Sunday, December 24, 2017

T- ट्यूबलाइट, T- टाइगर : एक हार, एक जीत


इस फिल्मी टाइगर की दहाड़ तकरीबन वैसी ही रही, जैसी होनी चाहिए थी। तय हो गया कि इस बार बाक्स आफिस की ट्यूब लाइट जगमग रोशन करेगी।  जरा सोचिए कि ये टाइगर अगर कुछ महीनों पहले ईद के मौके पर दस्तक देता, तो मुमकिन था कि सलमान खान को ट्यूब लाइट के उन अंधरों से नहीं गुजरना होता, जिनसे गुजरने के बाद उनके लिए टाइगर जिंदा है की अहमियत बढ़ी।

टाइगर जिंदा है को मिली कामयाबी इस मायने में सबसे अहम हो जाती है कि सलमान खान उस ट्रैक पर लौट आए, जिस ट्रैक पर कई सालों से उनकी फिल्में बाक्स आफिस और उनके फैंस को खुशनुमा बनाती रही हैं। ईद पर आई ट्यूबलाइट सलमान खान को उस खोल से बाहर आने के लिए एक मौका भर थी, जहां वे अपनी मसाला फिल्मों से अलग बतौर कलाकार कुछ ऐसा करें, जहां उनके सिक्स पैक या एक्शन नहीं, उनकी अदायगी की बात हो। अगर सलमान खान ये मौका चूक गए, तो इसके लिए वे अकेले जिम्मेदार नहीं, बल्कि निर्देशक कबीर खान और टीम भी जिम्मेदार है।

अब जरा एक पल के लिए सोचकर देखिए कि अगर बाक्स आफिस पर ट्यूबलाइट की बत्ती जल उठती, तो फिर टाइगर के लिए उम्मीदों का सबब कुछ और होता। मुमकिन था कि सलमान से परफारमेंस की उम्मीद की जाने लगती। इस लिहाज से देखा जाए, तो सबसे पहले सलमान के फैंस का शुक्रगुजार होना चाहिए, जिन्होंने ट्यूबलाइट की बत्ती बुझाकर खान सितारे को उसी रास्ते पर वापस जाने का रास्ता दिखा दिया, जहां मसालों की कमी नहीं होती और अदायगी की संभावना नहीं रहती। ट्यूबलाइट इसी लिहाज से कमजोर फिल्म मानी गई, क्योंकि ये सलमान स्टाइल की फिल्म नहीं थी और टाइगर जिंदा है की गूंज इसलिए हुई, क्योंकि ये सलमान स्टाइल की फिल्म है। ये दोनों फिल्में स्टार सलमान और कलाकार सलमान के उस अंतर को रेखांकित करती हैं, जो ट्यूबलाइट को फ्लाप और टाइगर को सुपर हिट की श्रेणी में पंहुचा देता है।

इसके लिए सलमान खान का साधुवाद भी होना चाहिए कि उन्होंने ट्यूबलाइट के साथ आए अपने फैंस के संदेश को सुना, समझा और उस पर अमल किया। अगर वे एक और ट्यूबलाइट जैसी कोशिश में लग जाते, तो न जाने उनके स्टारडम का क्या होता। यहां मार्के की बात ये भी है कि टाइगर जिंदा है को बनाने का फैसला ट्यूबलाइट के नतीजे सामने आने के बाद नहीं हुआ था। जब ट्यूबलाइट रिलीज हुई, तो टाइगर जिंदा है का आधा सफर तय हो चुका था। ट्यूबलाइट के बाद टाइगर की टीम को यही टास्क मिला कि मसालों की डोज बढ़ाई जाए और टीम टाइगर अपने इस मिशन में कामयाब रही। सलमान के चाहने वालों ने इस कामयाबी पर अपनी रजामंदी की मुहर लगा दी।

टाइगर को मिली कामयाबी ने एक अहम काम ये किया कि अब कई सालों तक सलमान की किसी फिल्म के लिए स्टोरी, कैरेक्टर या कुछ और सोचने की जेहमत नहीं उठानी होगी। सलमान फिल्म, मतलब मसाले और मसालों के बारे में सोचने या समझने की कोई जरुरत नहीं है। इसे अन्यथा लेने की जरुरत नहीं है। सलमान ने भले ही फिल्मों मेंं तकरीबन 30 साल का सफर कर लिया है, लेकिन पिछले दस सालों में उनकी मसालेदार फिल्मों ने जिस तरह से उनके सुपरस्टारडम को मजबूती दी है, उसे किसी भी सूरत में नकारा नहीं जा सकता और ट्यूबलाइट का झटका खाने के बाद अगर सलमान अपने स्टारडम को बचाने के लिए टाइगर में मसालों की डोज बढ़ाते हैं, तो ये बात भी समझ में आ जाती है।

ये बात ट्यूबलाइट के फौरन बाद उसी वक्त समझ में आ गई थी, जब  सलमान ने रिमो डिसूजा की उस फिल्म को रोक दिया था, जिसमें वे एक 12 साल की बच्ची के विधुर पिता की संवेदनशील भूमिका में काम करने के लिए राजी हो चुके थे। ट्यूबलाइट के बाद सलमान के लिए ऐसी गैरमसालेदार फिल्म में एक और रिस्क लेना खतरे से खाली नहीं था, इसलिए इसे रोककर इसके निर्देशक को मुआवजे के तौर पर सलमान ने रेस 3 का डायरेक्टर बना दिया। अगली ईद पर आने वाली रेस 3 भी टाइगर मार्के की मसालेदार फिल्म होगी और इस बार सलमान के फैंस को वही ईदी मिलेगी, जो उनको चाहिए।

ट्यूबलाइट भी फिल्म थी और टाइगर भी फिल्म है। सलमान खान दोनों फिल्मों में नायक बने। ट्यूबलाइट में सलमान परदे पर रोए, तो वे खारिज हो गए। टाइगर में वे टाइगर की तरह दहाड़े, तो उनके फैंस गदगद हो गए। टाइगर जीत गया। उनके फैंस खुश हो गए। सबका वारा-न्यारा हो गया। एक उम्मीद लंबे समय के लिए नाउम्मीद बन गई कि अब सलमान किसी फिल्म में कहानी, किरदार की टेंशन नहीं लेंगे। स्टार सलमान को एक और कामयाबी मुबारक। एक्टर सलमान खान के लिए इस मसालेदार फिल्मों की दुनिया में अब जल्दी से कोई मौका मिलेगा, इसमें भी शंका है। स्टार सलमान के फैंस की दुनिया जगमग है। एक्टर सलमान का इंतजार न जाने कब खत्म होगा?

आखिरी बात- सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई के बाद भी ट्यूबलाइट बाक्स आफिस की जंग जीत जाती है और रिलीज के दो दिनों में 64 करोड़ की कमाई के साथ टाइगर की पताका बाक्स आफिस पर फहरती नजर आती है। इन दो फिल्मों के बीच एक स्टार और एक एक्टर के होने के अंतर को समझा जा सकता है।



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