Thursday, December 15, 2016

क्या ऐसा होता है सुपर स्टार


शाहरुख खान का राज ठाकरे से मिलना कोई मामूली बात नहीं। ये एक ऐसी घटना है, जिसको सालों-साल याद रखा जाएगा और सालों-साल इसका हवाला दिया जाएगा। इस मुलाकात ने एक लगातार कमजोर होते जा रहे नेता के आगे एक ताकतवर सुपर स्टार की हार को पैबंद कर दिया।

याद आता है, जब शाहरुख की फिल्म बल्लू को लेकर कुछ हज्जामों ने टाइटल को लेकर एतराज किया था, तो उन्होंने दिल्ली वाले लौंडे की स्टाइल में कहा था कि पठान बच्चा हूं, जरुरत से ज्यादा टेंशन बर्दाश्त नहीं कर सकता और अपनी स्टाइल में जवाब देना जानता हूं। एक और घटना याद आती है, जब माई नेम इज खान को लेकर इसी तरह का सियासी बवाल हो रहा था, तो माफी मांगने के नाम पर शाहरुख खान ने स्टैंड लिया था कि वे किसी से माफी नहीं मागेंगे और उन्होंने ऐसा ही किया।

अब ऐसा क्या हुआ कि शाहरुख खान राज ठाकरे के घर दौड़ पड़े। ये बात तो किसी को हजम नहीं होती कि वे सिर्फ ये कहने के लिए ठाकरे के घर जा पंहुचे, कि माहिरा फिल्म के प्रमोशन के लिए मुंबई नहीं आएंगी। ठाकरे की पार्टी का अब तक ऐतराज सिर्फ इस बात को लेकर था कि पाकिस्तानी कलाकारों को भारत की फिल्मों-टीवी शोज में काम नहीं दिया जाएगा। ए दिल है मुश्किल से वक्त ठाकरे की पार्टी ने साफ किया था कि जो फिल्में बनी हैं, उनको लेकर पार्टी कोई विरोध नहीं करेगी। इससे अलग ये बात भी मार्के की है कि जिस फिल्म में शाहरुख खान हों, उसके प्रमोशन के लिए किसी और की जरुरत ही कहां होती है।

शाहरुख खान से ज्यादा होशियार तो करण जौहर निकले। ऐ दिल है मुश्किल का पेंच फंसा, तो करण जौहर सीधा मुख्यमंत्री को बीच में ले आए। राज ठाकरे के साथ बातचीत भी मुख्यमंत्री के बंगले में हुई। मुख्यमंत्री की किरकिरी हुई, ये बात अलग है, लेकिन करण जौहर एे दिल है मुश्किल को मुसीबत से बाहर जरुर निकाल लाए। शाहरुख खान ने तो इस बार कुछ ऐसा किया, जैसे वे इंतजार कर रहे हों कि कब राज ठाकरे की पार्टी माहिरा खान को लेकर कुछ बोले और वे राज ठाकरे की चाय पीने के लिए लपक लें। शाहरुख खान की ये तलाबेली, ये बेचैनी, ये हड़कंप कुछ और ही इशारा कर गया, जिसकी गुत्थी फिलहाल तो अनसुलझी है। ये कभी सुलझेगी या नहीं, अलग मसला है, मगर इस मुलाकात ने शाहरुख खान को जिस दयनीय हालत में ला खड़ा किया, वो ऐसी भी नहीं है, जिसके लिए उनके साथ कोई सहानुभूति
भी रखी जा सकती हो।


सियासत का सिनेमा के साथ रिश्ता पुराना है। इन रिश्तों में दोस्ती भी रही और शिकायती दौर भी रहा। याद आता है, जब दिलीप कुमार को पाकिस्तानी सरकार ने वहां बुलाकर नवाजा, तो उनके मुरीद रहे शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे बुरी तरह से उखड़े थे और उन्होंने दिलीप कुमार को खूब बुरा-भला कहा था। मगर न तो उन्होंने दिलीप कुमार को अपने घर तलब किया, न दिलीप कुमार उनको कोई सफाई देने पंहुचे। बाला साहेब मानते रहे कि दिलीप कुमार की फिल्मों के वे अब भी मुरीद हैं, मगर पाकिस्तान जाकर दिलीप कुमार ने उनका दिल तोड़ा। शिवसेना सुप्रीमो के मन से कभी ये बात नहीं गई, मगर जब कभी उनको दिलीप कुमार की  तबियत नासाज होने की खबर मिली, तो उन्होंने उनकी खैरियत की दुआ जरुर मांगी।

ऐसा ही एक और उदाहरण अमिताभ बच्चन के साथ रहा। जब शहंशाह रिलीज हुई, तो बोफोर्सकांड में बच्चन का नाम उछला था। शिवसेना ने शहंशाह के बायकाट का एलान किया था। उस वक्त चैनलों की फौज नहीं थी, लेकिन प्रिंट मीडिया में इसे लेकर बवाल हुआ था। मामला किसी तरह से निपटा, लेकिन अमिताभ बच्चन इस मुद्दे पर बाला साहेब के घर नहीं पंहुचे, जबकि सालों से बच्चन और ठाकरे निजी रिश्तों में बंधे रहे हैं। शहंशाह वाले मामले से पहले भी और बाद में भी ये रिश्ते बेअसर रहे।

राज ठाकरे की ही बात करें, तो सलमान खान के साथ उनकी दोस्ती जग जाहिर है। सलमान के घर पर हर साल गणपति बैठते हैं, तो दर्शन करने वालों में राज ठाकरे भी होते हैं। मुंबई का हिट एंड रन केस हो या राजस्थान का चिंकारे के शिकार का मामला। सलमान जब भी कानूनी तौर पर फंसे, तो राज ठाकरे ने दोस्ती को साइड में कर दिया। बल्कि पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर सलमान की राय पर राज ठाकरे ने भड़कने से संकोच नहीं किया। जया बच्चन को बुड्ढी-गुड्डी कहकर मजाक उड़ाने वाले राज ठाकरे ने कुछ दिनों पहले अमिताभ बच्चन को अपनी पार्टी के एक समारोह में बुलाया, तो इज्जत से पांव छूए।

शाहरुख खान उनके घर जाएं या राज ठाकरे कभी शाहरुख के बंगले मन्नत में पंहुचे, इन मुलाकातों से किसी को सरोकार नहीं होता, जब तक इन मुलाकातों के साथ कोई मुद्दा न हो। शाहरुख अगर सिर्फ माहिरा वाली बात कहने के लिए राज ठाकरे की ड्योढ़ी तक पंहुचे, तो बात किसे हजम होगी। ये बात को वे राज ठाकरे को फोन पर ही बता  सकते थे। सवाल वहीं रह जाता है कि शाहरुख खान आखिरकार किस मकसद से राज ठाकरे के यहां पंहुचे..

याद किया जा सकता है कि जब एे दिल है मुश्किल को लेकर राज ठाकरे की पार्टी ने हो-हल्ला मचाया, तो हफ्ते भर से ज्यादा वक्त तक न्यूज चैनलों के प्राइम टाइम में ऐ दिल है मुश्किल ब्रेकिंग न्यूज बनी रही, तो चैनलों ने जमकर फिल्म के प्रोमो चलाए। करण जौहर अगर इन चैनलों में प्राइम टाइम के हिसाब से अपनी फिल्म के प्रोमो का एयरटाइम बुक कराते, तो उनको 70 करोड़ के आसपास रकम देनी पड़ती। राज ठाकरे की बदौलत चैनलों ने ये काम मुफ्त में कर दिया। अगर अपने दोस्त करण जौहर से रईस के प्रमोशन का ये मंत्र लेकर राज ठाकरे के घर पंहुचे, तो भी मामला फिट नहीं बैठने वाला। हमारे देसी चैनलों की फितरत निगेटिव न्यूज दिखाने की होती है। राज ठाकरे जब तक करण जौहर से नहीं मिले थे, चैनलों में तब तक ही ऐ दिल है मुश्किल ब्रेकिंग न्यूज बनी रही। क्या ऐसा नहीं लगता कि शाहरुख खान ने राज ठाकरे से मुलाकात में जल्दबाजी करके ये मौका भी गंवा दिया।

अगर शाहरुख खान को रईस के प्रमोशन के लिए कुछ नया करना है, तो अपनी टीम को नींद से जगाएं। किसने उम्मीद की होगी कि इस ललक में एक सुपर स्टार अपने स्टारडम को दांव पर लगा दे, वो भी शाहरुख खान जैसा सुपर स्टार। यकीन तो नहीं होता, मगर एक सुपर सितारे की एेसी हार का मंजर भी भला किसने सोचा होगा।

कंगना मतलब...

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