Tuesday, October 10, 2023

बर्थ डे स्पेशल - काश अमिताभ-रेखा के साथ ये हो जाता...

Disclaimer- ये आलेख पूरी तरह से काल्पनिक है, लेकिन इसके पात्र काल्पनिक नहीं हैं

सत्तर के दशक का आखिरी दौर-

बंबई (आज का मुंबई) के एक फाइव स्टार होटल के एक हाल में राउंड टेबल लगा हुआ है। टेबल के चारों तरफ लगी चेयरों के एक-एक नेमप्लेट रखी हुई है। टेबल के फ्रंट साइड पर एक विचारक विराजमान है। हाथों में सिगरेट और प्याले से चाय सुड़कते हुए वो दीवार पर लगी घड़ी को घूर रहा है। घड़ी का घंटा दस बजने की सूचना देता है-

कमरे के अंदर यश चोपड़ा की एंट्री होती है। वो काला पत्थर की कामयाबी को लेकर डिस्टीब्यूटर्स के साथ मीटिंग करके आए हैं और काला पत्थर की चकाचक कामयाबी से गदगद हैं।

यश चोपड़ा के आने के चंद मिनटों बाद हाथों में सिगरेट और सिगरेट का पैकेट लिए प्रकाश मेहरा अवतरित होते हैं। मुकद्दर का सिकंदर के बाद वो जोरा और सिकंदर को लेकर एक और फिल्म बनाने के चक्कर में हैं, लेकिन उनको कोई स्टोरी नहीं मिल रही है।

प्रकाश मेहरा के बाद एंट्री होती है मनमोहन देसाई की। प्रकाश मेहरा के साथ उनकी नजरें लड़ती हैं, तो चेहरे पर एक स्माइल, लेकिन दिल में कड़वाहट के भाव भर जाते हैं। मनमोहन देसाई एक सिनेमा मैग्जीन के आर्टिकल से दुखी हैं, जिसमें लिखा गया कि उनका खोया-पाया फार्मूला अब ओवर होता जा रहा है।

प्रकाश मेहरा के बाजू में मनमोहन देसाई की चेयर लगी हुई थी, लेकिन अमिताभ बच्चन के नाम पर कहीं दोनों फिर से आपस में न भिड़ जाएं, इसलिए फटाफट उनकी कुर्सियों में फेरबदल किया जाता है और मनमोहन देसाई को वहां से हटाकर यश चोपड़ा के बाजू में बैठाया जाता है।

प्रकाश मेहरा के बाजू वाली चेयर पर बैठने के लिए एक और गेस्ट की एंट्री होती है। ये हैं बंगाली बाबू ह्रषिकेष मुखर्जी। दादा.. दादा... कहकर यश चोपड़ा, मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा अपनी अपनी चेयर से उठते हैं और दादा को कुछ वक्त पहले रिलीज हुई फिल्म गोलमाल की कामयाबी के लिए बधाई देते हैं। गोलमाल ने बाक्स आफिस पर रिकार्डतोड़ कामयाबी पाकर फिल्मों के कारोबारी पंडितों को चौंका दिया। 

इन चारों के आने के बाद एक चेयर अब भी खाली पड़ी हुई है। ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता और कमरे में एंट्री होती है शोलेवान रमेश सिप्पी की। वे लगातार जम्हाई ले रहे हैं, क्योंकि पिछली दोपहर से लेकर लेट नाइट तक सलीम-जावेद के साथ उनकी एक नई फिल्म के लिए सीटिंग थी। सिप्पी की इस फिल्म के लिए मल्टीस्टार कास्ट होगी और इसका टाइटल होगा शान। भव्यता में रमेश सिप्पी इसे शोले से कहीं ज्यादा बड़े स्केल पर बनाने की प्लानिंग कर रहे हैं। 

रमेश सिप्पी के साथ ही आने वाले मेहमान डायरेक्टरों की गिनती पूरी हो गई, लेकिन ये पांचों धुरंधर इस बात को लेकर अनजान थे कि उनको यहां क्यों बुलाया गया है। ये सस्पेंस तब पूरा हुआ, जब एक और सज्जन की एंट्री हुई। 12 घंटे से ज्यादा लंबे वक्त तक चली मैराथन मीट के अंत में जब ये डायरेक्टर बाहर निकले, तो उनके हाथ में एक-एक फाइल थी और इसमे उनकी नई फिल्मों के लिए फाइनल हो चुकी स्टोरियां थीं। सबको अपनी-अपनी पसंद से अपने लिए फाइल चुनने का मौका मिला था।

कुछ दिनों के बाद-

मुंबई के एक स्टूडियो में बिखरे हुए बालों और बेतरतीब दाढ़ी के गेटअप में अमिताभ बच्चन तैयार हो रहे थे। निर्देशक के तौर पर रमेश सिप्पी उनको समझा रहे थे कि किस स्टाइल में उनको डायलाग बोलना है। डायलाग था- पुष्पा को फ्लावर समझा क्या। फायर है मैं.. झुकेगा नहीं साला 


यश चोपड़ा की यूनिट एक नई फिल्म के लिए एक गाना शूट कर रही है। कैमरे के सामने राज मल्होत्रा, यानी अमिताभ बच्चन खड़े हैं और उनके साथ सिमरन यानी रेखा हैं। लाइटिंग की सैटिंग होने के बाद गाना शुरु हो जाता है और फिजां में गाने के शब्द गूंज रहे हैं- साजन जी घर आए...

प्रकाश मेहरा की टीम खामोशी से बैठे आदित्य कश्यप का सीन शूट कर रही है। सीन के मुताबिक, अपने सामने बैठी पंजाब की सिख़ड़ी की बक बक से आदित्य कश्यप परेशान हो चुका है। शाट होने के बाद अमिताभ बच्चन मेकअप रुम में आते हैं, जहां फिल्म में गीत ढिल्लों का रोल कर रही रेखा पहले से बैठी हैं। अगला शॉट उनका होना है। 

ह्रषिकेश मुखर्जी ने पंजाब की एक हवेली फाइनल कर दी है। इस हवेली में सुरिंदर साहनी और उनकी बीवी बनी तानी की मैरिड लाइफ वाले सीन फिल्माए जाएंगे। सुरिंदर साहनी को चश्मा फिट नहीं हो रहा था, तो तानी को पंजाबी सलवार सूट में प्राब्लम हो रही थी। लो जी, एक दिन में प्राब्लम साल्व। ह्रषि दा ने सुरिंदर की आंखों से चश्मा ही छिन लिया और सुरिंदर का  सीन शूट होने लगा। अपनी बंगाली भाषा के साथ  ह्रषि दा गुनगुना रहे थे- तुझमें रब दिखता है... यारां मैं क्या करुं... उनको गाता देखकर हर कोई हंस पड़ा। 
मनमोहन देसाई के दफ्तर में एक इमरजेंसी मीटिंग चल रही है। मीटिंग में अमिताभ हैं। रेखा का मीटिंग के लिए आने का इंतजार हो रहा है। ये मीटिंग इसलिए बुलाई गई है कि एक सीन को लेकर मनमोहन देसाई उलझ गए हैं। उस सीन में जैनी (रेखा) को इंप्रेस करने के लिए फ्रेंड्स क्लब के प्रेसीडेंट प्रेम (अमिताभ बच्चन) को चिकन-मटन और मच्छी खाना है। मसला ये है कि मनमोहन देसाई शुद्ध शाहकारी हैं और इन चीजों से बहुत दूर रहते हैं। उनका असिस्टेंट आइडिया देता है कि चिकन-मटन, मच्छी की जगह इनके प्लास्टिक टॉय वहां रख दिए जाएं। नानवेज के शौकीन बच्चन और कई लोग उसे घूरते हैं, लेकिन मनमोहन देसाई को आइडिया जम जाता है। अगले दिन कैमरे के सामने प्रेम बाबू, यानी अमिताभ प्लास्टिक का चिकन-मटन खाते हैं और अपनी लाइफ के ऐसे ये पहले एक्सपीरिएंस पर कतई खुश नहीं होते। 

अगली नींद टूटी, तो सत्तर के दशक का ये ख्याल दफन हो गया। कौन जानता था कि चालीस साल बाद नई सदी में इन फिल्मों की हकीकत सामने होगी। स्क्रीन पर क्या तहलका मच जाता।

बाय बाय करने से पहले चंद बातें और-

नीचे दी गई तस्वीरों पर गौर फरमाइए- 

दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे, पुष्पा 

जब वी मीट, रब ने बना दी जोड़ी, अजब प्रेम की गजब कहानी 

आप कमेंट बाक्स में बताइए कि आप इन फिल्मों में से किस फिल्म में अमिताभ-रेखा की जोड़ी को देखना चाहते। अगर आपके विचार में इस दौर की किसी और फिल्म को अमिताभ-रेखा की जोड़ी के साथ बनाया जा सकता था, 
तो उसके लिए डायरेक्टर के नाम का चयन कीजिए और जल्दी से उस फिल्म और डायरेक्टर का नाम कामेंट बाक्स में बता दीजिए। इसके अलावा आप कमेंट बाक्स में ये भी बता सकते हैं कि क्या मौजूदा दौर में आप अमिताभ-रेखा को एक साथ देखना चाहते हैं और अगर ऐसा है, तो आपकी नजर में उनकी फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर कौन होगा? 

इस सोच के साथ इस जादुई जोड़ी को हैप्पी बर्थ डे कहिए- काश...


अमिताभ बच्चन से जुड़े लिंक पढ़िए-



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5 comments:

Anonymous said...

वाह सर क्या लिखा है लाजवाब
वैसे जब वी मेट में ये जोड़ी वाकई जमती।

Anonymous said...

Zabardast

Anuj Alankar said...

Thanks for comments

Anonymous said...

बेहतरीन लिखा है आपने । मेरे ख्याल से जब वी मेट में दोनों की जोड़ी जबरदस्त जमती। रेखा का चुलबुलापन और अमिताभ का धीर गंभीर रूप फिल्म को चार चांद लगा देता।

Himanshu gupta said...

Nice

कंगना मतलब...

हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रही स्वंयभू महाज्ञानी कंगना के ताजा बयान पर अमिताभ बच्चन को ये तय करना है कि वे इस पर अपना ...