लो जी, नए साल की शुरुआत में नाना पाटेकर से जुड़े उस ब्लाग का नंबर आ ही गया, जो पिछले काफी वक्त से किसी न किसी वजह से टलता जा रहा था। संयोग देखिए कि आज साल का दूसरा दिन है, जबकि पूरी दुनिया ने एक दिन पहले, यानी नए साल के पहले दिन के जश्न में नाना का बर्थ डे भी सेलिब्रेट किया। ख्याल दो बातों का रखा जाए। ब्लाग का फोकस उन दो खास बातों को लेकर है, जिसे लेकर वे पिछले साल सुर्खियों में रहे। कभी इलेक्शन, तो कभी क्रिकेट वर्ल्ड कप तो कभी अयोध्या में राम मंदिर का मामला। वक्त का पहिया आगे बढ़ता रहा और नाना वाला ब्लाग अपनी बारी का इंतजार करता रहा। अब सीधे मुद्दे पर आते हैं।
तमाम खबरों के बीच इस खबर ने बहुत ज्यादा रंग नहीं दिखाया कि बनारस में किसी फिल्म की शूटिंग करने गए नाना पाटेकर ने एक बच्चे को इस वजह से चांटा जड़ दिया कि वो गरीब उनकी परमीशन के बिना सेल्फी लेने की हिमाकत कर रहा था। नाना ने किसी को थप्पड़ मारा, ये दरअसल न्यूज नहीं बनी थी, क्योंकि कुत्ता इंसान को काटे, तो न्यूज ब्रेक नहीं होती, बल्कि इंसान किसी कुत्ते को दांत गाड़े तो खबर जरुर बन जाती है। नाना के हाथों की कला के दो दिन बाद असली खबर आई कि नाना ने थप्पड़ हजम करने वाले बालक से माफी मांग ली। क्या कहा, नाना ने सॉरी कहा। ये मिजाज तो उनकी इमेज से मेल नहीं खाता। वे कैमरे के सामने आकर हम काहे तो माफी मांगेगा का स्टाइल दिखाते, तो ज्यादा मजेदार होता। थप्पड़वीर बालक नाना के पास पंहुचा या नहीं, माफी नामा हुआ या नहीं इसकी कोई खबर नहीं बनी। किसी ने बढ़िया कहा कि नाना को याद दिलाया गया कि गुरु, ये बनारस है। पीएम का इलाका। कुछ ऐसा-वैसा करोगे, तो कसम भोले भंडारी की, पब्लिक मुंबई तक दौड़ाएगी और बनारस की संकीर गलियों में खाटी मराठियों की बड़ी जमात रहती है। ये भी मुमकिन था कि थप्पड़ वीर बालक का कोई कनेक्शन बीजेपी के किसी नेता से हो और उस नेता का कनेक्शन प्रदेश के बाबा से हो। ऐसे में नाना ने माफी के लिए हां हां कहने में भी भलाई समझी हो। क्या कहा, मामले को राजनीति से जोड़ने की जरुरत नहीं है। क्या कहा, नाना का राजनीति से कोई कनेक्शन नहीं। महाराष्ट्र के हिंदी भाषी लोगों को मार-पीट कर दौड़ाने वाले राज ठाकरे के लोगों ने हंगामा मचाया, तो पूरे देश में बेजोड़ कलाकार से एक प्रांतवादी होने तक अपना कद घटाने वाले नाना ने राजनैतिक स्टाइल में खुद ही स्टेटमेंट कर दिया कि राज ठाकरे कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं।तनुश्री दत्ता वाले कांड तो जाने दो, उसका सच तो कभी सामने आएगा नहीं, लेकिन जानता हर कोई है। नाना के राजनैतिक दर्शन शास्त्र के एक बार फिर दर्शन हो गए, जब उन्होंने हिंदु मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने वाले विवेक अग्निहोत्री की सरकारी प्रोपगंडा फिल्म में काम करने से गुरेज नहीं किया और प्रमोशन को चोचलेबाजी करार देने वाले नाना ने इस फिल्म के प्रमोशन के लिए देश भर में दौड़ लगाई और अग्निहोत्री के स्टैंड को लेकर हां में गर्दन भी हिला दी।
नाना वही हैं, जिन्होंने गैरकानूनी हथियार रखने के मामले में सजा काटने वाले संजय दत्त के लिए ऐलान कर दिया था कि वे कभी उनके साथ काम नहीं करेंगे। मत करो भई, संजय दत्त के पास फिल्मों की कमी नहीं है। याद आया, वेलकम सीरिज की दो फिल्मों में नाना रहे और अब वेलकम तीन में संजय दत्त आ गए। नाना किसके साथ काम करें या न करें, इसमें उनकी मर्जी को कौन रोके और क्यों रोके।पता नहीं, थप्पड़-कांड से नाना को क्या मिला। उन्होंने माफी मांगी, माफी हुई या नहीं, ये भी आई-गई है। बस एक ही बात, एक मच्छर ने जिस तरह से आदमी की पहचान बदल देता है (नाना का कालजयी डायलाग), उसी तरह से जब अव्वल दर्जे का अदाकार जब एक अदने से फिल्म वाले की घटिया सोच के साथ सुर मिलाता है, तो उसकी पहचान का क्या होता है, ये भी नाना वही जानें.
जय हिंद, जय महाराष्ट !
ब्लाग के ये लिंक भी देखिए-
मामला रश्मिका का नहीं, लड़कियों की इज्जत का है





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