Sunday, November 26, 2023

इनके पनौती, उनके पनौती


देश में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो है पनौती। इस एक शब्द को लेकर भाजपा और कांग्रेस वाले एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का खेल कर रहे हैं, उससे तो ये लगता है कि कहीं इस शब्द में इलेक्शन जीताने की ताकत तो नहीं है। ये सिर्फ इलेक्शन की छिछलेदारी है या इसके बाद भी हमारे यहां इनका पनौती, उनका पनौती का खेल होता रहेगा, ये आने वाले वक्त में पता चलेगा। सियासत के मैदान के पनौती कौन हैं, ये आप जानिए, लेकिन हिंदी फिल्मों की दुनिया का इस शब्द के साथ कितना विचित्र रिश्ता है, इस पर गौर कर लेते हैं। 

सबसे पहले याद आते हैं, साजिद खान की हाउसफुल में तो अक्षय कुमार का कैरेक्टर ही ऐसा था कि हर कोई उसे पनौती मानता था, क्योंकि वो कभी किसी का अच्छा नहीं कर पाता था, बल्कि नुकसान जरुर कराता था। ये वही कुमार हैं, जो पत्रकार बनकर पीएम हाउस में पंहुचते हैं और पीएम से सवाल करते हैं कि आम काटके खाते हैं या चूस के खाते हैं


इस फिल्म के अलावा एक सिंगर (नाम लेना ठीक नहीं) है, जिन्होंने 80 और 90 के दशक की फिल्मों में जमाकर गाने गाए, लेकिन कहने वाले उनको भी पनौती कहते थे, क्योंकि ऐसा मान लिया गया था कि ये जनाब जिस फिल्म में गा देंगे, उसका बाक्स आफिस पर कभी बेड़ा पार नहीं होगा। उनकी शुरुआती फिल्में तो बाक्स आफिस पर खूब चलीं, लेकिन उसके बाद वही होता था कि उनके गानें चले या न चलें, फिल्में तो बाक्स आफिस पर बंटाढार हो जाता था। इससे अलग बात करें, तो क्लासिक गायिकी में उनका आज भी कोई जवाब नहीं है। फिर भी उनको पनौती कहा जाता था। 


याद आती है,  साउथ से आकर हिंदी फिल्मों में कामयाबी का झंडा फहराने वाली एक हीरोइन की। अस्सी के दशक में उनकी किस्मत खूब चमकी, लेकिन उनको भी एक ऐसा दौर झेलना पड़ा, जहां उनके बारे में ये माना लिया गया था कि मोहतरमा इतनी बड़ी पनौती हैं कि जिस हीरो के साथ काम कर लिया, उसका चलता चलाता कैरिअर बर्बादी की तरफ हो लेता था। एक के बाद एक लाइन से बारह-पंद्रह हीरो के साथ यही हुआ, तो बाकियों ने उनसे दूरी बनानी शुरु कर दी थी। अब वे दिवंगत हो चुकी हैं, इसलिए नाम लेना ठीक नहीं होगा। 

कुछ फिल्मों के टाइटलों को भी पनौती माना जाता है। इनमें चैंपियन टाइटल है सपना। सपने और ड्रीम शब्द से जुड़ी फिल्मों की लंबी फेहरस्ति है, जब इन शब्दों के टाइटल वाली फिल्मों का बंटाढार हो गया। हेमा मालिनी की ड्रीमगर्ल इमेज को कैश करने के लिए इसी नाम से फिल्म बनी, जो बाक्स आफिस पर औंधे मुंह जा गिरी। काजोल की सपने नहीं चली, एक महल हो सपनों का भी यही हाल रहा। सनों का सौदागर को भी कामयाबी नहीं मिली। शाहरुख खान ने अपनी पहली कंपनी का नाम ड्रीम अनलिमिटेड रखा और उसमें फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, पहेली असोका जैसी फिल्में बनाईं, जिनका बाक्स आफिस पर बुरा हाल रहा। 

मुंबई के एक जुहू का एक बंगला था, जहां एक दौर ऐसा था कि यहां दिन रात फिल्मों की शूटिंग चलती थी, लेकिन एक मर्तबा किसी ने हवा उड़ा दी कि ये बंगला पनौती है। इस बंगले में जिन फिल्मों की शूटिंग हुई, उनका बाक्स आफिस पर दीवाला निकल गया। देखते ही देखते बंगले पर ताले पड़ गए। इसी तरह से मुंबई सिटी के कोलाबा इलाके में बंद पड़ी एक खटारा मुकेश मिल को फिल्म वालों ने एक नई जिंदगी दी, जब हर दूसरी फिल्म की शूटिंग यहां होने लगी, लेकिन न जाने किसने इसे पनौती डिक्लेयर कर दिया और यहां शूटिंग बंद हो गईं। इसी तरह से ऊटी को लेकर हुआ, जहां के बारे में धारणा बन गई कि वहां जिन फिल्मों की शूटिंग होती थी, वो नहीं चलती थीं। देखते ही देखते फिल्मवालों ने ऊटी जाना तकरीबन बंद कर दिया। 

इसे पनौती कहो या अंधविश्वास, ये आपकी मर्जी। इस वक्त कहोगे, तो कांग्रेसी या भाजपा वाले कहलाए जाओगे। 

क्या आप पनौती शब्द पर यकीन करते हैं क्या और अगर हां, तो आपकी नजर में पनौती कौन है? इस ब्लाग में जिस सिंगर और हीरोइन का जिक्र किया गया है, अगर आप उनके नाम समझ गए हों, तो आपके जवाब के लिए कमेंट बाक्स ओपन है।  

हां एक और जरुरी बात- नाना पाटेकर वाले ब्लाग के लिए थोड़ा सा इंतजार कीजिए




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अब 'नागिन' जैसी 'धूम' नहीं

मामला रश्मिका का नहीं, लड़कियों की इज्जत का है




Friday, November 24, 2023

अब 'नागिन' जैसी 'धूम' नहीं होगी


फिल्म इंडस्ट्री के उन दो निर्देशकों की यादों को नमन, जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। 


19 नबंवर को संजय गढ़वी की दुनिया से विदाई हो गई, जिनकी पहचान यशराज में बनी धूम सीरिज की पहली दो फिल्मों के साथ बनी। यशराज के कर्ताधर्ता आदित्य चोपड़ा के साथ क्रिएटिव मतभेदों के चलते वे धूम सीरिज की तीसरी कड़ी से अलग हो गए और उनकी अगली फिल्मों को कामयाबी नहीं मिली। कुछ वक्त पहले खबर मिली थी कि अनिल शर्मा के छोटे भाई संजय शर्मा के लिए वे अभिषेक बच्चन के साथ कोई फिल्म प्लान कर रहे हैं। 
इससे कोई मना नहीं कर सकता कि जब भी धूम सीरिज की बात होगी, तो संजय गढ़वी को याद किया जाएगा। 



23 नवंबर को राजकुमार कोहली ने 93 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। तीन दशक से भी ज्यादा लंबे दौर में उनकी फिल्मों का आना-जाना लगा रहा। कोहली साहब की पहचान मल्टीस्टार कास्ट वाली फिल्मों से बनी। 
सत्तर और अस्सी के दशक के नामी सितारों के साथ मल्टीस्टार कास्ट फिल्में बनाना हंसी ठटठे का काम नहीं था।इस दौर के किसी भी कामयाब निर्देशक के लिए नागिन (रीना राय) या जानी दुश्मन जैसी फिल्में बनाना कतई मुमकिन नहीं होगा। इस दौर में भला कौन स्टार होगा, जो फीमेल सेंट्रिक फिल्म में एक दर्जन दूसरे सितारों के साथ काम करने के लिए मान जाएगा और उनके बीच कभी कोई खटपट नहीं होगी, लेकिन नागिन में ये कमाल हुआ, जिसमें टाइटल रोल रीना राय का था और सितारों की लिस्ट में सुनील दत्त, फिरोज खान, संजय खान, विनोद मेहरा, कबीर बेदी, अनिल धवन, प्रेमनाथ, रेखा, योगिता बाली जैसे दिग्गज सितारों की फौज थी। नागिन के बाद जानी दुश्मन भी इसी पैटर्न पर थी, जिसमें तमाम मसालों को एक हारर टच के साथ बनाया गया और पब्लिक ने फिल्म को सरआंखों पर बैठाया। इन मल्टीस्टार कास्ट फिल्मों का संगीत एक दमदार फैक्टर होता था। आज भी इन फिल्मों के गाने धड़ल्ले से सुने जाते हैं। फिल्मी संगीत के रसातल वाले इस दौर में नागिन और जानी दुश्मन जैसे गानों के रीमिक्स से लेकर रील्स और टिकटॉक में इन गानों पर उछलते-फांदते किरदार इस संगीत की अभूतपूर्व कामयाबी का दस्तावेज है। 

एक दौर आया, जब वे अपना ये मिदास टच खो बैठे। बाकी कसर बेटे (अरमान कोहली) को स्टार बनाने की जिद ने पूरी कर दी। उनके साहेबजादे ने साबित किया कि औलाद निकम्मी हो, तो मां-बाप को चैन से नहीं रहने देती। इस बात को जाने दीजिए। 
कोहली साहब के खाते में दर्ज उनकी मल्टीस्टार फिल्मों की लिस्ट निकालिए और उनकी मास्टरी को सलाम कीजिए। अब जन्नत में कोहली साहब को उनके बहुत सारे पसंदीदा सितारे मिल जाएंगे। राजकुमार से लेकर सुनील दत्त,  संजीव कुमार, फिरोज खान, शशि कपूर, राजेश खन्ना, विनोद मेहरा, शम्मी कपूर, विनोद खन्ना के साथ वे एक मसालेदार फिल्म की कास्टिंग तो मजे से कर सकते हैं। 
हमेशा सुफैद शर्ट-पैंट पहने कोहली साहब का खालिस पंजाबियत वाला मस्तमौला अंदाज, कभी न समझ में आने वाले चुटकलों पर ठहाके और तुरंत समझ में आने वाले पैगों की महफिलों के हिस्सा बन चुके लोगों के पास याद करने के लिए बहुत कुछ होगा, फिर भी मुमकिन है कि इस यारों के यार को याद करते हुए उनके आंसू न रुकें। 
एक बार फिर दोनों दिग्गज निर्देशकों को श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दे। 🙏

बताइए-

संजय गड़वी की दोनों धूमों में से कौन सी पसंद है ?

राजकुमार कोहली की सबसे अच्छी फिल्म कौन-सी लगती है ?

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Wednesday, November 15, 2023

मामला रश्मिका का नहीं, हर लड़की की इज्जत का है

नेशनल क्रश के तौर पर पहचान बनाने वाली साउथ इंडस्ट्री की एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना ने हिंदी फिल्मों में तेजी से अपनी जगह बनाई। अक्सर अपने हॉट लुक्स और ड्रेसेज से लेकर अफेयर के कई किस्सों को लेकर रश्मिका मंदाना मीडिया में बनी रहती हैं। इस बार उनका नाम एक ऐसे मामले से जुड़ा, जिसने तमाम लोगों के होश उड़ा दिए। कुछ दिनों पहले उनकी एक क्लिप वायरल हुई, जबकि असलियत में ये क्लिप किसी और लड़की की थी। 

इस तकनीक को डीपफेक कहा जा रहा है। ये एक ऐसी तकनीक है, जिसमें किसी भी वीडियो क्लिप में चेहरे और आवाज को बदला जा सकता है। ये एक पुरानी तकनीक का नया वर्शन है। अब तक एक फोटो में किसी का चेहरा और बैकड्राप बदल दिया जाता था। इंटरनेट की दुनिया ऐसे फोटोज से भरी पड़ी है, जिसमें किसी लड़की के अश्लील फोटो पर किसी फिल्मी हीरोइन का चेहरा लगा दिया जाता है। लोग हीरोइन समझकर एंज्वाय करते हैं। 

देश में साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए बड़े बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन किसी दूसरे चेहरे पर किसी हीरोइन के फोटो को लगाने की सच्चाई को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया गया। न तो साइबर क्राइम ने इस तरफ ध्यान दिया और न ही उन हीरोइनों ने कोई ध्यान दिया। इसे रोकने के लिए उस वक्त कुछ सोचा गया होता, तो मुमकिन था कि रश्मिका वाली घटना न होती, जो इंटरनेट से जुड़ी हर महिला के लिए भविष्य में गंभीर चुनौती बनेगी। 

इस मामले का हल क्या है, साइबर क्राइम के एक्सपर्ट ही इस बाबत कुछ कर सकते हैं। रश्मिका के मामले को लेकर एक हल्की सी उम्मीद जागी है। दिल्ली साइबर क्राइम सेल इस मामले की जांच कर रही है। इस टीम ने इस केस में बिहार से एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। उम्मीद कर सकते हैं कि इसी मामले से डिपफेक की समस्या का कोई हल निकल जाए। हल निकल आया, तो राहत की बात होगी, वरना आने वाले वक्त में न जाने कितनी युवतियों को रश्मिका मनांदा जैसे मामलों की चुनौती से दो-चार होना पड़ेगा। 



Thursday, November 9, 2023

टाइगर 3- दीवाली या दीवाला ?

सबसे पहले सभी लोगों को हैप्पी दीवाली। दुआ है कि सबकी जिंदगी खुशियों के दीयों सी रोशन रहे।  

अब मामले पर आते हैं। इस बार दीवाली के मौके पर यशराज की फिल्म टाइगर 3 रिलीज होने जा रही है। सलमान खान एक गैप के बाद दीवाली पर लौट रहे हैं। पिछले कई सालों से सलमान खान की फिल्में ईद के मौके पर रिलीज होती आई हैं। टाइगर 3  बाक्स आफिस पर क्या कमाल करेगी, इसे लेकर फिलहाल भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। हां, एक फिल्म से जुड़े तथ्यों को देखते हुए इस बाबत अनुमान जरुर लगाया जा सकता है। चलिए, बात को आगे बढ़ा लेते हैं। 

अमूमन हर बड़े त्यौहार पर हिंदी की बड़ी फिल्में रिलीज होने की परंपरा रही है। दीवाली भी एक ऐसा ही मौका होता है। इस मौके पर रिलीज होने वाली फिल्मों को लेकर आम पब्लिक से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हर जगह बड़ी बड़ी उम्मीदें लगाई जाती हैं। लाजिमी है, ऐसी ही उम्मीदें इस साल टाइगर 3 से रहेंगी। सोलो रिलीज होने की वजह से टाइगर 3 से लगने वाली उम्मीदें ज्यादा रहेंगी। सोलो रिलीज के अलावा टाइगर 3 से लगने वाली बाकी उम्मीदों पर भी गौर करना ठीक होगा। चलिए बात को और आगे बढ़ा लेते हैं।

यशराज ने पठान के साथ अपने स्टूडियो के स्पाई यूनिवर्स की शुरुआत की और बाक्स आफिस पर पठान के पठान शाहरुख खान की बादशाहत का जादू चला और फिल्म ने एक हजार करोड़ की कमाई के क्लब में एंट्री की। टाइगर 3 यशराज के स्पाई यूनिवर्स की दूसरी किश्त है। पठान में पठान की जान बचाने के लिए टाइगर आया था। इस बार टाइगर की जान बचाने के लिए पठान आगे आएगा और इस यूनिवर्स के तीसरे किरदार कबीर (फिल्म वॉर) भी टाइगर 3 का हिस्सा माने जा रहे हैं। कहा ये भी जा रहा है, आने वाले वक्त में इस यूनिवर्स में धूम की सीरिज को भी जोड़ा जाएगा, यानी जान अब्राहम (धूम) और आमिर खान (धूम 3) भी इस यूनिवर्स से जोड़े जाएंगे। 

यूनिवर्स एक ऐसा प्रयोग है, जो हालीवुड में कुछ वक्त पहले अस्तित्व में आया और अब ये प्रयोग हिंदी सिनेमा में हो रहा है। हिंदी के अलावा साउथ की फिल्मों में भी इस यूनिवर्स की दुनिया को लेकर तेजी से काम हो रहा है। इस यूनिवर्स को लेकर चर्चा फिर कभी। अभी चलिए, दीवाली की बात को और आगे बढ़ा लेते हैं। 

टाइगर 3 के हीरो सलमान खान के कैरिअर के लिए इसे बड़ा मौका इसलिए भी माना जा रहा है कि उनकी पिछली कई फिल्में बाक्स आफिस पर कोई कमाल नहीं कर पाईं। अब इसे लेकर सबसे घटिया कुतर्क ये होता है कि सलमान खान सुपर स्टार हैं, तो कुछ फिल्में न चलने से उनके कैरिअर की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। मीडिया में कहने के लिए ये बात अच्छी है, लेकिन हकीकत अलग है। सोशल मीडिया पर इसी तर्क को लेकर सलमान खान के फैंस का पारा चढ़ता है और ये बात समझी जा सकती है, क्योंकि वे फैंस हैं और फैंस एक तरीके के अंधभक्त सरीखे होते हैं, जिनके जज्बातों का हकीकत से कोई वास्ता नहीं होता। चलिए, बात को और आगे लिए चलते हैं। 

सलमान खान सुपर स्टार हैं, इसीलिए इंडस्ट्री को भी उनकी फिल्मों से बड़ी उम्मीदें होती हैं। सलमान खान सुपर स्टार न होते, तो यशराज जैसा पेशेवर स्टूडियो उनके नाम पर 300 करोड़ का दांव कभी नहीं खेलता। ये दांव 301 करोड़ की वसूली के लिए नहीं खेला जाता, बल्कि एक हजार करोड़ से ज्यादा का वापसी के लिए बड़े स्तर पर प्लानिंग की जाती है। पठान से एक हजार करोड़ की कमाई के बाद यशराज टाइगर 3 से ऐसी उम्मीद न करे, इसकी कोई वजह नहीं दिखती। ये वजह तो कतई नहीं हो सकती कि सलमान की कुछ फिल्में बाक्स आफिस पर अच्छी नहीं रहीं। इसमें ये भी जोड़ा जा सकता है कि इन फिल्मों को किसी भी लिहाज से हिट होना ही नहीं था। कुछ लोगों को हैरानी सिर्फ इसलिए होती है कि सलमान खान ऐसी घटिया फिल्मों के लिए हामी कैसे भर लेते हैं और इसका जवाब भी मिल जाता है कि वे सलमान खान हैं और उनको ये सोचने का कापीराइट है कि वे किसी भी किस्म की फिल्म में काम करें, पब्लिक उनकी फिल्म के लिए सिनेमाघरों में दौड़ी चली आएगी। 

सलमान भी जानते हैं कि पब्लिक ने इस सोच को कितनी बार नकारा है। सलमान जानते हैं कि पिछले कई सालों में बजरंगी भाईजान के अलावा कोई ऐसी फिल्म नहीं आई, जिसके न चलने का कोई कारण रहा हो और उनको बनाने के लिए सलमान की सोच को शर्मिंदा न होना पड़ा हो. मगर वे सलमान हैं और उन पर ऐसी बातों का फर्क नहीं पड़ता। वे सुपर स्टार हैं, इसलिए अपनी मर्जी से काम करते हैं, किसी लाजिक से नहीं। ये सलमान के लंबे कैरिअर का ऐसा सच है, जो अब काफी हद तक जहरीला हो गया है, फिर भी सच है।

सलमान खान और उनकी टीम जानती है कि टाइगर की पिछली दो किश्तों को पब्लिक ने पसंद किया और जमकर पसंद किया। इस पसंद की एक बड़ी वजह इनमें भारत-पाकिस्तान के एलीमेंट रहे हैं। (बजंरगी भाईजान में भारत-पाकिस्तान का ये एलीमेंट अलग तरह से काम कर गया था। टाइगर की सीरिज के अलग बजरंगी भाईजान को पाकिस्तान में भी बेशुमार प्यार मिला था। टाइगर की दो किश्तों के बाद इस तीसरी किश्त में भी भारत-पाकिस्तान का फैक्टर होना तो लाजिमी है और ये फैक्टर अगर क्लिक कर जाता है, तो टाइगर 3 बाक्स आफिस पर डंका बजाएगी। कुछ लोग इस बात को भी अहमियत दे रहे हैं कि टाइगर और जोया (कैटरीना कैफ) की जोड़ी की कैमिस्ट्री भी एक बड़ा फैक्टर बनेगी। इस वक्त इसी जोड़ी की फिल्म भारत का जिक्र करना सही नहीं लगता। 

इस फिल्म से जुड़ा इमरान हाश्मी का फैक्टर भी कम दिलचस्प नहीं होगा। एक दौर के किसिंग किंग रहे इमरान हाश्मी इस वक्त कैरिअर के मंद दौर से गुजर रहे हैं। टाइगर, सलमान और यशराज के साथ इमरान हाश्मी का ये पहला जोड़ है और ये कोई सीक्रेट नहीं है कि वे इसमें मेन विलेन हैं, जो टाइगर को चैलेंज करते हैं। किसिंग वाली इमेज से अलग इमरान हाश्मी को उन कलाकारों की फेहरस्ति में रखा जाता है, जो अपने हर किरदार को लेकर बहुत मेहनत करते हैं और उन्होंने अपने बूते पर अपना स्टारडम क्रिएट किया है। यशराज स्पाई यूनिवर्स में इमरान की एंट्री दिलचस्प होगी, ये मानने में कोई गुरेज नहीं होगा। चलिए, बात को और आगे लिए चलते हैं। 

ये तो थीं, पाजिटिव बातें। अब सिक्के के दूसरे पहलू को देखते हैं। टाइगर की दोनों रिलीज किश्तों में म्यूजिक का बड़ा योगदान रहा। दोनों ही बार ऐसे गाने सामने आए, जिनको पसंद किया गया। तीसरी किश्त को लेकर अब तक जितने गाने सामने आए हैं, उनको लेकर कुछ अच्छा नहीं कहा गया। एक शब्द में ये ऐवईं रहे हैं। 

कबीर खान, अली अब्बास जफर, मनीष शर्मा 
ये महज इत्तेफाक है कि टाइगर की तीनों किश्तों की कमान तीन अलग अलग डायरेक्टरों के हाथ रही है। पहली टाइगर कबीर खान ने बनाई, जिन्होंने बाद में बजरंगी भाईजान का इतिहास रचा। दूसरी किश्त के कैप्टन आफ शिप अली अब्बास जफर रहे, जिनके साथ सुल्तान की कामयाबी जुड़ी। तीसरी किश्त की कमान मनीष शर्मा के हाथों में है, जिनको यशराज के बॉस आदित्य चोपड़ा का ब्लू ब्वाय माना जाता है। शर्मा जी के खाते में बैंड बाजा बारात की कामयाबी और फैन (शाहरुख खान) की भयंकर नाकामयाबी दर्ज है। शर्मा जी के बारे में कहा जा सकता है कि उनको वो थाली सजाने का मौका मिला है, जिसे पहले कबीर खान और फिर अली अब्बास जफर ने मेहनत से तैयार की। शर्मा जी ने कैसे मसाले डाले हैं, ये दावत खानेवाली पब्लिक तय करेगी। चलिए, बात को और आगे बढ़ा लेते हैं। 

हां, बिना किसी हिचक के ये बात जरुर कही जाएगी कि फिल्म के प्रमोशन में टाइगर की पिछली दोनों किश्तों के मुकाबले इस बार प्रमोशन बहुत ज्यादा ठंडा रहा। जाहिर है कि ये यशराज की मीडिया टीम की सोच रही होगी, जिस पर सवाल करना फिजूल होता है। अपनी ही धुन में रहने वाली यशराज की मीडिया टीम को दीन दुनिया से कोई वास्ता नहीं रहता। चलिए, बात को और आगे बढ़ा लेते हैं। 

टाइगर 3 को लेकर अच्छी और न अच्छी बातों के आकलन के परे इस बात में कोई शक सुबहा नहीं है कि फिल्म को भयंकर ओपनिंग मिलेगी और दीवाली का एडवांटेज मिलेगा और इस बात का भी एडवांटेज मिलेगा कि ये सोलो रिलीज हो रही है। मल्टीप्लेक्स थिएटरों ने जिस तरह से टिकटों की कीमत हजारों में (खबरों के मुताबिक, 1600 रु. तक) रखकर पहले ही बड़ी कमाई का जुगाड़ बना लिया है। बाकी ये फिल्म एक हजार करोड़ के क्लब में एंट्री लेगी और कितना आगे जाएगी, इस पर अभी तर्क-वितर्क की कोई गुंजाइश नहीं है। 

हिंदी सिनेमा की दुनिया में अक्सर बाहरी दुनिया की इस कहावत को याद किया जाता है कि कामयाबी के कई बाप होते हैं और नाकामयाबी अनाथ रह जाती है। फिल्म चली, तो क्रेडिट सलमान खान के स्टारडम को मिलेगा और अगर मामला ऊपर-नीचे रहा, तो बकरा बनाने के लिए मनीष शर्मा से लेकर तमाम नाम तैयार होंगे। चलिए, अब बातों के सिलसिले को यहीं पर रोकने से पहले एक आखिरी बात-

थिएटर जाइए और टाइगर की तकदीर का फैसला कीजिए। साथ में दीवाली का मजा लें। पटाखों से होने वाले जहरीले धुएं का ख्याल रखेंगे तो आपके बच्चों और उनके भविष्य के लिए बेहतर होगा। सबके लिए- 
  

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Friday, November 3, 2023

विश्वकप 2023 से फिल्मी सितारों की गैरमौजूदगी क्यों ?


जिस दिन देश और दुनिया की तरफ से हिंदी सिनेमा के किंग खान शाहरुख खान को हैप्पी बर्थ डे कहा जा रहा था, उसी दिन मुंबई में एक और इतिहास रचा जा रहा था, जब वानखेड़े की पिच पर भारतीय टीम ने श्रीलंकाई टीम की लंका लगा दी और सेमीफाइनल के लिए सीट पक्की कर ली। हर किसी की दुआ है कि हमारी टीम अपने विजयी अभियान को जारी रखे और 19 नवंबर को अहमदाबाद के फाइनल में ट्राफी जीते। 

श्रीलंका के खिलाफ हुए मैच में वानखेड़े स्टेडियम में भारतीय टीम को चीयर्स करने के लिए ब्लू जर्सियां पहने लोगों का हुजूम था, जिसे देखकर कतई हैरानी नहीं हुई। कुछ लोगों को 2011 की याद आ गई, जब वानखेड़े की इसी पिच पर भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल हो रहा था और नीली जर्सियों और तिरंगे झंडो के साथ आडिएंस स्टैंड खचाखच थे। वानखेड़े के वीआईपी गैलरी में आमिर खान, सुनील शेट्टी सहित तमाम सितारे मौजूद थे। 

क्या फिल्मी सितारों की मौजूदगी से भारतीय टीम के प्रदर्शन पर क्या कोई असर पड़ता है, तो जवाब होगा कि बिल्कुल नहीं। मगर ये सवाल बनता है कि 2023 के वर्ल्ड कप से हिंदी फिल्मों के सितारों की गैरमौजूदगी की क्या वजह हो सकती है। इस बात को कुछ यूं भी कहा जा सकता है कि इस विश्वकप में जगमगाहट उस तरह की नहीं है, जैसी विश्व कप जैसे आयोजन से की जाती है। विश्वकप के उदघाटन से लेकर अब तक खास तौर पर उन मैचों में तो दर्शक कम आ रहे हैं, जिनमें भारत का मैच नहीं होता है। यहां एक बार फिर 2011 के विश्वकप के आयोजन की याद ताजा हो जाती है, जिसमें हिंदी फिल्मों के सितारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। याद करें, साउथ से रजनीकांत और चिरंजीवी से लेकर मुंबई की फिल्मी दुनिया से अमिताभ बच्चन और दूसरे दिग्गज सितारों ने स्टेडियम में जाकर मैचों को देखा। जाहिर है कि मैच के आयोजनों ने उनको स्टेडियम में आने की दावत दी, जिसे मान लिया गया। 

इस बार के विश्वकप के मैचों में ऐसा कुछ नजर नहीं आया। यहां तक कि मुंबई के मैचों से भी फिल्मी सितारे दूर रहे। जाहिर है कि मैच का आयोजन करने वाले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और तमाम क्रिकेट एसोसिएशनों ने फिल्मी सितारों को विश्व कप से जोड़ने की कोई खास कोशिश नहीं की। यहां दो बातों को सामने रखना जरुरी है। विश्वकप से पहले प्रमोशन के लिए बनाए गए एंथम गीत में रणवीर सिंह नजर आए, लेकिन इसे प्रमोट के लिए रणवीर ने कुछ नहीं किया और पब्लिक ने भी इस कचरे को पसंद नहीं किया।

इस एंथम गीत के अलावा ये भी याद किया जाएगा कि अहमदाबाद में भारत और पाकिस्तान के मैच के लिए अर्जित सिंह सहित कई सिंगरों को परफारमेंस के लिए बुलाया गया। इस मैच से पहले कहा जा रहा था कि अमिताभ बच्चन, रजनीकांत जैसे सितारे इस मैच को देखने पंहुचेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बच्चन अहमदाबाद नहीं गए, लेकिन बुलाया जाता, तो वे वानखेड़े तक तो पंहुच ही सकते थे। 

एक बार फिर 2011 की याद करते हुए 2023 के विश्वकप की बात करें, तो 2011 में कई बड़ी फिल्मों के प्रमोशन को विश्वकप से जोड़ा गया और बड़ी फिल्मों के सितारे अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए स्टेडियम पंहुचे थे। इस बार विश्वकप के दौरान ही शाहरुख खान की डंकी और सलमान खान की टाइगर 3 सहित तमाम बड़ी फिल्मों के प्रमोशन शुरु हुए। सलमान खान एक मैच के लिए पवेलियन में नजर आए, लेकिन दर्शकों के बीच न तो वो पंहुचे, न ही कोई और सितारा पंहुचा।  

ये मामला इसलिए अहम हो जाता है कि आईपीएल के आयोजन ने क्रिकेट और सिनेमाई मनोरंजन को एक ऐसे प्लेटफार्म पर ला खड़ा किया था, जिसमें दोनों साइडस को फायदा हो रहा था। 

शाहरुख खान, शिल्पा शेट्टी, प्रीति जिंटा जैसे सितारे आईपीएल की टीमों के मालिक बने और इनके साथ फिल्मों के प्रमोशन का एक नया सिलसिला शुरु हो गया था। फिल्मों के प्रमोशन के अलावा आईपीएल की सभी टीमें फिल्मों  के सितारों को ब्रैंड अंबेसडर के तौर पर अपने साथ जोड़ते थे। कुछ मिलाकर क्रिकेटमेंट क्रिएट करने में क्रिकेट और फिल्मों की दुनिया ने मिलकर एक जादू चलाया था। 

जरा इतिहास के उन पन्नों को याद कीजिए, जब 2003 के विश्वकप में  टीवी की एंकर के तौर पर मंदिरा बेदी के लिए पब्लिक क्रेजी हो गई थी। 1999 के विश्वकप में एप्पल सिंह के अवतार में संजय मिश्रा के अंदाज ने जमकर तारीफ बंटोरी थी। ये वो दौर था, जब विश्वकप के प्रमोशन के लिए आईसीसी से लेकर मेजबान क्रिकेट बोर्ड और विश्वकप के मैचों के प्रसारण के अधिकार लेने वाले चैनल भी प्रमोशन के लिए बड़े स्तर पर प्लानिंग करते थे और फिल्मी सितारे इस प्लानिंग की हिस्सा हुआ करते थे। जिस देश में आम जनता या तो क्रिकेट के लिए दीवानी होती है या फिर फिल्मों के लिए दीवानी होती है और जब कभी मनोरंजन से भरपूर इन दोनों दुनियाओं के बीच एक प्लेटफार्म बनता है, तो पब्लिक के लिए सिंगल दाम में डबल मजा आ जाता है। आईपीएल की कामयाबी में इस कांबिनेशन का सबसे बड़ा कमाल रहा है। 
2023 का विश्वकप अपने अंतिम दौर में आ चुका है। उम्मीद के नाम पर कहा जा सकता है कि शायद 19 नवंबर के फाइनल में अहमदाबाद में तमाम लोगों के अलावा फिल्मी सितारों का भी जमावाड़ा हो। फिलहाल ये बात उम्मीद से ज्यादा नहीं है। 

जो इस बात को राजनैतिक चश्मे से देखना चाहें, उनके लिए ये बात बहुत बड़ी होगी कि 2011 का आयोजन हुआ था, तो केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन वाली सरकार थी। याद आता है कि 2011 के लिए मोहाली में हुए सेमी फाइनल में भारत-पाकिस्तान का मैच देखने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को इंवाइट किया गया था और दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने मिलकर मैच देखा था। 
2023 के विश्वकप के समय केंद्र में भाजपा की सरकार है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की कमान अमित शाह के बेटे जय शाह के हाथों में है। इसके अलावा तो इन दोनों आयोजनों में कोई और राजनैतिक कनेक्शन नहीं दिखता, लेकिन ये भी तो कम बड़ी बात नहीं है। हां, इस बात से हर कोई सहमत होगा कि अगर 2023 के विश्वकप के मैचों के लिए अगर फिल्मी सितारों को जोड़ने की बात सोची जाती, तो इस सरकार के पास अक्षय कुमार, अनुपम खेर, कंगना सहित सितारों की बड़ी टोली है, जो दिल्ली दरबार के इशारे पर स्टूडियो छोड़कर स्टेडियम में नाचने-गाने से भी मना नहीं करते और जो मना करते, उनको लाने के तरीके भी किसी से छुपे नहीं हैं। 

ऐसे में, जबकि भारतीय क्रिकेट टीम इस विश्वकप में धमाल कर रही है, तो कहा जा सकता है कि फिल्मी दुनिया का इंवाल्वमेंट एंज्वायमेंट के स्तर को नया मकाम दे सकता था। फिलहाल हर किसी को 19 नवंबर का इंतजार है, जब अहमदाबाद में हमारी टीम एक बार फिर चैंपियन बनेगी, जरुर बनेगी। 

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