Friday, November 3, 2023

विश्वकप 2023 से फिल्मी सितारों की गैरमौजूदगी क्यों ?


जिस दिन देश और दुनिया की तरफ से हिंदी सिनेमा के किंग खान शाहरुख खान को हैप्पी बर्थ डे कहा जा रहा था, उसी दिन मुंबई में एक और इतिहास रचा जा रहा था, जब वानखेड़े की पिच पर भारतीय टीम ने श्रीलंकाई टीम की लंका लगा दी और सेमीफाइनल के लिए सीट पक्की कर ली। हर किसी की दुआ है कि हमारी टीम अपने विजयी अभियान को जारी रखे और 19 नवंबर को अहमदाबाद के फाइनल में ट्राफी जीते। 

श्रीलंका के खिलाफ हुए मैच में वानखेड़े स्टेडियम में भारतीय टीम को चीयर्स करने के लिए ब्लू जर्सियां पहने लोगों का हुजूम था, जिसे देखकर कतई हैरानी नहीं हुई। कुछ लोगों को 2011 की याद आ गई, जब वानखेड़े की इसी पिच पर भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल हो रहा था और नीली जर्सियों और तिरंगे झंडो के साथ आडिएंस स्टैंड खचाखच थे। वानखेड़े के वीआईपी गैलरी में आमिर खान, सुनील शेट्टी सहित तमाम सितारे मौजूद थे। 

क्या फिल्मी सितारों की मौजूदगी से भारतीय टीम के प्रदर्शन पर क्या कोई असर पड़ता है, तो जवाब होगा कि बिल्कुल नहीं। मगर ये सवाल बनता है कि 2023 के वर्ल्ड कप से हिंदी फिल्मों के सितारों की गैरमौजूदगी की क्या वजह हो सकती है। इस बात को कुछ यूं भी कहा जा सकता है कि इस विश्वकप में जगमगाहट उस तरह की नहीं है, जैसी विश्व कप जैसे आयोजन से की जाती है। विश्वकप के उदघाटन से लेकर अब तक खास तौर पर उन मैचों में तो दर्शक कम आ रहे हैं, जिनमें भारत का मैच नहीं होता है। यहां एक बार फिर 2011 के विश्वकप के आयोजन की याद ताजा हो जाती है, जिसमें हिंदी फिल्मों के सितारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। याद करें, साउथ से रजनीकांत और चिरंजीवी से लेकर मुंबई की फिल्मी दुनिया से अमिताभ बच्चन और दूसरे दिग्गज सितारों ने स्टेडियम में जाकर मैचों को देखा। जाहिर है कि मैच के आयोजनों ने उनको स्टेडियम में आने की दावत दी, जिसे मान लिया गया। 

इस बार के विश्वकप के मैचों में ऐसा कुछ नजर नहीं आया। यहां तक कि मुंबई के मैचों से भी फिल्मी सितारे दूर रहे। जाहिर है कि मैच का आयोजन करने वाले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और तमाम क्रिकेट एसोसिएशनों ने फिल्मी सितारों को विश्व कप से जोड़ने की कोई खास कोशिश नहीं की। यहां दो बातों को सामने रखना जरुरी है। विश्वकप से पहले प्रमोशन के लिए बनाए गए एंथम गीत में रणवीर सिंह नजर आए, लेकिन इसे प्रमोट के लिए रणवीर ने कुछ नहीं किया और पब्लिक ने भी इस कचरे को पसंद नहीं किया।

इस एंथम गीत के अलावा ये भी याद किया जाएगा कि अहमदाबाद में भारत और पाकिस्तान के मैच के लिए अर्जित सिंह सहित कई सिंगरों को परफारमेंस के लिए बुलाया गया। इस मैच से पहले कहा जा रहा था कि अमिताभ बच्चन, रजनीकांत जैसे सितारे इस मैच को देखने पंहुचेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बच्चन अहमदाबाद नहीं गए, लेकिन बुलाया जाता, तो वे वानखेड़े तक तो पंहुच ही सकते थे। 

एक बार फिर 2011 की याद करते हुए 2023 के विश्वकप की बात करें, तो 2011 में कई बड़ी फिल्मों के प्रमोशन को विश्वकप से जोड़ा गया और बड़ी फिल्मों के सितारे अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए स्टेडियम पंहुचे थे। इस बार विश्वकप के दौरान ही शाहरुख खान की डंकी और सलमान खान की टाइगर 3 सहित तमाम बड़ी फिल्मों के प्रमोशन शुरु हुए। सलमान खान एक मैच के लिए पवेलियन में नजर आए, लेकिन दर्शकों के बीच न तो वो पंहुचे, न ही कोई और सितारा पंहुचा।  

ये मामला इसलिए अहम हो जाता है कि आईपीएल के आयोजन ने क्रिकेट और सिनेमाई मनोरंजन को एक ऐसे प्लेटफार्म पर ला खड़ा किया था, जिसमें दोनों साइडस को फायदा हो रहा था। 

शाहरुख खान, शिल्पा शेट्टी, प्रीति जिंटा जैसे सितारे आईपीएल की टीमों के मालिक बने और इनके साथ फिल्मों के प्रमोशन का एक नया सिलसिला शुरु हो गया था। फिल्मों के प्रमोशन के अलावा आईपीएल की सभी टीमें फिल्मों  के सितारों को ब्रैंड अंबेसडर के तौर पर अपने साथ जोड़ते थे। कुछ मिलाकर क्रिकेटमेंट क्रिएट करने में क्रिकेट और फिल्मों की दुनिया ने मिलकर एक जादू चलाया था। 

जरा इतिहास के उन पन्नों को याद कीजिए, जब 2003 के विश्वकप में  टीवी की एंकर के तौर पर मंदिरा बेदी के लिए पब्लिक क्रेजी हो गई थी। 1999 के विश्वकप में एप्पल सिंह के अवतार में संजय मिश्रा के अंदाज ने जमकर तारीफ बंटोरी थी। ये वो दौर था, जब विश्वकप के प्रमोशन के लिए आईसीसी से लेकर मेजबान क्रिकेट बोर्ड और विश्वकप के मैचों के प्रसारण के अधिकार लेने वाले चैनल भी प्रमोशन के लिए बड़े स्तर पर प्लानिंग करते थे और फिल्मी सितारे इस प्लानिंग की हिस्सा हुआ करते थे। जिस देश में आम जनता या तो क्रिकेट के लिए दीवानी होती है या फिर फिल्मों के लिए दीवानी होती है और जब कभी मनोरंजन से भरपूर इन दोनों दुनियाओं के बीच एक प्लेटफार्म बनता है, तो पब्लिक के लिए सिंगल दाम में डबल मजा आ जाता है। आईपीएल की कामयाबी में इस कांबिनेशन का सबसे बड़ा कमाल रहा है। 
2023 का विश्वकप अपने अंतिम दौर में आ चुका है। उम्मीद के नाम पर कहा जा सकता है कि शायद 19 नवंबर के फाइनल में अहमदाबाद में तमाम लोगों के अलावा फिल्मी सितारों का भी जमावाड़ा हो। फिलहाल ये बात उम्मीद से ज्यादा नहीं है। 

जो इस बात को राजनैतिक चश्मे से देखना चाहें, उनके लिए ये बात बहुत बड़ी होगी कि 2011 का आयोजन हुआ था, तो केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन वाली सरकार थी। याद आता है कि 2011 के लिए मोहाली में हुए सेमी फाइनल में भारत-पाकिस्तान का मैच देखने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को इंवाइट किया गया था और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने मिलकर मैच देखा था। 
2023 के विश्वकप के समय केंद्र में भाजपा की सरकार है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की कमान अमित शाह के बेटे जय शाह के हाथों में है। इसके अलावा तो इन दोनों आयोजनों में कोई और राजनैतिक कनेक्शन नहीं दिखता, लेकिन ये भी तो कम बड़ी बात नहीं है। हां, इस बात से हर कोई सहमत होगा कि अगर 2023 के विश्वकप के मैचों के लिए अगर फिल्मी सितारों को जोड़ने की बात सोची जाती, तो इस सरकार के पास अक्षय कुमार, अनुपम खेर, कंगना सहित सितारों की बड़ी टोली है, जो दिल्ली दरबार के इशारे पर स्टूडियो छोड़कर स्टेडियम में नाचने-गाने से भी मना नहीं करते और जो मना करते, उनको लाने के तरीके भी किसी से छुपे नहीं हैं। 

ऐसे में, जबकि भारतीय क्रिकेट टीम इस विश्वकप में धमाल कर रही है, तो कहा जा सकता है कि फिल्मी दुनिया का इंवाल्वमेंट एंज्वायमेंट के स्तर को नया मकाम दे सकता था। फिलहाल हर किसी को 19 नवंबर का इंतजार है, जब अहमदाबाद में हमारी टीम एक बार फिर चैंपियन बनेगी, जरुर बनेगी। 

इस ब्लाग के पिछले कुछ लेखों के लिंक 

संजय दत्त- लिओ और केजीएफ होने का फर्क








No comments:

कंगना मतलब...

हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रही स्वंयभू महाज्ञानी कंगना के ताजा बयान पर अमिताभ बच्चन को ये तय करना है कि वे इस पर अपना ...