इन दिनों देश राममय हो चुका है। 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन होने तक इस राममय माहौल में कितने और रंग देखने को मिलेंगे, ये देखने वाली बात होगी। सोशल मीडिया पर किसी ने सही कहा कि ऐसा लगता है कि अब से पहले कोई इस देश में राम को जानता ही नहीं था। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि रामनवमी का त्योहार 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद ही अस्तित्व में आया होगा। खैर, इस वक्त मुद्दा ये नहीं है।
मुद्दा ये है कि जब देश भर में राम नाम की लहर चल रही हो, तो इससे हिंदी फिल्मों की दुनिया अछूती रहे, ये तो मुमकिन नहीं है। मुंबई की मनोरंजन की दुनिया भी तो आखिरकार इसी देश का हिस्सा है, जहां 2014 के बाद सबका साथ सबका विकास के नाम पर सत्ता का साथ या सत्ता का विरोध का कटु सत्य स्थापित होता चला गया और हिंदी फिल्मों की दुनिया में भी ये बंटवारा जमकर हुआ, जिसके बारे में कोई अनजान नहीं है। खैर, इस वक्त मुद्दा ये भी नहीं है।
मुद्दा ये है कि देश भर में कुल मिलाकर बहस इस एक वाक्यांश में सिमट गई है कि किसे अयोध्या आने का न्यौता मिला और किसे नहीं मिला। जिसे मिला, वो सोशल मीडिया पर इतरा रहा है कि हमको रामजी ने बुलाया है और जिसे नहीं मिला, वो बतिया रहा है कि रामजी कण-कण में समाए हुए हैं। एक इंवाइट से क्या बनेगा और बिगड़ेगा जी। खैर, इस वक्त ये भी मुद्दा नहीं है।
मुद्दा ये है कि रामजी के नाम की इस बारात में मनोरंजन की दुनिया से कौन कौन बराती बनने जा रहा है। किसे बुलावा आया है, कौन टुकुर टुकुर बुलावे के लिए दर निहार रहा है और कौन है, जिसको अच्छी तरह मालूम है कि उनको नहीं मिलने वाला।

पहिला लिस्ट उनका, जिनको बराती बनाकर न्यौता गया है। इस लिस्ट में सिनेमा के चमत्कार रजनीकांत का नाम पहले पायदान पर है। वे गाहे-बगाहे मोदी सेना के सिपहसालार बन चुके हैं। अमिताभ बच्चन का नाम किसी को नहीं चौंकाता। मोदी के मुख्यमंत्री काल में गुजरात या कहें कि मोदी की सेवा में समर्पित हो चुके बच्चन दी ग्रेट ने उनको मौन समर्थन देने का कोई मौका नहीं छोड़ा। अभी सस्पेंस इस बात का है कि न्यौता सिर्फ बड़े बच्चन को मिला है या इसमें समूचे बच्चन परिवार को जोड़ा गया है। मसलन, समाजवादी पार्टी की नेत्री जया बच्चन को बुलाया है क्या, बड़े के साथ बाई वन गेट वन में छोटे बच्चन (अभिषेक), उनकी पत्नी ऐश्वर्या, उनकी बेटी अराध्या, उनके चाचा अजिताभ, अजिताभ की पत्नी रमोला बच्चन, रमोला-अजिताभ की बेटी नैना बच्चन, नैना बच्चन के पति कुणाल कपूर (रंग दे बसंती फेम) और नैना-कुणाल का बेटा। फिलहाल मान लो कि सिर्फ बड़े बच्चन को ही सत्ता की वफादारी का इनाम मिला है।

लिस्ट में अगला नाम वही खिलाड़ी हैं, जो आम काटकर खाने या चूसकर खाने को पत्रकारिता का सवाल समझकर पत्रकार बने थे। उनको 2014 के बाद सत्ता की चाकरी करने और मोदी की जयजयकार करने वाली फिल्मों का पैकेज बनाने की बहादुरी के लिए ये इनाम मिलना तय था। इसी लाइन में लगी मोदी को इस युग का अवतार बताने वाली वन एन ओनली कंगना का नाम भी आना था। पत्नी किरण खेर के बाद राज्यसभा की सीट की बाट जोह रहे अनुपम खेर को भी अयोध्या पंहुचकर जयश्री राम करना ही था। गदर मचाने वाले सनी देओल को भी बुलावा आ गया। मधुर भंडारकर अब फिर से कह सकते हैं कि उनकी पीएमओ तक पंहुच है, क्योंकि उनको अयोध्या का टिकट मिल गया है। सावरकर पर फिल्म बना रहे नएनवेले दुल्हे रणदीप हुड्डा के नाम ने नहीं चौंकाया, लेकिन रणबीर कपूर (साथ में आलिया भट्ट) और आयुष्मान खुराना और जैकी श्राफ को खुद भी चौंकना पड़ा होगा कि अरे हम कैसे. इसी तरह माधुरी का नाम भी नहीं चौंकाता, क्योंकि वे सत्ता को सुखी रखने को जरुरी मानती हैं। मामला राम-सीता का है, चुनांचे 80 के दशक में रामानंद सागर की रामायण में राम-सीता के किरदार में आम जनता का आदर-सम्मान पा चुके अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया को बुलाना बनता था। अगर उनकी रामायण के रावण अरविंद त्रिवेदी भी राम नाम के लिए अयोध्या जाने वालों की लिस्ट में जरुर होते। साउथ से रजनीकांत के अलावा बाहुबली फेम प्रभास, केजीएफ वाले यश और रजनीकांत के एक्स जवांई राजा धनुष के अलावा चिरंजीवी, कांटारा वाले ऋषभ शेट्टी को भी अयोध्या बुलाया गया है।सरसरी निगाह में फिल्मों की दुनिया से बनी मेहमानों की लिस्ट में तकरीबन बीस नाम शुमार हैं। इस लिस्ट में नामांकित सितारों में से ज्यादातर को उनकी वफादारी का इनाम मिल गया, लेकिन बात यहीं पूरी नहीं होती।

फिल्मों की दुनिया में एक लिस्ट उन लोगों की भी है, जिनकी भक्तिवाला इतिहास देखकर लग रहा था कि उनको जयश्री राम करने का मौका मिलेगा ही मिलेगा, लेकिन पता नहीं उनकी भक्ति में कहां कैसी कमी रह गई होगी। इस लिस्ट में पहला नाम अजय देवगन का रहा, जिन्होंने धर्मपत्नी काजोल के साथ मोदी भक्तों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया था। परेश रावल, मनोज जोशी, कपिल शर्मा, कैलाश खेर, अशोक पंडित, पहलाज निहलानी, सेंसर बोर्ड चीफ प्रसून जोशी, फिल्मी परदे पर नरेंद्र मोदी बनकर धन्य हुए विवेक ओबेराय और उनके पिताश्री सुरेश ओबेराय, नाना पाटेकर, महेश मांजरेकर, एकता कपूर (जिनकी खास सहेली का सेत्ता में दबदबा है), अनु कपूर को सब्र और इंतजार करने के अलावा रास्ता नहीं है। रामायण के राम-सीता को बुला लिया, लेकिन मोदीभक्ति में सराबोर बीआर चोपड़ा की महाभारत के द्रोणाचार्य मुकेश खन्ना, द्रौपदी रुपा गांगुली और युधिष्ठर गजेंद्र सिंह चौहान (जिनको पुणे इंस्टिट्यूट का चेयरमैन बनाने पर बवाल कटा था) को इग्नोर मार दिया गया। हमेशा पाल्टिकल करैक्ट रहने वाले रितेश देशमुख को न्यौता मिलता, तो उनका चार्टेड जहाज अयोध्या के नए एयरपोर्ट पर जरुर मिलता।
 |
| अजय देवगन, प्रियंका चोपड़ा, मनोज कुमार, करण जौहर, एकता कपूर, परेश रावल, कपिल शर्मा, विवेक ओबेराय, कैलाश खेर, प्रसून जोशी, मनोज जोशी, मिठुन चक्रवर्ती, मुकेश खन्ना, असित मोदी, जेडी मजिठिया, गजेंद्र चौहान, अशोक पंडित और पायल रोहातगी |
करण जौहर से कहा जाता, तो वो अपने साथ जहान्वी कपूर से लेकर अनन्या पांडे, क्यारा आडवाणी, यामी गौतम, तारा सुतारिया, वाणी कपूर और कृति सेनन जैसी सुंदरियों का लश्कर लेकर पधारते। इस लिस्ट में दो गुजराती नामों का जिक्र जरुरी है, जो केम छो मोदी के नाम रटकर नहीं थके। एक थे खिचड़ी वाले जेडी मजीठिया और दूसरे उल्टा चश्मा वाले असित मोदी। दोनों का ही पत्ता साफ हो गया। मथुरा की सांसद (हेमा मालिनी) हो सकता है कि पाल्टिकल कोटे से कुछ जुगाड़ कर लें, लेकिन गुजरात जाकर मोदी के साथ पतंगबाजी करने वाले सलमान खान को भी नहीं बुलाया गया। भाजपा के लिए अपनी इज्जत गंवाने वाले मिठुन चक्रवर्ती को भी टाटा कर दिया गया। मिठुन की तरह चुनावी मौसम में भाजपा का छाता ओड़ने वाले साउथ के सुदीप को भी नो बोल दिया गया। एक और बात कहें, गले में भाजपा का पट्टा पहनने वाले भारत कुमार, उर्फ मनोज कुमार को फिल्म इंडस्ट्री का आडवाणी समझकर छोड़ दिया गया होगा।

अब राम राम (जाने) से पहले एक और लिस्ट ऐसी, जिसमें ऐसे भयंकर नाम थे कि इनको तो अयोध्या पंहुचने पर बैरंग लौटा दिया जाता। इस लिस्ट पर भी गौर करें। कभी भाजपा के केंद्र रहे शत्रुघ्न सिन्हा के अलावा, स्वरा भास्कर, अनुभव सिन्हा, सुशांत सिंह, मोहम्मद जीशान अय्युब, अनुराग कश्यप, अश्विनी चौधरी, शबाना आजमी और जावेद अख्तर के साथ साउथ से कमल हासन, प्रकाश राज को न बुलाना था, न बुलाया जाएगा और आइंदा भी नही बुलाया जाएगा।
भारत की फिल्मी नगरी में करोड़ों वासी हैं। इनमें से सबको बुलाना और न बुलाना दोनों ही मुमकिन नहीं था। मुमकिन ये था कि दिल्ली की सत्ता अपने वफादारों को राममय करती, सो ये किया गया। जिनको ये सम्मान नहीं मिला, उनके कारणों के लिए कोई जांच आयोग तो नहीं बैठेगा और आखिरी वाली लिस्ट में शामिल हस्तियों के लिए न बुलाया जाना ही सम्मान से कम नहीं होगा।
इससे आगे कुछ लिखना बाकी रह गया क्या ? मंदिर को जाने वालों से प्रार्थना कि देश की भलाई के लिए प्रार्थना करें और 22 जनवरी को म्हारी तरफ से सभी को-
जय राम जी की
जय सीता मैया
जय हनुमान जी
कमेंट बाक्स में तनिक बताइए कि राम लला के दर्शन के लिए क्या कीजिएगा, कब जाइएगा ??
ब्लाग के ये लिंक भी देखिए-
ये कैसी नानागिरी ?
2023-2024 : घूमता आईना
मामला रश्मिका का नहीं, लड़कियों की इज्जत का है