ये तो खबर थी कि शिल्पा शेट्टी ने एक कंपनी खोली और इस कंपनी के मार्फत टेली मार्केटिंग के लिेए एक चैनल खोला और बुरी खबर ये है कि उनके इस चैनल और कंपनी को ताला लगने की नौबत आ गई। इससे भी ज्यादा बुरी खबर ये है कि अपनी कंपनी और कंपनी के कर्मचारियों की बदहाली के अनजान शिल्पा ने पिछले दिनों फिटनेस को लेकर एक नया आनलाइन प्रोजेक्ट लांच किया और बदहाली की शिकार कंपनी को लेकर मीडिया के सवालों से कन्नी काटते हुए वे वहां से बच निकली। कमाल की बात है न, दुनिया जहान को सेहत अच्छी रहने रखने की नसीहत देने वाली शेट्टी को इस बात पर कोई संकोच नहीं कि उनकी टेली मार्केटिंग कंपनी की हालत खराब है और वहां काम करने वाले कर्मचारियों का भविष्य चौपट है
शिल्पा शेट्टी की कंपनी की हालत इतनी दयनीय है कि पिछले तीन महीनों से वहां काम करने वालों को वेतन नहीं मिला है। कंपनी का संचालन लगभग ठप्प हो चुका है। तालाबंदी की नौबत आ चुकी है। कंपनी के सीईओ के तौर पर काम करने वाले शिल्पा शेट्टी के पतिदेव राज कुंदर दिसंबर में ही इस नौकरी से इस्तीफा लिख चुके हैं। इस्तीफा लिखते वक्त उन्होंने नोटबंदी के सरकारी फैसले को कोसा और माना कि नोटबंदी से कंपनी प्रभावित हुई। दिलचस्प बात ये भी है कि नवंबर में जब केंद्र की सरकार ने नोटबंदी का फैसला किया था, तो इसे क्रांतिकारी बताने वालों में शिल्पा शेट्टी सबसे आगे रही थीं।
नोटबंदी के फैसले से बेरोजगारी के मामले बढ़े। तमाम कंपनियों को ताले लगे। फिल्मी कारोबार भी प्रभावित हुआ। इसे लेकर बहस जारी है और जारी रहेगी। हो सकता है कि शिल्पा की कंपनी भी नोटबंदी की शिकार हुई हो, मगर यहां मुद्दा ये बचता है कि नोटबंदी से सिर्फ उनकी कंपनी प्रभावित हुई या उनकी जिंदगी पर भी कोई असर हुआ। जिंदगी पर तो कोई असर महसूस नहीं होता। फिटनेस का नया प्रोजेक्ट उन्होंने पांच सितारा होटल में किया। करोड़ों के घर में वे रहती हैं, जो किसी महल से कम नहीं है। वे और उनके श्रीमान लंदन से लेकर मुंबई तक न जाने कितने बिजनेस चलाते हैं। यहां इस बात को याद करना कोई अच्छी बात नहीं होगी कि कैसे शिल्पा शेट्टी के पति पर आईपीएल में सट्टेबाजी के घिनौने आरोप लगे और उनकी राजस्थान की टीम को ब्लाक किया गया। इसके बाद अगर उनकी कंपनी पर तालाबंदी की नौबत आई और कर्मचारियों को तीन महीनों से सैलेरी नहीं मिलती, तो क्या इसके लिए शिल्पा शेट्टी और उनके पति सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है। इस पर भी अगर उनकी आलीशान जिंदगी पर कोई असर न हो, तो ये स्थिति बुरी नहीं, शर्मनाक है।
ये शिल्पा शेट्टी जैसे सितारों की दोहरी और कहा जाए तो दोगुली जिंदगी की एक झलक भर है, जो एक तरफ बालीवुड की जगमगाती दुनिया में करोड़ों का व्यारा-न्यारा करते हैं, लेकिन अपनी कंपनी के कर्मचारियों को उनकी पगार देने के लिए उनके पास पैसे नहीं। क्या ये इंसानियत से नीचे गिरी हुई बात नहीं है।
शिल्पा शेट्टी ने बरसों फिल्मी दुनिया में काम किया। करोड़ों रु. की कमाई की। शादी के बाद उनका फिल्मी कैरिअर तो ठप्प हो गया, लेकिन टीवी शोज में जज बनकर वे अच्छी खासी कमाई कर रही हैं। आईपीएल में सट्टेबाजी करने वाले उनके पतिदेव करोड़ों के कारोबार चला रहे हैं। कहा नहीं जा सकता कि शिल्पा शेट्टी को कभी उन कर्मचारियों के परिवारों की सुध होगी, जिनके यहां आज भुखमरी जैसी नौबत आ चुकी है। शिल्पा खुद परिवार वाली हैं। उनका बेटा है। क्या एक महिला होने के नाते, परिवार होने के नाते उनको अपनी कंपनी के कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील नहीं होना चाहिए था। नौकरी आगे नहीं बढ़ा सकते, लेकिन उनके बकाया का तुरंत भुगतान करके उनको थोड़ी राहत मिल सकती है।
एक वक्त हुआ करता था, जब फिल्मों के सितारे आम लोगों के लिए आदर्श हुआ करते थे। आम लोग उनकी जिंदगी को अनुकरणीय मानते थे। इसके चलते उनको सम्मान भी किया करते थे। आज की स्थिति देखी जाए, तो शिल्पा शेट्टी का वाक्या इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि अपने सार्वजनिक जीवन में उनके जैसे सितारों की नैतिकता का कितना पतन हो चुका है।
जहां तक रही कानून की बात, मालूम नहीं कि वहां क्या स्थिति है। मीडिया की जहां तक बात है, तो स्टारडम के शिकार मीडिया को इसके लिए फुर्सत नहीं होगी। शिल्पा शेट्टी इंसानियत की बात सोचेंगी, ये दूर की कौड़ी ही लगती है। ऐसे में शिल्पा शेट्टी की कंपनी के उन कर्मचारियों का भविष्य क्या होगा, ये गंभीर सवाल है, जो एक बहुत बड़ी, अमीर एक्ट्रेस की गरीब और शर्मनाक सोच के शिकार हो गए हैं। शर्मिंदगी शिल्पा को नहीं होगी, लेकिन हमें जरुर है।
शिल्पा शेट्टी की कंपनी की हालत इतनी दयनीय है कि पिछले तीन महीनों से वहां काम करने वालों को वेतन नहीं मिला है। कंपनी का संचालन लगभग ठप्प हो चुका है। तालाबंदी की नौबत आ चुकी है। कंपनी के सीईओ के तौर पर काम करने वाले शिल्पा शेट्टी के पतिदेव राज कुंदर दिसंबर में ही इस नौकरी से इस्तीफा लिख चुके हैं। इस्तीफा लिखते वक्त उन्होंने नोटबंदी के सरकारी फैसले को कोसा और माना कि नोटबंदी से कंपनी प्रभावित हुई। दिलचस्प बात ये भी है कि नवंबर में जब केंद्र की सरकार ने नोटबंदी का फैसला किया था, तो इसे क्रांतिकारी बताने वालों में शिल्पा शेट्टी सबसे आगे रही थीं।
नोटबंदी के फैसले से बेरोजगारी के मामले बढ़े। तमाम कंपनियों को ताले लगे। फिल्मी कारोबार भी प्रभावित हुआ। इसे लेकर बहस जारी है और जारी रहेगी। हो सकता है कि शिल्पा की कंपनी भी नोटबंदी की शिकार हुई हो, मगर यहां मुद्दा ये बचता है कि नोटबंदी से सिर्फ उनकी कंपनी प्रभावित हुई या उनकी जिंदगी पर भी कोई असर हुआ। जिंदगी पर तो कोई असर महसूस नहीं होता। फिटनेस का नया प्रोजेक्ट उन्होंने पांच सितारा होटल में किया। करोड़ों के घर में वे रहती हैं, जो किसी महल से कम नहीं है। वे और उनके श्रीमान लंदन से लेकर मुंबई तक न जाने कितने बिजनेस चलाते हैं। यहां इस बात को याद करना कोई अच्छी बात नहीं होगी कि कैसे शिल्पा शेट्टी के पति पर आईपीएल में सट्टेबाजी के घिनौने आरोप लगे और उनकी राजस्थान की टीम को ब्लाक किया गया। इसके बाद अगर उनकी कंपनी पर तालाबंदी की नौबत आई और कर्मचारियों को तीन महीनों से सैलेरी नहीं मिलती, तो क्या इसके लिए शिल्पा शेट्टी और उनके पति सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है। इस पर भी अगर उनकी आलीशान जिंदगी पर कोई असर न हो, तो ये स्थिति बुरी नहीं, शर्मनाक है।
ये शिल्पा शेट्टी जैसे सितारों की दोहरी और कहा जाए तो दोगुली जिंदगी की एक झलक भर है, जो एक तरफ बालीवुड की जगमगाती दुनिया में करोड़ों का व्यारा-न्यारा करते हैं, लेकिन अपनी कंपनी के कर्मचारियों को उनकी पगार देने के लिए उनके पास पैसे नहीं। क्या ये इंसानियत से नीचे गिरी हुई बात नहीं है।
शिल्पा शेट्टी ने बरसों फिल्मी दुनिया में काम किया। करोड़ों रु. की कमाई की। शादी के बाद उनका फिल्मी कैरिअर तो ठप्प हो गया, लेकिन टीवी शोज में जज बनकर वे अच्छी खासी कमाई कर रही हैं। आईपीएल में सट्टेबाजी करने वाले उनके पतिदेव करोड़ों के कारोबार चला रहे हैं। कहा नहीं जा सकता कि शिल्पा शेट्टी को कभी उन कर्मचारियों के परिवारों की सुध होगी, जिनके यहां आज भुखमरी जैसी नौबत आ चुकी है। शिल्पा खुद परिवार वाली हैं। उनका बेटा है। क्या एक महिला होने के नाते, परिवार होने के नाते उनको अपनी कंपनी के कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील नहीं होना चाहिए था। नौकरी आगे नहीं बढ़ा सकते, लेकिन उनके बकाया का तुरंत भुगतान करके उनको थोड़ी राहत मिल सकती है।
एक वक्त हुआ करता था, जब फिल्मों के सितारे आम लोगों के लिए आदर्श हुआ करते थे। आम लोग उनकी जिंदगी को अनुकरणीय मानते थे। इसके चलते उनको सम्मान भी किया करते थे। आज की स्थिति देखी जाए, तो शिल्पा शेट्टी का वाक्या इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि अपने सार्वजनिक जीवन में उनके जैसे सितारों की नैतिकता का कितना पतन हो चुका है।
जहां तक रही कानून की बात, मालूम नहीं कि वहां क्या स्थिति है। मीडिया की जहां तक बात है, तो स्टारडम के शिकार मीडिया को इसके लिए फुर्सत नहीं होगी। शिल्पा शेट्टी इंसानियत की बात सोचेंगी, ये दूर की कौड़ी ही लगती है। ऐसे में शिल्पा शेट्टी की कंपनी के उन कर्मचारियों का भविष्य क्या होगा, ये गंभीर सवाल है, जो एक बहुत बड़ी, अमीर एक्ट्रेस की गरीब और शर्मनाक सोच के शिकार हो गए हैं। शर्मिंदगी शिल्पा को नहीं होगी, लेकिन हमें जरुर है।







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