मुन्नाभाई की बात को यही रोककर अपनी गाड़ी डंकी वाले रास्ते पर ले आते हैं। फिल्म को रिलीज होने में दो दिन बचे हैं। फिल्म के प्रमोशन को लेकर शाहरुख खान ने हमेशा की तरह अपनी पूरी ताकत लगा दी है। डंकी उस कैटेगिरी की फिल्मों में शुमार नहीं होती, जिसके लिए ये सोचा जाए कि ये हिट होगी या नहीं। ऐसी फिल्मों को लेकर सिर्फ ये सोचा जाता है कि पहले दिन कितना बिजनेस करेगी, वीकंड पर कितना बिजनेस रहेगा, कितने रिकार्ड तोडेगी, कितने रिकार्ड जोड़ेगी। जब से कमाई के आंकड़ों का खेल प्रोडक्शन हाउस खुद खेलने लगे हैं, तो इनका चार्म खत्म सा हो रहा है। डंकी का निर्माण शाहरुख खान की कंपनी रेडचिल्ली ने किया है और रिलीज के बाद रेडचिल्ली ही बताएगी कि डंकी का बिजनेस क्या रहा। कुछ समझे ?
डंकी के साथ दो अहम बातें जुड़ी हुई हैं। पहली बात, डंकी के साथ ही बाहुबली वाले साउथ के दिग्गज सितारे प्रभास की फिल्म सालार रिलीज होने वाली है। इस टकराव को लेकर मीडिया में ज्यादा बवेला नहीं है, तो वजह साफ है कि सालार पैन इंडिया फिल्म होने के बाद भी साउथ और ओवरसीज में अच्छा करेगी, लेकिन हिंदी में शाहरुख खान की फिल्म के आगे इसका टिकना मुश्किल है। बाहुबली के बाद प्रभास की पिछली रिलीज सभी फिल्मों ने हिंदी बेल्ट में उनके ब्रैंड को धरती पर ला पटका है।
शाहरुख खान की फिल्म से साउथ की फिल्म के मुकाबले को लेकर एक दिलचस्प मामला याद आता है, जब 2018 में शाहरुख खान की जीरो के सामने केजीएफ रिलीज हुई थी। यश उस वक्त हिंदी बेल्ट के लिए नामालूम हुआ करते थे। बाक्स आफिस के नतीजे में जीरो का मामला शून्य जैसा रहा और केजीएफ ने हिंदी बेल्ट मे ंजगह बना ली। कहना मुश्किल है कि डंकी बनाम सालार में ऐसा कुछ होगा। अगर होगा तो ये चमत्कार होगा और चमत्कार रोज रोज नहीं हुआ करते।
डंकी को लेकर दूसरी बात ये है कि शाहरुख खान हैट्रिक पर हैं। पठान और जवान के बाद उनका एक ही साल में तीसरी फिल्म लेकर आना एक ऐसा वाक्या है, जो अपने आप में विचित्र इसलिए है कि ऐसा न तो पहले हुआ, न ही आने वाले समय में होने की गुंजाइश है। जीरो के नतीजे को लेकर बुरी तरह से हिले शाहरुख खान ने ये सोच-विचार में चार साल लगा दिए कि अब उनको किस तरह की फिल्मों में काम करना चाहिए और अब तक उनका ये निशाना सटीक रहा है। ये भी महज संयोग है कि इन तीनों फिल्मों के निर्देशकों के साथ शाहरुख खान ने पहली बार काम किया। अब छोटी-सी बात राजकुमार हीरानी की, जिनको हिंदी सिनेमा का नाट आउट बैटसमैन कहा जाता है क्योंकि बाक्स आफिस पर उनकी सभी फिल्में सफल रही हैं। इससे भी बड़ी ये बात है कि सामाजिक दायरे में उनकी सभी फिल्मों ने जोरदार मौजूदगी दर्ज कराई है। उनका LCD (laughter cry drama) फार्मूला बेजोड़ साबित हुआ है। अब तक उन्होंने विधु विनोद चोपड़ा के साथ फिल्में बनाई हैं। चोपड़ा से खटपट के बाद ये उनकी पहली फिल्म है। कहना मुश्किल है कि डंकी को लेकर ये बात कितनी अहम है। ज्यादा संभावना इस बात की है कि इस फिल्म के बाद चोपड़ा को हीरानी के साथ पंगा लेने पर अफसोस होगा।जाते जाते एक और बात याद आ गई। बुजुर्गवार कह गए कि एक न एक गिन हर गधे के अच्छे दिन जरुर आते हैं। क्या इस कहावत का इस फिल्म के साथ कोई कनेक्शन है ? ब्लाग खत्म करने से पहले यहां दो सवाल आपके लिए-
पहला, शाहरुख खान से पहले मुन्नाभाई एमबीबीएस के लिए किस एक्टर को अप्रोच किया गया था?
दूसरा, राजकुमार हीरानी की अब तक रिलीज फिल्मों में आप किसे बेस्ट मानते हैं?
जवाब के लिए कमेंट बाक्स ओपन है
शाहरुख खान से जुड़े ब्लाग के ये लिंक भी देखिए-
यहां से कहां जाएगा सुपर स्टार का सफर ?




4 comments:
अगर मै गलत नही हुँ तो राजकुमार हीरानी ने शाहरुख् से पहले अनिल कपूर को मुन्ना भाई के किरदार मे लेने का प्लान बनाया था।
मुझे डंकी का बेसब्री से इंतजार है। आपके पहले प्रश्न का उत्तर नही पता। दूसरे का उत्तर डंकी देखने के बाद दूँगी।
Nice Article
डंकी का रिजल्ट बहुत अच्छा नहीं दिख रहा है. हिरानी साब का जादू खत्म हो रहा है या combination की failure है?
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