Saturday, February 3, 2024

पूनम पांडे- मौत के नाम का तमाशा

स्वनाम धन्य पूनम पांडे को लेकर शुक्रवार को उनकी सर्वाईकल कैंसर से मौत की न्यूज ब्रेक हुई। कुछ लोग इस खबर पर दुखी हुए, तो कुछ लोगों को शंका हुई थी कि कुछ गड़बड़ है, क्योंकि खबर में झोलमझोल था कि दो दिन पहले तक सामान्य रुप से वीडियो की शूटिंग में मस्त दिख रही लड़की की सर्वाईकल कैंसर से मौत कैसे हो सकती है। कुछ लोगों ने अंदाज लगा लिया था कि पूनम पांडे कुछ दिनों पहले सर्वाईकल कैंसर को लेकर किसी अभियान की बातें कर रही थीं और अब इसी से उनकी मौत की खबर आ गई। लब्बोलुआब ये कि जितने लोग उनकी मौत पर आरआईपी के संदेश दे रहे थे, तो उससे ज्यादा लोग इस पूरे मामले में कुछ तो लोचा है दया वाली बातें कर रहे थे। 24 घंटे भी नहीं बीते कि ये लोचा हकीकत में सामने आ गया कि पूनम पांडे जिंदा हैं और उन्होंने ये स्टंट सर्वाइकल कैंसर को लेकर अभियान के लिए किया था। 

यहां ये जानना बहुत जरुरी नहीं हो जाता कि पूनम पांडे कौन हैं, जिनको दिलचस्पी हो, उनके लिए जवाब है कि एक ऐसी अदाकारा, जिनको फिल्मों में कभी कोई कामयाबी नहीं मिली, तो उन्होंने सेमी न्यूड वीडियोज बनाकर इंटरनेट पर मौजूदगी दर्ज करा ली। ये हर कोई जानता है कि पूनम पांडे जैसी सुंदरियों के ऐसे वीडियोज को लाइक शेयर करने वालों की तादाद कितनी ज्यादा है। इस लिहाज से उनको इंटरनेट संसेशनल कहा जाने लगा, जिसका मतलब हुआ कि वे इंटरनेट को अपनी अदाओं से हिला सकती हैं। चलिए इस बात को यहीं रोकते हैं। 

बात करते हैं कि क्या पूनम पांडे ने ऐसा कुछ किया है, जिस पर ताज्जुब होना चाहिए। मार्केटिंग और पब्लिसिटी के लिए किसी भा हद तक जाने के नशे में जीने वाले ऐसे सूरमाओं की भरमार है। मनोरंजन की दुनिया में भी ऐसी प्रतिभाओं की लंबी लाइन है। फौरन याद आता है वो किस्सा, जब 1995 में महेश भट्ट की फिल्म क्रिमिनल की रिलीज से ठीक पहले मुंबई के एक टैब्लाइड न्यूजपेपर में पहले पेज की फ्रंट लीड स्टोरी में फिल्म की हीरोइन मनीषा कोईराला की हत्या की न्यूज ब्रेक की गई थी। जब इस पर बवाल हुआ तो महेश भट्ट की तरफ से कहा गया कि ये फिल्म के प्रमोशन का हिस्सा था। एक यही किस्सा फिल्मवालों की मार्केटिंग के टेलेंट का गवाह नहीं है। 

फिल्म या किसी टीवी शो के टेलीकास्ट होने से ठीक पहले कभी किसी जोड़ी में तलाक की खबर आ जाए, तो कहीं किसी को कैमरे के सामने थप्पड़ मारने की बात हो जाए, तो उसकी असलियत यही सामने आती है कि ये सब प्रमोशन के लिए किया गया था। एक एक्टर हैं विद्युत जमाल, जो एक जमाने में टीवी स्टार मोना सिंह के ब्वायफ्रेंड हुआ करते थे। उनकी पहली फिल्म रिलीज होनी थी, तो उसके चंद दिनों पहले एक एमएमएस वायरल हुआ, जिसमें मोना और विद्युत साथ थे। इस पर जमाल के रिएक्शन के लिए मीडिया को बुलाया गया और जमाल ने सारा फोकस ये बताने में लगा दिया कि फिल्म में उन्होंने क्या कमाल किया है। बात खत्म। ये अलग बात है कि कुछ दिनों में ही दोनों के बीच ब्रेक-अप हो गया।

एक और टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर के शौहर ने एक टीवी शो जीतने के लिए अपनी बीवी से रिश्तों में टेंशन की कहानियां मीडिया में सर्कुलेट करा दी। बिग बास जीतने की ललक में दोनों ने इस शो में कुत्ते बिल्ली की तरह जिस तरह से अपने रिश्तों के चिथड़े उड़ाए, उनको कौन भूल सकता है। ये अलग बात है कि अब दोनों के रास्ते अलग अलग हो चुके हैं और दोनों ने अपने लिए नए नए जीवनसाथी चुन लिए हैं। भगवान इनका भला करे। फिल्मों के एक पीआरओ  का किस्सा भी याद आता है। फिल्मों और फिल्मी सितारों का प्रचार करने के काम से लगभग रिटायर हो चुके इन महाशय ने एक दिन खुद की मौत की खबर ब्रेक करा दी और फिर खींसे नपोरते हुए बता दिया कि वो जिंदा हैं। वे अब सचमुच में दिवंगत हो चुके हैं। 

पूनम पांडे के इसी मामले को लेकर सत्ता की दलाल बन चुके मीडिया का एक गलीच चेहरा भी बेपर्दा होता है। हर खबर की पड़ताल करने का दावा करने वाले मीडिया के धुरंधर चैनलों ने बगैर सच्चाई जाने पूनम पांडे की मौत की खबर को वायरल करने में देर नहीं लगाई, क्योंकि सबको इस  बात की टेंशन थी कि इस खबर को लेकर किसी और चैनल को उससे ज्यादा टीआरपी और व्यूज न मिल जाएं। कुल मिलाकर इस देश की बदनसीबी बन चुके मीडिया का एकमेव लक्ष्य टीआरपी और व्यूज का गेम है, जिसके लिए ये मीडिया किसी भी हद तक जा सकता है और इस गेम में ए टू जेड सारे मीडिया वाले शामिल हैं। 

पूनम पांडे से लेकर राखी सावंत, शर्लिन चोपड़ा, उर्वी जावेद, पायल रहतोगी और उनके जैसों का ये कुनबा और उसके साथ नंगई पर उतारु मीडिया की ये जुलगबंदी सिर्फ ये साबित करती है कि बाजारवाद और उपभोक्तवाद के जंगल में इंसानी रुप में भटकने वाले जानवरों को देखना हो, तो पूनम पांडे से लेकर इंडिया टुडे तक हर ब्रांड मौजूद है। रही देश की बात, उसे गर्त में जाने दीजिए, टेंशन की कोई जरुरत नहीं। 

इंतजार कीजिए कि पूनम पांडे जैसा अगला नजारा किसका और कब होगा और कब मीडिया के गिद्ध मंडराते नजर आएंगे वैसे, आप पूनम पांडे और मीडिया में किसे ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं, जवाब के लिए कमेंट बाक्स ओपन है। 

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