.blogspot.com/2023/09/blog-post.html

तकरीबन 300 करोड़ के बजट में बनी एक फिल्म का दो दिनों में विश्व स्तर पर तकरीबन 250 करोड़ की कमाई का आंकड़ा इतना भी कम नहीं है, जिसे अनदेखा किया जा सके। बात को आगे बढ़ाने से पहले शाहरुख खान और जवान की टीम को बाक्स आफिस पर आंकड़ों के खेल का नया इतिहास रचने के लिए बधाई। वीकंड के बाद  सोमवार को जब चार दिनों के आंकड़े सामने होंगे, तो पता चलेगा कि जवान ने बाक्स आफिस पर कितने रिकार्ड्स बनाए और बिगाड़े हैं। 


बाक्स आफिस के आंकड़ों की बाजीगरी से परे शाहरुख खान की इस फिल्म ने कई मायनों में दर्शकों को चौंकाया है। ये बात इसलिए ज्यादा अहम है कि जनवरी में आई पठान ने भी बाक्स आफिस पर कामयाबी का डंका बजाया, लेकिन ये एक ऐसी कमर्शियल मसालेदार फिल्म मानी गई, जिसमें आम दर्शकों को पसंद आने वाले मसालों की कोई कमी नहीं थी, लेकिन इसका कोई सामाजिक या राजनैतिक सरोकार नहीं था। इस लिहाज से देखा जाए, तो शाहरुख के कैरिअर में स्वदेस और चक दे इंडिया जैसी फिल्में ज्यादा नहीं है, जिनके साथ एक सामाजिक सोच मजबूती के साथ जुड़ी हुई थी। 

जवान से जुड़े इसी फैक्टर ने दर्शकों को सबसे ज्यादा चौंकाया कि इस फिल्म में मनोरंजन के तमाम मसालों के साथ कई सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों को कनेक्ट किया गया। इन मुद्दों का यहां डिटेल में जिक्र करना ठीक इसलिए नहीं होगा कि फिल्म को देखने के दौरान दर्शकों को ये मुद्दे खुद समझ में आ जाएंगे। बड़ी बात ये है कि कमर्शियल फिल्मों का सबसे बड़ा सितारा अपनी कमर्शियल फिल्म में सोशल और राजनैतिक मामलों को डायरेक्ट कनेक्ट कर रहा है। 

2014 के बाद फिल्म इंडस्ट्री में राजनैतिक मुददों को लेकर समझ और समझाने का मतलब ही बदल गया है।  शाहरुख खान और आमिर खान के साथ दिल्ली की राजनैतिक सत्ता के रिश्तों में कभी सहजता नहीं आई। तीसरे खान सलमान खान 2014 से पहले ही इस सत्ता के करीब रहे। ये भी सच है कि इस नजदीकी की वजह से सलमान को अपने कोर्ट के मामलों में बड़ी राहत मिली। 

इतिहास के इन पन्नों से एक बार फिर जवान के सामाजिक और राजनैतिक सरोकार की बात को आगे बढ़ाया जाए, तो यहां एक और रोचक बात सामने आती है कि सोशल मीडिया पर हर बड़ी फिल्म के रिलीज के वक्त बायकॉट बालीवुड का ट्रेंड चलाने वालों को भी ये बात समझ में नहीं आई या इसे सच माना जाए कि जवान के रिलीज के मौके पर दिल्ली में जी20 के आयोजन में जुटे सत्ताधीशों और उनकी जमात को जवान पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं मिली हो। इस तर्क को तो कोई नहीं मानेगा कि अतीत में इस तरह के ट्रेंड फिल्मों की सफलता में योगदान देते हैं, इसलिए इस बार इस हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ। बालीवुड के बायकाट के ट्रेंड को चलाने वाले अगर जरा भी समझदार होते, तो उनको बहुत पहले एहसास हो जाता कि आम दर्शक कभी भी इस तरह के वाहियात प्रपंचों पर ध्यान नहीं देता है। उम्मीद है कि जवान को लेकर आम जनता की स्वीकार्यता को लेकर सोशल मीडिया पर अब कोई ऐसा ट्रेंड नहीं चलेगा, जो जवान से ज्यादा ट्रेंड चलाने वालों की खिसियाहट का सबूत बन जाए। 

सोशल मीडिया के ट्रेंड से अलग जवान के सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है कि जवान ने ये दिखाया है कि किस तरह से एंटरटेनमेंट के मसालों के साथ सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों की बात की जा सकती है। अगर शाहरुख खान चाहते, तो वो इन मुद्दों को जवान से इसी आशंका के चलते हटा सकते थे कि कहीं दिल्ली दरबार का इशारा फिल्म की सफलता पर ग्रहण न लगा दे। 2014 से सत्ता में आए दिल्ली दरबार के आका किसी भी मामले को लेकर विरोध के सुरों से निपटने के लिए तमाम तरह के प्रोपगंडे करने में लग जाते हैं। इस सत्ता ने सिनेमा की दुनिया में भी अपने वैचारिक विरोधियों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। खान सितारों के अलावा नसीरुद्दीन शाह,  प्रकाश राज और स्वरा भास्कर तक तमाम कलाकार  इसके गवाह रहे हैं।

इसमें कोई शक नहीं है कि जवान को राजनैतिक और सामाजिक सरोकारों के साथ जोड़कर शाहरुख खान ने न सिर्फ अपने साहसी होने की मिसाल पेश की है, बल्कि उन लोगों को भी संदेश दिया है, जो ऐसा करने में दिल्ली दरबार की आंखों में किरकिरी बनने से बचे रहना पसंद करते हैं। ऐसा भी न माना जाए कि शाहरुख अपनी आने वाली सारी फिल्मों को अनिवार्य रुप से राजनैतिक और सामाजिक मामलों से जोड़ेंगे। जवान के बाद इसी साल क्रिसमस पर शाहरुख खान की नई फिल्म राजकुमार हीरानी के साथ रिलीज होगी। मुन्नाभाई से लेकर थ्री इडियटस और पीके से लेकर संजू तक सारी फिल्मों में राजू हीरानी ने एलईडी (लाफ्टर, इमोशन, ड्रामा) का अपना एक पैटर्न सेट किया है, जिसमें वे अपनी फिल्मों के सोशल बैकग्राउंड को बहुत मजबूत रखते हैं। उम्मीद की जा सकती है कि शाहरुख खान के साथ उनकी नई फिल्म भी उनके इसी पैटर्न पर होगी। इसमें कोई शक नहीं कि शाहरुख-हीरानी की जोड़ी की फिल्म से उम्मीदों का पहाड़ होगा और शायद किसी को शक होगा कि ये फिल्म बाक्स आफिस पर शाहरुख खान की महाकामयाबी की हैट्रिक लगाएगी। 

जवान की सफलता को लेकर एक और अहम बात सामने आती है, जो इसको सलमान खान से जोड़ती है। लगातार फ्लाप फिल्मों से हताश सलमान खान के लिए साउथ के रीमेक के तौर पर आई फिल्म रेड्डी ने कामयाबी के ट्रैक पर उनकी वापसी करा दी और फिर इसी ट्रैक पर सलमान ने बाडीगार्ड और दूसरी रीमेक फिल्मों की लाइन लगा दी। बजरंगी भाईजान को अपवाद मानें, तो साउथ की फिल्मों के रीमेक ने सलमान को शुरुआत में सफलता जरुर दिलाई, लेकिन सेंसबल फिल्मों की दुनिया से उनको दूर कर दिया। हाल ही में राधे और किसी का भाई, किसी की जान के बाक्स आफिस रिजल्ट सलमान की रीमेक स्टोरी की नाकामयाबी को दोहराती रहीं। जवान में शाहरुख खान ने साउथ की लाइन पकड़ी है। वे साउथ के सितारों और डायरेक्टरों को साथ लेकर फिल्में जरुर बनाएं, लेकिन सिर्फ रीमेक की पटरी पर दौड़े, तो उनको भी सलमान जैसा ही अनुभव होगा। 

जवान आने वाले वक्त में बाक्स आफिस पर कामयाबी के नए इतिहास रचती रहेगी और शाहरुख खान के सुपर स्टारडम का डंका बजता रहेगा। जवान में राजनैतिक और सामाजिक मुद्दों की मौजूदगी इस फिल्म की सफलता का ऐसा सच है, जिसने इस सफलता में चार चांद लगा दिए। 


ये लिंक भी पढ़ें- 

https://anujalankar.blogspot.com/2023/08/2.html

https://anujalankar.blogspot.com/2023/05/blog-post.html

#shahrukhkhan #jawan #Atlee #boxoffice #socialissue #polticalissue #rajkumarhirani #dhunki #pathan #aamirkhan #salmankhan #ready #bodyguard #radhe #kisikabhaikisikijaan #bjarangibhaijan #bhaigiri #bollywood #bollywoodbycott #kangana #anupamkher #society #southfilms #remakes 








Tuesday, September 5, 2023

शाहरुख खान और जवान : नया तीर, नया निशान




पठान का किला जीतने के बाद शाहरुख खान के लिए एक नया मैदान सजकर तैयार हो चुका है। एक बार फिर खान बादशाह को बाक्स आफिस का किला हासिल करने के लिए निशानेबाजी करनी है। उनके लिए एक नया तीर तैयार है और सामने एक नया निशान है। आने वाले शुक्रवार को किंग खान की निशानेबाजी का करतब सामने होगा और जवान का जश्न शुरु हो जाएगा। शाहरुख खान की नई फिल्म जवान रिलीज के लिए पूरी तरह से तैयार है। मार्केटिंग, प्रमोशन और क्रेजी फैंस ने उनकी बाकी फिल्मों की तरह इस फिल्म से जुड़ी उम्मीदों को आसमान पर पंहुचा दिया है। जैसे ही जवान का ये रुप सिनेमाई परदे पर आएगा, तो इससे जुड़ी उम्मीदों की असलियत बेपरदा होगी। फिल्म की एडवांस बुकिंग को लेकर अभी से दावे हो रहे हैं कि पठान के मुकाबले जवान कितनी आगे निकलेगी। 

शाहरुख खान जैसे सितारे का स्टारडम आंकड़ों की बाजीगरी का मोहताज नहीं होता, लेकिन लाजिमी तौर पर उनकी फिल्मों के आंकड़े उनकी कामयाबी के दायरे को बढ़ाने का काम करते हैं। यहां आकर पठान और जवान की बातों को साथ रखा जाए, तो कई दिलचस्प तथ्य सामने आते हैं। सबसे पहली बात तो यही है कि जिस तरह से किसी भी गेम के कामयाब खिलाड़ी से उम्मीद होती है कि वो अपने पिछले रिकार्ड को तोड़े। ऐसे ही उम्मीदें शाहरुख खान की फिल्मों से होती हैं। यही उम्मीद पठान से थी और ऐसी ही उम्मीदें अब जवान से हैं। 

इस साल जनवरी में रिलीज हुई पठान की सबसे बड़ी खासियत ये थी कि चार साल के गैप के बाद शाहरुख खान की फिल्म रिलीज हुई थी। 2018 की दीवाली पर रिलीज हुई जीरो के प्रमोशन और मार्केटिंग में भी कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी।  उस वक्त भी फैंस का क्रेज आसमान पर था, लेकिन जीरो का नतीजा ऐसा नहीं रहा, जैसा सोचा जा रहा था। जीरो के नतीजे ने शाहरुख खान और उनकी टीम को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया था। बात सिर्फ ये नहीं थी कि जीरो बाक्स आफिस पर एसआरके का मैजिक चलाने में नाकाम हुई थी, बल्कि जीरो से पहले  शाहरुख खान की कई फिल्मों ने इसी तरह से मायूस किया था। चेन्नई एक्सप्रेस के बाद शाहरुख खान की कई फिल्में कोई कमाल नहीं कर पाई थीं। इनमें हैप्पी न्यू ईयर, दिलवाले और जब हैरी मैटस सेजल के नाम शामिल रहे। इसी लिस्ट में जब जीरो का नाम भी जुड़ गया, तो शाहरुख खान और उनकी टीम को एहसास हुआ कि कुछ तो गड़बड़ है। इस गड़बड़ को पकड़ने के लिए पहला अहम फैसला हुआ कि कुछ वक्त के लिए शाहरुख खान परदे से दूर रहकर अपने लिए नई फिल्मों का सिलेक्शन करेंगे और तमाम सोच-विचार के बाद शाहरुख खान की नई फिल्मों की लिस्ट में यशराज की पठान, साउथ के अटली की फिल्म जवान और राजकुमार हीरानी की नई फिल्म धुनकी के नाम आए। पठान रिलीज हो चुकी है। जवान रिलीज पर है। धुनकी क्रिसमस पर आएगी। ये भी कम दिलचस्प नहीं है कि चार साल के गैप के बाद लौटे शाहरुख खान की एक ही साल में तीन फिल्में रिलीज होंगी। 


जवान जब रिलीज होने जा रही है, तो एक सहज सवाल हो जाता है कि शाहरुख खान की मौजूदगी के अलावा इस फिल्म में ऐसा क्या है, जिनको इसकाू एक्स फैक्टर माना जा सके। अब तक जो कुछ बातें सामने आई हैं, उनके मुताबिक, शाहरुख खान बाप-बेटे के डबल रोल में हैं। टकले अवतार में शाहरुख खान खुद ही विलेन माने जा रहे हैं। उनकी हीरोइन के तौर पर साउथ की बड़ी हीरोइन नयनतारा पहली बार हिंदी फिल्मों के परदे पर आ रही हैं। गेस्ट एपीरिंएस में दीपिका पादुकोण हैं। संजय दत्त से लेकर रजनीकांत और थलपति विजय के भी गेस्ट एपीरिएंस की बातें चर्चा में है। 


इन बातों में से कौन सी बातें जवान की सफलता में योगदान करेंगी, ये तो शुक्रवार को पता चलेगा। ये कहने की बात नहीं है कि सफलता का सारा दारोमदार खुद शाहरुख खान पर है। फिल्म का लुक, ग्रेंजर, धमाकेदार एक्शन और शाहरुख के कुछ अनदेखे लुक्स, जिनमें पुलिसवाला गेटअप और टकलू गेटअप खास है। मेट्रो रेल के डिब्बे में पुराने गीत (बेकरार करके हमें यूं न जाइए...) पर उनका स्टाइल भी तालियां बजाने वाला है। बेटे को पकड़ने से पहले बाप से बात करने वाला डायलाग भी धांसू मान लिया गया है। 

ये हैरानी की बात नहीं है कि जवान को लेकर शाहरुख के फैंस ने एक तरह से फेस्टिवल का माहौल बना डाला है। मणिरत्नम की दिल से के बाद शाहरुख खान साउथ के किसी निर्देशक के साथ आ रहे हैं, जिसका साउथ में अपना दबदबा है। इतना होने के बाद भी क्या कुछ ऐसी बातों पर गौर करना ठीक नहीं होगा, जिनको इस फिल्म के लिए बाधा जैसा माना जा सकता है। इन बातों में पहला नाम जवान के निर्देशक अटली का है, जो पहली बार हिंदी बेल्ट में आ रहे हैं। साउथ में झंडे गाड़ने वाले अटली के बारे में कहना मुश्किल है कि हिंदी बेल्ट के दर्शकों के सेंटीमेंटस को लेकर उनकी समझ कैसी है। उनकी हीरोइन नयनतारा भी पहली बार हिंदी में आ रही हैं। हां, मेहमान रोल में दीपिका पादुकोण दमदार लग रही हैं और उनकी मौजूदगी पठान के मैजिक को दोहरा सकती है। 


ये सारी बातें बंद मुट्ठी की तरह हैं। फिल्म का एक अहम फैक्टर इसका म्यूजिक है। यहां पठान का जिक्र करना होगा, क्योंकि पठान का एक बड़ा फैक्टर ये था कि उसका म्यूजिक रिलीज से पहले ही सुपर हिट हो चुका था, जिसने फिल्म की हाइप क्रिएट करने में बड़ा योगदान दिया था। जवान का म्यूजिक अनिरुद्ध ने दिया है, जो अटली की तरह साउथ में कमाल है, लेकिन हिंदी बेल्ट में न्यूकमर हैं। म्यूजिक के मामले में जवान को  हिट कहा जा सकता है, लेकिन सुपर हिट नहीं। फिल्म का एक भी गीत आम दर्शकों की जुबां पर नहीं आया है। दुआ की जा सकती है कि म्यूजिक का मामला जवान की कामयाबी में किसी तरह की बाधा नहीं बने। 

कुल मिलाकर शाहरुख के लिए दुआएं रखने वालों में से एक तबका जवान को लेकर तीन बातों पर ज्यादा जोर देता है। पिछली रिलीज पठान की सफलता को दोहराने और उससे आगे निकलने का प्रेशर, नया डायरेक्टर, जिसे हिंदी बेल्ट का कोई अंदाज नहीं। नई हीरोइन और ठंडा-ठंडा म्यूजिक। कोई दावा नहीं कर सकता कि इन बातों का जवान के बाक्स आफिस रिलीज पर क्या असर होगा। फैक्ट ये भी है कि सफल फिल्म की कमजोरियों पर कोई ध्यान नहीं देता और फ्लाप फिल्म में किसी को कोई खूबी नजर नहीं आती। 


शाहरुख खान जिस पोजीशन पर है, वहां एक तरफा उनको बाक्स आफिस के आंकड़ों की बाजीगरी से बहुत आगे माना जाता है, तो दूसरी तरफा ये उम्मीद भी की जाती है कि उनकी नई रिलीज बाक्स आफिस पर उनकी पिछली फिल्म के आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए नए रिकार्ड बनाए। आंकड़ों से अलग देखा जाए, तो शाहरुख खान के स्टारडम का सबसे पावरफुल पहलू ये है कि वो फिल्मों के बिजनेस की हर बारीकी को समझने के साथ ही अपने बाजार और अपने दर्शकों की संवेदनाओं की कसौटी पर खरा उतरें और ऐसा करने में वे अपनी उस्तादगिरी कई बार पहले भी कर चुके हैं, तो इस बार क्यों नहीं करेंगे। 

ऐसे में, जबकि जवान की रिलीज में चंद दिन ही बाकी बचे हैं, तमाम किंतु-परंतु से परे उम्मीद और दुआ करनी चाहिए कि पठान और गदर 2 के बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को एक और बड़ी सफलता मिले। जहां तक रही बात शाहरुख खान की, तो जवान उनके लिए न शुरुआत है और न ही कोई अंत है। जवान एक पड़ाव है, जहां से अगला सफर राजू हीरानी की नई फिल्म के साथ आगे बढ़ेगा। आल द बेस्ट शाहरुख एंड जवान ! 



 


कंगना मतलब...

हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रही स्वंयभू महाज्ञानी कंगना के ताजा बयान पर अमिताभ बच्चन को ये तय करना है कि वे इस पर अपना ...