अंबानी पुत्र अनंत संग राधिका की शादी का मामला अगर पूरी दुनिया में फैल गया, तो हैरानी कैसी। दुनिया के सबसे पंहुचे हुए धन्ना सेठों में से एक मुकेश भाई के बालक की शादी में ऐसी धूम नहीं मचेगी, तो कहां मचेगी। ख्याल रखा जाए कि अभी ब्याह वाली बात नहीं है। अंग्रेजी रिवायत में इसे प्री वैडिंग इवेंट कहते हैं। बात आगे बढ़ाते हैं..
शादी का मामला, यानी हलद बांध से लेकर मंडा, घुड़चढ़ी, महिला संगीत से लेकर सात फेरे और जयमाला वाले सारे शगुन अभी नहीं, जुलाई की बारह तारीख को संपन्न होंगे। प्री इवेंट में जामनगर के छोटे से हवाई अड्डे को इंटरनेश्नल एयरपोर्ट का दर्जा मिल गया। सोचिए, बारह जुलाई वाले प्रोग्राम में क्या क्या अजूबे होंगे। सोचने बैठ जाइए। बात और आगे बढ़ाते हैं..
अंबानी पुत्र के लिए जामनगर वाले इवेंट में फिल्मी सितारों की वही रौनक रही, जो अक्सर एंटीलिया (मुंबई में अंबानी का आशियाना) में होने वाले जच्चा-बच्चा से लेकर मुंडन-टुंडन वाले किसी भी समारोह में नजर आती है। सोशल मीडिया पर इन सितारों की रौनक को लेकर हल्ला-गुल्ला ठीक नहीं लगता। लड़के वाले ब्याह में पड़ोसियों-रिश्तेदारों को लेकर जाते ही हैं। ये तो फिर भी पेरोल पर पलने वाले वे सितारे हैं, जिनके लिए ये सब करना जरुरी भी है और मजबूरी भी है, वरना... बात और आगे बढ़ाते हैं...
सितारों का ये मजमा बहुत साफ वाले बैरौमीटर पर होता है। यहां स्टारडम का स्टैंडर्ड बेस प्राइस होता है, जिसका उनकी फिल्मों की कामयाबी-नाकामयाबी से कोई लेना-देना नहीं होता। यहां अर्जुन कपूर पाए जाएंगे, जिनको खुद याद नहीं होगा कि उनकी कोई फिल्म कब हिट हुई होगी, लेकिन मनोज वाजपेयी या नवाजुद्दीन सिद्दीकी या पंकज त्रिपाठी जैसों की मौजूदगी नहीं होगी। मामला हाई-फाई सोसायटी का है, जिसका किसी की फिल्मोग्राफी से कोई लेना-देना नहीं। बात और भी आगे बढ़ाते हैं...
किसी ने अच्छा कहा कि मुकेश अंबानी ने ब्याह से चार महीने पहले प्री वेडिंग इवेंट इसलिए किया, क्योंकि हफ्ता-दस दिन में पार्लियामेंट वाले इलेक्शन के लिए आचार सहिता लग गई, तो केंद्र में तैनात मोदी के मोटा भाई की फौज उनके किसी काम नहीं आती और अगर चुनावी नतीजों में कुछ ऊपर-नीचे हो गया, तो प्रधानमंत्री राहुल गांधी से मुकेश अंबानी किसी सहुलियात की उम्मीद कर ही नहीं पाएंगे।
घर के गार्डन में ही लिमिटेड मेहमानों को एडजेस्ट किया जाएगा। इस झंझट से बचने के लिए अंबानी ने ये रास्ता निकाल लिया। अब ये वक्त साबित करेगा कि बारह जुलाई को लौंडे के ब्याह में वो प्रधानमंत्री बनकर हाजिरी देंगे या पूर्व प्रधानमंत्री की हैसियत से लिफाफा देंगे। अंबानी ने अपने यारों-दोस्तों के बड़े मजमे को इस प्री इवेंट में बुलाकर निपटा दिया कि कहीं कोई बुरा न मान जाए या खास तौर पर किसी फिल्मी सितारे को ताना न सुनने पड़े कि अरे, आप जामनगर में नजर नहीं आए। बारह जुलाई के लिए जिसकी बुकिंग होनी है, वो अभी से हो जाएगी, डोंट वरी। बात को और भी आगे बढ़ाते हैं.. सोशल मीडिया का तो हिसाब-किताब समझ में नहीं आया। हर किसी को तलाबेली और चुहल है कि अंबानी के लौंडे के ब्याह में क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है। कौन आ रहा है और कौन नहीं आ रहा है। बिन बुलाए मेहमानों की तरह यहां भी कैमरे और मुंह उठाए मीडियावीरों का मजमा है। एक ही सांस में मजमा लगाने के लिए अंबानी को बुरा-भला कहो और फिर इवेंट की तस्वीरों को शेयर करके लाइक और व्यूज की कमाई का रास्ता भी खोले रखो। भाई जी, इसे चलती-फिरती हिंदी जुबां में दोगुलापन कहते हैं। अंबानी का लौंडा, अंबानी का पैसा, अंबानी के चापलूस, अंबानी के पालतू, हमारा-आपका क्या। क्यों डुगडुगी बजाएं और क्यों रौतड़ा करें। अमां बैठो यार, जिनको आदत है, उनको इवेंट का मजा लूटने दो, जिसको आदत नहीं है, उसे सोशल मीडिया पर तस्वीरों को निहराने दो। कुंवारी कन्याओं को आहें भरने दो कि काश इस अंबानी के दो-चार और लौंडे होते, तो क्या एक मेरे नसीब में नहीं होता। अब ये कंप्लेंट तो भगवान जी के पोर्टल में ही रजिस्टर्ड हो सकती है। बात यहीं रोकते हैं, मगर... बात-बात में बात यहां तक आ गई। समझ में नहीं आ रहा है कि पिछले 6-7 सालों से रिश्ते में बंधे अनंत-राधिका को दूधो नहाओ पूतो फलो वाला आशीर्वाद अभी देना है या इसके लिए बारह जुलाई का दिन फिक्स है। खासी इंग्लिश्स्तानी में कांग्रेट ब्रो कहना ज्यादा ठीक रहेगा। क्यों, पब्लिक क्या बोलती है। बात को यहीं पर रोक देते हैं...
पापा जी (मुकेश भाई) ये पढ़कर रोना नहीं, हमें सारे इमोशंस समझ में नहीं आते। जैसे आपको भी नहीं आते।
न कोई बात, न कोई तकरार, अब बारह जुलाई का करें इंतजार।
जै जनेंद्र। जै कृष्ण
ब्लाग के ये लिंक भी देखिए-
मामला रश्मिका का नहीं, लड़कियों की इज्जत का है




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Nice article with deep information.
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