ये विचित्र संयोग है कि देश का मीडिया उस महान सांसद को लेकर त्राही-त्राही कर रहा है, जिसने एयर लाइंस के कर्मचारी पर अपने पैर के सैंडिल से पौरुषत्व दिखाया, तो दूसरी तरफ कुछ दिनों पहले दुनिया के सामने आए कपिल शर्मा की बहादुरी के किस्से में भी इस बात का जिक्र है कि कैसे एक हवाई यात्रा के दौरान उन्होंने सुनील ग्रोवर पर जूता फेंका, जिसके बाद दोनों के बीच बात बढ़ती चली गई और आज दोनों उलट छोर पर खड़े नजर आ रहे हैं।
बहादुरी की इन दो अलग अलग वारदातों का इक सच ये है कि सत्ता और कामयाबी का नशा जब सर पर सवार होता है, तो दो आंखों वाले इंसान अंधे हुए नजर आते हैं। मीडिया का मातम तो अगली ब्रेकिंग न्यूज के साथ खत्म हो जाएगा, मगर कामयाबी के स्याह पन्नों पर ये सच दर्ज हो गया कि एक स्टार अपने स्टारडम की चकाचौंध में नीच हरकत करने में शर्म महसूस नहीं करता।
सिर्फ सिनेमा ही नहीं, मनोरंजन की दुनिया का इतिहास ऐसे सूरमाओं के किस्सों से अटा पड़ा है, जो स्टारडम की अंधी चमक के शिकार होकर गुमनामी के अंधेरे में खोते चले गए। कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच की मौजूदा कलह में भले ही पहली नजर में कसूरवार कपिल नजर आएं, लेकिन अगर धरातल और अतीत को मिलाया जाए, तो शक नहीं रह जाता कि कसूर दोनों का है। इनके बीच की कलह स्टारडम के नशे के सिवाय कुछ नहीं है, जिसके सुरुर और गरुर का नशा इन दोनों के सर पर बुरी तरह से सवार हो चुका है। ये कलह न तो इस नशे का पहला उदाहरण है और न ही आखिरी। इस कलह में बहस का लब्बोलुआब महज इतना रह जाता है कि स्टारडम के नशे में दोनों में से कौन कम और कौन कितना ज्यादा डूब चुका है। दरअसल इन शूरवीरों के बीच असली टकराव उस हवाबाजी को लेकर है, जिसमें इन दोनों में से किसी को ये मंजूर नहीं कि उस शो का क्रेडिट दूसरे को मिले, जिस पर वे अपना और सिर्फ अपना हक मानते हैं और इसी को लेकर दोनों एक दूसरे से भिड़ने का मौका हाथ से नहीं जाने देते।
दोनों इस टकराव की झलक इससे पहले पार्ट 1 का शो दिखा चुके हैं, जब कपिल का शो कलर चैनल पर चल रहा था, तो गुत्थी की कामयाबी से आसमान पर पंहुचे सुनील ग्रोवर ने अपने स्टारडम की पावर दिखाने और कपिल के शो को चैलेज करने के लिए स्टार प्लस पर अपना कामेडी शो शुरु किया था। स्टारडम की पावर को लेकर हुए इस भद्दे मुकाबले में दोनों ही फेल साबित हुए। स्टार प्लस पर सुनीील ग्रोवर का शो फ्लाप रहा, तो कलर पर कपिल का शो बंद हुआ और कपिल सोनी पर शिफ्ट हुए, तो उनकी टीम में खिसियानी बिल्ली की तरह सुनील ग्रोवर को वापस आना पड़ा। सुनील की वापसी को कपिल शर्मा ने खुशी से स्वीकार नहीं किया। दरअसल सुनील ग्रोवर की वापसी ने इस बात की मुहर लगा दी कि पहले गुत्थी और फिर डाक्टर के गेटअप में उनकी अदायगी इस शो की टीआरपी के खेल का अहम हिस्सा है। ये बात न तो कपिल शर्मा को हजम हुई और न ही सुनील ग्रोवर स्टार प्लस पर अपने शो की नाकामयाबी को भूल सके। ये भी कड़वी हकीकत है कि अगर शो को टेलीकास्ट करने वाले सोनी चैनल का चाबुक न होता, तो सर्कस के शेरों की मानिंद इनकी उछलकूद के किस्से पहले ही बाहर आ जाते।
मनोरंजन के नाम पर खुले चैनलों के आका जिस टीआरपी के खेल के लिए कोई भी खेल खेलने में शर्म नहीं करते, उसी टीआरपी के खेल ने कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर को दौलत का ढेर तो दे दिया, लेकिन शर्म, हया और इंसानियत की तरफ जाने का मौका नहीं दिया।
इन दोनों ने लंबे संघर्ष के बाद कामयाबी की जिस जमीन को तैयार किया, उसकी फसल पर दोनों आपसी फुटव्वल में लग गए, अपनी कामयाबी के असली नायकों को तो दोनों में से कोई याद नहीं करता। इन दोनों को कामयाबी का ये तोहफा देश और विदेश की उस हिंदुस्तानी अवाम ने दिया, जो इनकी हंसी को अपनी हंसी मानने लगी। किसी भी चैनल के किसी भी शो को टीआरपी के खेल मेें जीतने के लिए जब पब्लिक का साथ मिल जाए, तो फिर बल्ले बल्ले ही होती है, लेकिन कपिल की महानता की मिसाल देखिए कि अपने ही शो में आए या बुलाए गए आम जनता की इज्जत से खिलवाड़ करने का कोई मौका उन्होंने छोड़ा नहीं। दूसरों की इज्जत से खिलवाड़ करने में कपिल शर्मा का कोई सानी नहीं हो सकता। मक्कारी से लेकर चापलूसी के हर गुर में माहिर इस कामेडियन की कामयाबी की खोखली इमारत को आज नहीं, तो आने वाले वक्त में भरभराकर ही गिर जाना है। सुनील ग्रोवर तो पहला धक्का मार ही चुके हैं। जिस दिन चैनलों के टीआरपी के खेल में कपिल की कामेडी पिछड़ने लगी, उस दिन इन चैनलों के आका उनको समझाएंगे कि दूध में से मक्खी को कैसे बाहर निकाला जाता है।
सुनील ग्रोवर भी दध के धुले नहीं हैं। वे भी इसी वहम में जीते आ रहे हैं कि देश और दुनिया में उनसे बड़ा कामेडियन कोई नहीं है। सुनील ग्रोवर ने भी इतिहास का वो सबक नहीं पढ़ा, जिसमें दर्ज है कि अहम की मार के शिकार सूरमाओं को किस तरह जमींदोज होना प़ड़ा। सुनील ग्रोवर ने कभी ये जताने का मौका नहीं छोड़ा कि शो में भले ही नाम कपिल शर्मा का जुड़ा
हो, लेकिन शो सिर्फ उनकी वजह से चल रहा है। स्टार प्लस पर अपने शो की विफलता (जिसके कारण भी कम दिलचस्प नहीं हैं) के बाद सुनील ग्रोवर की कुंठा उस वक्त ज्यादा बढ़ी, जब उनको उसी कपिल शर्मा शो में वापसी करनी पड़ी, जिसको औकात बताने की हुंकार के साथ वे स्टार प्लस पर पंहुचे थे। कपिल और सुनील साथ में काम करते आए, तो इसलिए नहीं कि दोनों एक दूसरे की जरुरत को महसूस करते रहे, बल्कि दोनों अपनी अपनी मजबूरी से बंधे हुए थे और दोनों ने कभी इस मजबूरी से आजादी पाने की कोशिश नहीं की। ये मजबूरी चैनलों की टीआरपी का वो खेल है, जिसमें हर कोई मजबूर होकर हर फैसला कबूल करता है। यही मजबूरी इन दोनों को वक्त बेवक्त टकराव के उस मकाम पर ले आती है, जिसमें दोनों एक दूसरे को नीचा दिखाने के शौक को तबियत से पूरा करना चाहते हैं। यही पहले हुआ था, यही अब हुआ और अगर चैनल ने इस बार बीच-बचाव कर लिया, तो भी ये आगे भी होगा। दोनों अपने ईगो की लड़ाई में सबसे ज्यादा अपमान उस जनता का कर रहे हैं, जिसने गलती से उनको इस कामयाबी का रास्ता दिखा दिया।
दोनों की कामयाबी का आईना उस वक्त भी सामने आया था, जब दोनों ने फिल्मों के परदे पर स्टारडम की ताल ठोकी थी। अब्बास मस्तान की फिल्म के नतीजे में कपिल के स्टारडम की कलई खुली थी, तो सुनील ग्रोवर की फिल्म (काफी विद डी) को दो शो की कामयाबी भी नहीं मिली थी। दोनों को अपनी कामयाबी के इस आईने पर शायद ही शर्मिंदगी होने की जरुरत महसूस हुई हो। ये तमाशा हुआ, तो इसलिए कि दोनों स्टारडम के शिकार हैं। दोनों उस कामयाबी के नशे में चूर हैं, जिसकी उम्र बहुत लंबी नहीं होती। दोनों इससे कोई सबक सीखेंगे, ऐसी उम्मीद भी नहीं की जा सकती।
अपनी कमजोर और खोखली कामयाबी के मैदान में उछलकूद कर रहे इन दो महानुभवों को काश कोई अमिताभ बच्चन की उस लाइन की कापी पंहुचा दे, जिसमें सदी के महानायक ने कहा था कि कामयाबी का असली कारण टेलेंट नहीं, बल्कि वे मौके होते हैं, जो आपको मिल जाते हैं। इन मौकों को कामयाबी में बदलने में पहली जरुरत उस विनम्रता और सहनशीलता की होती है, जो टेलेंट के लिए रास्ता बनाती हैं। कड़े संघर्ष के बाद कामयाबी का लंबा सफर तय करने वाले महानायकी के इस सच से कपिल और सुनील ग्रोवर सरीखी आत्माएं अगर सबक सीख सकतीं, तो उनके स्टारडम की इतनी लचर कतई नहीं होती।

















