ऐसे में, जब गदर 2 बाक्स आफिस पर रिकार्ड तोड़ कमाई कर रही हो, ये खबर चौंकाने वाली थी कि फिल्म के हीरो सनी देओल की मुंबई में स्थित जुहू विला को बैंक आफ बड़ोदा नीलाम करने जा रहा है, क्योंकि सनी देओल पर 56 करोड़ का कर्ज है। बैंक ने अखबारों में नीलामी के विज्ञापन निकाले और इससे पहले कुछ हो पाता, किसी तकनीकी वजह को आधार बनाकर नीलामी के प्रोसेस पर रोक लगा दी। सनी फिल्म इंडस्ट्री के पहले हीरो नहीं है, जिनके कर्जे का ये नतीजा देखने को मिला। याद किया जा सकता है कि अमिताभ बच्चन ने भी कर्जे न चुका पाने का एक कड़वा दौर देखा है। सनी और अमिताभ बच्चन के मामलों की तुलना नहीं हो सकती। अमिताभ बच्चन का मामला ज्यादा साफ था, जबकि सनी देओल के मामले की असलियत किसी को नहीं पता कि उन्होंने किसलिए ये कर्जा लिया और क्यों नहीं लौटाया।

सनी के मामले को लेकर कोई भी शख्स सबसे पहले यही सोचेगा कि जिस हीरो की नई फिल्म (गदर 2) बाक्स आफिस पर करोड़ों की कमाई कर रही हो, उसे 56 करोड़ का कर्जा चुकाने में कैसा समस्या हो सकती है। ये फिल्म रिलीज न हो पाती, तो भी जहां तक दुनिया को सनी देओल के बारे में पता है, वे जानते हैं कि उनके पापा धर्मेंद्र की करोड़ों की प्रापर्टी है।
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| सनी विला, जिसमें सनी सुपर साउंड है |
मुंबई के जुहू में ही एक बड़ा बंगला है, जिसमें धर्मेंद्र, सनी और बाबी देओल के परिवार एक साथ रहते हैं। जुहू में ही सनी देओल का रिकार्डिंग स्टूडियो सनी सुपर साउंड है। जिस जगह ये स्टूडियो है, जिसका नाम सनी विला है और इसी को नीलाम करने के लिए बैंक ने ये नोटिस दिया था। सनी की गाड़ियों के काफिले में एक से बढ़कर एक महंगी कारें हैं। मुंबई के नजदीक पनवेल में उनका एक बड़ा फाम-हाउस है, जहां फिलहाल धर्मेंद्र रहते हैं। मुंबई से लेकर लंदन और पंजाब तक देओल परिवार की तमाम प्रापर्टी बताई जाती हैं। सनी और उनके छोटे भैया बॉबी देओल को किसी भी फिल्म में काम करने के लिए करोड़ों रु. की फीस मिलती है।
सनी को करीब से जानने वाले लोगों को ये खबरें नहीं चौंकाती। फिल्म इंडस्ट्री में परदे के पीछे की खबरों में अपने कर्जों को लेकर वे काफी समय से चर्चाओं में रहे हैं। अब अगर बैंक ने नीलामी का नोटिस अखबारों में न छापा होता, तो फिल्म इंडस्ट्री से बाहर की दुनिया को इस मामले का पता नहीं चलता।
सनी को लेकर कुछ सालों का एक किस्सा बहुत चर्चा में रहा। ये उस वक्त की बात है, जब घायल, दामिनी और घातक जैसी फिल्मों की सफलता के साथ उनकी दमदार वापसी हुई थी। कुछ निर्माताओं ने निजी तौर पर अपने अनुभव शेयर किए कि नई फिल्मों को लेकर सनी ने एक चकरी घुमाई थी।

ये चकरी कुछ इस तरह से होती थी। एक निर्माता ने सनी देओल को अपनी फिल्म के लिए साइन किया और 20 लाख का एडवांस दे दिया। कुछ दिनों में सनी ने एक और नई फिल्म साइन की और इस बार एडवांस के तौर पर उन्होंने 30 लाख रु. लिया। अब सनी ने पहले वाले उस निर्माता को बुलाया, जिससे वे 20 लाख का एडवांस ले चुके थे। सनी ने उस निर्माता को कोई मजबूरी बताकर उसकी फिल्म में काम करने से मना कर दिया और एडवांस के तौर पर लिए 20 लाख में से 10 लाख लौटा दिए और बाकी रकम बाद में लौटाने का वादा किया। इस तरह से उस फिल्म का चैपटर बंद कर दिया। अब कुछ दिनों बाद सनी ने एक और फिल्म साइन की और इस बार उन्होंने एडवांस में 40 लाख रु ले लिया। अब उन्होंने उस निर्माता को बुलाया, जिससे उन्होंने 30 लाख रु एडवांस लिया था। सनी ने कुछ मजबूरी बताकर उसकी फिल्म में भी काम करने से मना कर दिया और उसे एडवांस में लिए 30 लाख में से 15 लाख रु लौटा दिए और इस निर्माता को भी बाकी रकम जल्दी लौटाने का वादा करके उसकी फिल्म का एकाउंट भी बंद कर दिया। कुछ दिनों बाद एक और निर्माता ने सनी को एडवांस में 50 लाख रु दे दिया और सनी ने उस निर्माता को बुलाकर 20 लाख रु दे दिए, जिससे उन्होंने 40 लाख रु का एडवांस लिया था। इस फिल्म का भी एकाउंट बंद हो गया।
बताते हैं कि उस दौर में सनी ने इस पैटर्न पर कम से कम आधा दर्जन (6 निर्माताओं) के साथ यही खेल खेला था। गणित जानने वाले गुणा-भाग करके जान सकते हैं कि बिना किसी फिल्म में काम किए सनी ने कितनी रकम अंदर कर ली। सनी ने जिन निर्माताओं को एडवांस की बाकी रकम लौटाने का वादा किया था, उनमें से एक भी ऐसा नहीं रहा होगा, जिसने सनी से बाकी रकम के पेमेंट के लिए कभी कांट्रेक्ट किया हो। हर निर्माता यही सोचकर राहत महसूस करता रहा कि उसकी कम से कम आधी रकम तो वापस मिल गई।
अगर गौर से देखें, तो अमिताभ बच्चन का मामला ज्यादा साफ था। उन्होंने एबीसीएल कंपनी बनाई, जिसने पहली बार भारत में मिस वर्ल्ड का आयोजन किया। फिल्में बनानी शुरु कीं, फिर भी एबीसीएल की नैया डगमगाने लगी। जल्दी ही ये कंपनी दिवालिया हो गई और
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| अमिताभ को राहत पंहुचाने वाले अमर सिंह |
अमिताभ बच्चन पर दूरदर्शन की सौ करोड़ की देनदारी हो गई। उस दौर में अगर अमर सिंह उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए होते, तो दूरदर्शन की देनदारी चुकाने के लिए बच्चन को भी अपनी प्रापर्टी की नीलामी के दंश को सहना पड़ता। आर्थिक बदहाली के उसी दौर में अमिताभ बच्चन को फिल्मों में काम मांगने के लिए निर्माताओं के आफिसों के चक्कर लगाने पड़े। काम मांगने के लिए ही उन्होंने यश चोपड़ा से संपर्क किया, तो उनको मोहब्बत में कास्ट किया गया और इस फिल्म के बाद कौन बनेगा करोड़पति ने बच्चन की जिंदगी की दिशा और दशा दोनों को बदल दिया।
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| यशराज की मोहब्बतें में अमिताभ |
आर्थिक बदहाली के इस दौर से अमिताभ बच्चन ने सबक सीखा और जब जैकी श्राफ की पत्नी आयशा की फिल्म बूम में काम करने के एवज में मिला 25 लाख का चेक बाउंस हो गया, तो बिना लाग लपेट के अमिताभ बच्चन ने उनको लीगल नोटिस भिजवाने में भी गुरेज नहीं किया और मीडिया के सामने भी माना कि वे पैसों के लिए अब कोई कंप्रोमाइज नहीं करते।
मनोरंजन की दुनिया में अमिताभ या सनी मात्र उदाहरण नहीं हैं, जो आर्थिक संकट से गुजरे हों। ये जगमग दुनिया हमेशा से अनिश्चितता से घिरी रहती है, जहां नाकामयाबी किसी को बर्बाद करने में देर नहीं लगाती। कितने ही उदाहरण ऐसे हैं, जहां आर्थिक तंगहाली से बड़े सितारों की जिंदगी का ऐसा दर्दनाक हुआ कि उनके अंतिम संस्कार के लिए भी चंदा इकट्ठा करना पड़ा।
अमिताभ बच्चन का मामला आया और चला गया। सनी का मामला भी थोड़े दिनों बाद किसी को याद नहीं रहेगा, लेकिन ये बात शायद हर किसी को याद रहेगी कि बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज दोहरे चेहरों के साथ जीते हैं और इनमें से असली चेहरे को पहचानना सबसे मुश्किल होता है। अमिताभ और सनी भी इसका अपवाद नहीं है।