Friday, November 24, 2023

अब 'नागिन' जैसी 'धूम' नहीं होगी


फिल्म इंडस्ट्री के उन दो निर्देशकों की यादों को नमन, जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। 


19 नबंवर को संजय गढ़वी की दुनिया से विदाई हो गई, जिनकी पहचान यशराज में बनी धूम सीरिज की पहली दो फिल्मों के साथ बनी। यशराज के कर्ताधर्ता आदित्य चोपड़ा के साथ क्रिएटिव मतभेदों के चलते वे धूम सीरिज की तीसरी कड़ी से अलग हो गए और उनकी अगली फिल्मों को कामयाबी नहीं मिली। कुछ वक्त पहले खबर मिली थी कि अनिल शर्मा के छोटे भाई संजय शर्मा के लिए वे अभिषेक बच्चन के साथ कोई फिल्म प्लान कर रहे हैं। 
इससे कोई मना नहीं कर सकता कि जब भी धूम सीरिज की बात होगी, तो संजय गढ़वी को याद किया जाएगा। 



23 नवंबर को राजकुमार कोहली ने 93 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। तीन दशक से भी ज्यादा लंबे दौर में उनकी फिल्मों का आना-जाना लगा रहा। कोहली साहब की पहचान मल्टीस्टार कास्ट वाली फिल्मों से बनी। 
सत्तर और अस्सी के दशक के नामी सितारों के साथ मल्टीस्टार कास्ट फिल्में बनाना हंसी ठटठे का काम नहीं था।इस दौर के किसी भी कामयाब निर्देशक के लिए नागिन (रीना राय) या जानी दुश्मन जैसी फिल्में बनाना कतई मुमकिन नहीं होगा। इस दौर में भला कौन स्टार होगा, जो फीमेल सेंट्रिक फिल्म में एक दर्जन दूसरे सितारों के साथ काम करने के लिए मान जाएगा और उनके बीच कभी कोई खटपट नहीं होगी, लेकिन नागिन में ये कमाल हुआ, जिसमें टाइटल रोल रीना राय का था और सितारों की लिस्ट में सुनील दत्त, फिरोज खान, संजय खान, विनोद मेहरा, कबीर बेदी, अनिल धवन, प्रेमनाथ, रेखा, योगिता बाली जैसे दिग्गज सितारों की फौज थी। नागिन के बाद जानी दुश्मन भी इसी पैटर्न पर थी, जिसमें तमाम मसालों को एक हारर टच के साथ बनाया गया और पब्लिक ने फिल्म को सरआंखों पर बैठाया। इन मल्टीस्टार कास्ट फिल्मों का संगीत एक दमदार फैक्टर होता था। आज भी इन फिल्मों के गाने धड़ल्ले से सुने जाते हैं। फिल्मी संगीत के रसातल वाले इस दौर में नागिन और जानी दुश्मन जैसे गानों के रीमिक्स से लेकर रील्स और टिकटॉक में इन गानों पर उछलते-फांदते किरदार इस संगीत की अभूतपूर्व कामयाबी का दस्तावेज है। 

एक दौर आया, जब वे अपना ये मिदास टच खो बैठे। बाकी कसर बेटे (अरमान कोहली) को स्टार बनाने की जिद ने पूरी कर दी। उनके साहेबजादे ने साबित किया कि औलाद निकम्मी हो, तो मां-बाप को चैन से नहीं रहने देती। इस बात को जाने दीजिए। 
कोहली साहब के खाते में दर्ज उनकी मल्टीस्टार फिल्मों की लिस्ट निकालिए और उनकी मास्टरी को सलाम कीजिए। अब जन्नत में कोहली साहब को उनके बहुत सारे पसंदीदा सितारे मिल जाएंगे। राजकुमार से लेकर सुनील दत्त,  संजीव कुमार, फिरोज खान, शशि कपूर, राजेश खन्ना, विनोद मेहरा, शम्मी कपूर, विनोद खन्ना के साथ वे एक मसालेदार फिल्म की कास्टिंग तो मजे से कर सकते हैं। 
हमेशा सुफैद शर्ट-पैंट पहने कोहली साहब का खालिस पंजाबियत वाला मस्तमौला अंदाज, कभी न समझ में आने वाले चुटकलों पर ठहाके और तुरंत समझ में आने वाले पैगों की महफिलों के हिस्सा बन चुके लोगों के पास याद करने के लिए बहुत कुछ होगा, फिर भी मुमकिन है कि इस यारों के यार को याद करते हुए उनके आंसू न रुकें। 
एक बार फिर दोनों दिग्गज निर्देशकों को श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दे। 🙏

बताइए-

संजय गड़वी की दोनों धूमों में से कौन सी पसंद है ?

राजकुमार कोहली की सबसे अच्छी फिल्म कौन-सी लगती है ?

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2 comments:

Abhishek Varu said...

👏🏼👏🏼👏🏼

atul sharma said...

दोनों अपनी तरह के अलग director थे. संजय ने Stylish thrillers का दौर शुरू किया और कोहली साब को बड़े सितारों को इकठ्ठा करने में महारत थी. दोनों को नमन 🙏

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