Friday, April 28, 2017

चार किस्से, चार यादें और एक विनोद खन्ना....


कोई कहता है कि वे हमेशा के लिए चले गए। 
कोई कहता है कि वे हमेशा दिलों में रहेंगे। 

पत्रकार के तौर पर विनोद खन्ना से जुड़ी यादों के पन्ने पलटे जाएं, तो समुदर-मंथन हो गया... इस मंथन में से चार यादें, चार किस्से, जो इस पंजाबी मुंडे की विराट कामयाबी को शब्दों में बांधने की ताकत तो नहीं रखते, मगर उनकी शख्सियत का आईना जरुर बन जाते हैं, जिसमें एक ऐसा इंसान नजर आता है, जिसने कामयाबी को अपनी मर्जी और मूड से ज्यादा तवज्जो देना मुनासिब नहीं समझा। 
आइए, यादों के एक ऐसे सफर में हमसफर बनिए, जो विनोद खन्ना के स्टारडम को महसूस करने का एक मौका जरुर बन जाते हैं-


सीन 1 
दिसंबर 1988 
(उस दौर में मोबाइल का इस्तेमाल नहीं होता था) 

मालाबार हिल स्थित विनोद खन्ना के फ्लैट में बजती घंटी......
उधर से- कौन बोल रहा है, किससे बात करनी है? 
इधर से- विनोद जी से एक इंटरव्यू के लिए बात करनी है
उधर से- विनोद जी तो अमेरिका चले गए कल रात.. एक महीने बाद लौटेंगे...
इधर से- सर, इंटरव्यू नहीं देना तो कोई बात नहीं, लेकिन नौकर तो मत बनिए.. आपकी आवाज को तो हजारों-लाखों में पहचाना जाता है.. 
उधर से- (एक जोरदार हंसी और फोन कट..)


सीन 2 
अप्रैल, 1990

निर्माता सत्ती शौरी (अर्जुन कपूर की नानी) की फिल्म फरिश्ते का सेट
मेकअप रुम में विनोद खन्ना-धर्मेंद्र

सवाल- बोलो, क्या चाहिए
पत्रकार- कैमरे पर आप दोनों का इंटरव्यू
धर्मेंद्र- (गुस्से से)- किसने बुलाया.. 
विनोद खन्ना (आंखों से घूरते हुए)- टीवी पर कोई इंटरव्यू नहीं.. 
पत्रकार- सत्ती मैडम ने कहा था आने को
विनोद खन्ना- तो उनका ही इंटरव्यू कर ले ना.. भाग यहां से
धर्मेंद्र- पैग लगाना हो तो कुर्सी लेकर बैठ जा
पत्रकार झेंपकर मेकरुम से बाहर. वापस जाने की तैयारी में
सत्ती शौरी का आगमन
सत्ती शौरी- क्या हुआ बेटा- इंटरव्यू हो गया
पत्रकार- नहीं जी, दोनों ने मना कर दिया और डांटकर भगा दिया
सत्ती शौरी- मेरे साथ आओ... 
सत्ती शौरी मेकरुम में घुसी, बाहर से आवाज सुनाई दी
धरम जी, विनोद जी, उस जर्नलिस्ट को मैंने बुलाया है। आप दोनों के इंटरव्यू के लिए। पांच मिनट में बाहर आइए.. 
बाहर आकर सत्ती पत्रकार से- बेटा कैमरा सेट कर.. अभी दोनों आ जाएंगे.. 
तीन मिनट बाद 
गर्दन लटकाए विनोद खन्ना और धर्मेंद्र मेकअप रुम से बाहर-
धर्मेंद्र- कहां करना है इंटरव्यू
विनोद खन्ना- अरे यार, तू मजाक भी नहीं समझता। हम क्यों मना करेंगे. जब तक चाहे इंटरव्यू कर... (फिर घूर कर).. कोई पर्सनल सवाल मत करना प्यारे... 
लगभग 20 मिनट का इंटरव्यू होने के बाद मेकअप रुम से विनोद खन्ना-धर्मेंद्र का पत्रकार को बुलावा
धर्मेंद्र- अगर कुछ भी उल्टा-सीधा दिखाया, तो देखना फिर...
विनोद खन्ना- (मुस्कराकर) क्यों भाई, प्रोडयूसर को कंप्लेन भी करता है हमारी...  थैंक यू 
धर्मेंद्र- पैग लेना है तो बोल.... (दोनों की जोरदार हंसी)



सीन 3
जनवरी 1997
दूरदर्शन पर  प्रसारित सीरियल महाराणा प्रताप का सेट

सवाल- बड़े फिल्मी सितारे तो टीवी पर आना पसंद नहीं करते। आप इस रोल के लिए कैसे मान गए?
जवाब- मुझे पसंद आया, इसलिए यहां आ गया (जोरदार हंसी)। इसमें प्राब्लम क्या है? मुझे तो कोई बुराई नजर नहीं आती। फिल्में हों या टीवी, आपका काम दर्शकों का मनोरंजन करना है। मैं खुश हूं कि मुझे ये रोल करने का मौका मिला.. 
सवाल- इससे आपके फिल्मी कैरिअर पर कोई असर हुआ तो.. 
जवाब- मैं ये सब कभी नहीं सोचता। जो दिल में आता है, वो करता हूं। डरकर न कभी जीया, न ही कभी ऐसा होगा। दिल की सुनों, हमेशा खुश रहोगे... 


सीन 4 
अप्रैल 2006

मुंबई के अंधेरी स्टेशन के पास में फिल्म रिस्क की शूटिंग
दो घंटे से भी ज्यादा वक्त से विनोद खन्ना के इंटरव्यू का इंतजार
विनोद खन्ना- मुझे अभी निकलना है। गीताजंलि (उनकी पहली पत्नी) अस्पताल में एडमीट है। इंटरव्यू फिर कभी... 
तेजी से अपनी कार की तरफ लपके.. फिर पलटे, इंतजार करने वाले पत्रकार को बुलाया। कुछ सोचने लगे...
विनोद खन्ना- सॉरी.. तुम भी तो यहां काम से ही आए हो। ऐसे वापस जाओगे, तो अच्छा नहीं लगेगा... एक काम करो, कार में साथ चलो, रास्ते में बातचीत हो जाएगी.. कोई परेशानी तो नहीं... 
कार में अंधेरी से दादर तक के बीच सवाल-जवाबों का दौर- 

सवाल- आपको सुपर स्टार का दर्जा कभी नहीं मिला। कभी अफसोस होता है? 
जवाब- मैं ये सब सोचता, तो कभी अपने काम को एंज्वाय नहीं कर पाता। मुझे जो मिला, मैं उससे बहुत खुश हूं
सवाल- एक दौर था, आप अमिताभ बच्चन के लिए सबसे बड़ी चुनौती थे?
जवाब- कैसी चुनौती? अमित बहुत अच्छे कलाकार हैं और दोस्त भी हैं। हमारे बीच ये कभी नहीं हुआ। पब्लिक ने हमारी जोड़ी को पसंद किया। हमें साथ काम करने का मौका मिला। इससे ज्यादा क्या सोचना और क्यों सोचना
सवाल- आप ओशो की तरफ न जाते, तो सुपर स्टार बन जाते
जवाब- न जाते तो पता नहीं क्या होता। मैं अपनी मर्जी से गया और मर्जी से वापस आ गया। मैंने उस फेस को भी एंज्वाय किया और बहुत कुछ सीखा। नहीं जाता, तो शायद अफसोस रह जाता। मैं कोई स्टार बनने नहीं आया था... मैं सिर्फ एक्टिंग करना  चाहता था। जब तक मौका मिलता रहेगा, एक्टिंग करता रहूंगा। बाकी सब दर्शक तय करेंगे। 
सवाल- आपके अफेयर्स?
जवाब- लाइफ को एंज्वाय करना कोई बुरी बात तो नहीं (हौले से मुस्कान)
सवाल- अमिताभ बच्चन राजनीति में असफल होकर वापस आ गए। आप सेंट्रल में मंत्री भी बन गए
जवाब- अमित के साथ क्या हुआ, ये वो जानें। ये कंपेयर का आधार नहीं हो सकता। मुझे राजनीति में जाना अच्छा लगा, सो चला गया। वहां अपनी पार्टी (भाजपा) ने जो जिम्मेदारी दी, वो निभाने की कोशिश की... 
सवाल- कभी राजनीति और फिल्मों में से एक चुनने का मौका हुआ, तो क्या चुनेंगे? 
जवाब- अभी तक तो ऐसा नहीं हुआ। जो नहीं हुआ, उसके लिए क्या सोचना। अगर दोनों में बैलेंस हो सकता है, तो वो करना चाहिए।
आखिरी सवाल- एक एक्टर और स्टार में क्या फर्क होता है
जवाब- मानसिकता का। कैमरे के सामने तो बस एक कैरेक्टर होता है, जिसे ठीक से कर लो। बाकी कोई बात बड़ी नहीं। 
सवाल- कभी रिटायरमेंट की सोचते हैं? 
जवाब- जब जिंदगी रिटायर करेगी, तभी रिटायर होंगे। (जोरदार हंसी)



1 comment:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

इस अदाकार के जीवन के कई पहलुओं को समेटती पोस्ट .... अब यादें ही शेष हैं | नमन

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