Sunday, September 10, 2023

जवान की सफलता का एक सच ये भी..

जवान के रिलीज होने से कुछ दिन पहले लिखे ब्लाग (शाहरुख खान की जवान- नया तीर नया निशान) में साफ तौर पर लिखा गया था कि शाहरुख खान का सुपर स्टारडम जिस मकाम पर पंहुच चुका है, वहां आंकड़ों की बाजीगरी से उनकी फिल्मों का आकलन करना न्यायसंगत नहीं होगा, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि करोड़ों के बजट से बनने वाली उनकी फिल्मों की होने वाली कमाई के आंकड़ों की अहमियत न समझी जाए। 

शाहरुख खान की जवान- नया तीर, नया निशान का लिंक 

https://anujalankar.blogspot.com/2023/09/blog-post.html

तकरीबन 300 करोड़ के बजट में बनी एक फिल्म का दो दिनों में विश्व स्तर पर तकरीबन 250 करोड़ की कमाई का आंकड़ा इतना भी कम नहीं है, जिसे अनदेखा किया जा सके। बात को आगे बढ़ाने से पहले शाहरुख खान और जवान की टीम को बाक्स आफिस पर आंकड़ों के खेल का नया इतिहास रचने के लिए बधाई। वीकंड के बाद  सोमवार को जब चार दिनों के आंकड़े सामने होंगे, तो पता चलेगा कि जवान ने बाक्स आफिस पर कितने रिकार्ड्स बनाए और बिगाड़े हैं। 


बाक्स आफिस के आंकड़ों की बाजीगरी से परे शाहरुख खान की इस फिल्म ने कई मायनों में दर्शकों को चौंकाया है। ये बात इसलिए ज्यादा अहम है कि जनवरी में आई पठान ने भी बाक्स आफिस पर कामयाबी का डंका बजाया, लेकिन ये एक ऐसी कमर्शियल मसालेदार फिल्म मानी गई, जिसमें आम दर्शकों को पसंद आने वाले मसालों की कोई कमी नहीं थी, लेकिन इसका कोई सामाजिक या राजनैतिक सरोकार नहीं था। इस लिहाज से देखा जाए, तो शाहरुख के कैरिअर में स्वदेस और चक दे इंडिया जैसी फिल्में ज्यादा नहीं है, जिनके साथ एक सामाजिक सोच मजबूती के साथ जुड़ी हुई थी। 

जवान से जुड़े इसी फैक्टर ने दर्शकों को सबसे ज्यादा चौंकाया कि इस फिल्म में मनोरंजन के तमाम मसालों के साथ कई सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों को कनेक्ट किया गया। इन मुद्दों का यहां डिटेल में जिक्र करना ठीक इसलिए नहीं होगा कि फिल्म को देखने के दौरान दर्शकों को ये मुद्दे खुद समझ में आ जाएंगे। बड़ी बात ये है कि कमर्शियल फिल्मों का सबसे बड़ा सितारा अपनी कमर्शियल फिल्म में सोशल और राजनैतिक मामलों को डायरेक्ट कनेक्ट कर रहा है। 

2014 के बाद फिल्म इंडस्ट्री में राजनैतिक मुददों को लेकर समझ और समझाने का मतलब ही बदल गया है।  शाहरुख खान और आमिर खान के साथ दिल्ली की राजनैतिक सत्ता के रिश्तों में कभी सहजता नहीं आई। तीसरे खान सलमान खान 2014 से पहले ही इस सत्ता के करीब रहे। ये भी सच है कि इस नजदीकी की वजह से सलमान को अपने कोर्ट के मामलों में बड़ी राहत मिली। 

इतिहास के इन पन्नों से एक बार फिर जवान के सामाजिक और राजनैतिक सरोकार की बात को आगे बढ़ाया जाए, तो यहां एक और रोचक बात सामने आती है कि सोशल मीडिया पर हर बड़ी फिल्म के रिलीज के वक्त बायकॉट बालीवुड का ट्रेंड चलाने वालों को भी ये बात समझ में नहीं आई या इसे सच माना जाए कि जवान के रिलीज के मौके पर दिल्ली में जी20 के आयोजन में जुटे सत्ताधीशों और उनकी जमात को जवान पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं मिली हो। इस तर्क को तो कोई नहीं मानेगा कि अतीत में इस तरह के ट्रेंड फिल्मों की सफलता में योगदान देते हैं, इसलिए इस बार इस हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ। बालीवुड के बायकाट के ट्रेंड को चलाने वाले अगर जरा भी समझदार होते, तो उनको बहुत पहले एहसास हो जाता कि आम दर्शक कभी भी इस तरह के वाहियात प्रपंचों पर ध्यान नहीं देता है। उम्मीद है कि जवान को लेकर आम जनता की स्वीकार्यता को लेकर सोशल मीडिया पर अब कोई ऐसा ट्रेंड नहीं चलेगा, जो जवान से ज्यादा ट्रेंड चलाने वालों की खिसियाहट का सबूत बन जाए। 

सोशल मीडिया के ट्रेंड से अलग जवान के सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है कि जवान ने ये दिखाया है कि किस तरह से एंटरटेनमेंट के मसालों के साथ सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों की बात की जा सकती है। अगर शाहरुख खान चाहते, तो वो इन मुद्दों को जवान से इसी आशंका के चलते हटा सकते थे कि कहीं दिल्ली दरबार का इशारा फिल्म की सफलता पर ग्रहण न लगा दे। 2014 से सत्ता में आए दिल्ली दरबार के आका किसी भी मामले को लेकर विरोध के सुरों से निपटने के लिए तमाम तरह के प्रोपगंडे करने में लग जाते हैं। इस सत्ता ने सिनेमा की दुनिया में भी अपने वैचारिक विरोधियों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। खान सितारों के अलावा नसीरुद्दीन शाह,  प्रकाश राज और स्वरा भास्कर तक तमाम कलाकार  इसके गवाह रहे हैं।

इसमें कोई शक नहीं है कि जवान को राजनैतिक और सामाजिक सरोकारों के साथ जोड़कर शाहरुख खान ने न सिर्फ अपने साहसी होने की मिसाल पेश की है, बल्कि उन लोगों को भी संदेश दिया है, जो ऐसा करने में दिल्ली दरबार की आंखों में किरकिरी बनने से बचे रहना पसंद करते हैं। ऐसा भी न माना जाए कि शाहरुख अपनी आने वाली सारी फिल्मों को अनिवार्य रुप से राजनैतिक और सामाजिक मामलों से जोड़ेंगे। जवान के बाद इसी साल क्रिसमस पर शाहरुख खान की नई फिल्म राजकुमार हीरानी के साथ रिलीज होगी। मुन्नाभाई से लेकर थ्री इडियटस और पीके से लेकर संजू तक सारी फिल्मों में राजू हीरानी ने एलईडी (लाफ्टर, इमोशन, ड्रामा) का अपना एक पैटर्न सेट किया है, जिसमें वे अपनी फिल्मों के सोशल बैकग्राउंड को बहुत मजबूत रखते हैं। उम्मीद की जा सकती है कि शाहरुख खान के साथ उनकी नई फिल्म भी उनके इसी पैटर्न पर होगी। इसमें कोई शक नहीं कि शाहरुख-हीरानी की जोड़ी की फिल्म से उम्मीदों का पहाड़ होगा और शायद किसी को शक होगा कि ये फिल्म बाक्स आफिस पर शाहरुख खान की महाकामयाबी की हैट्रिक लगाएगी। 

जवान की सफलता को लेकर एक और अहम बात सामने आती है, जो इसको सलमान खान से जोड़ती है। लगातार फ्लाप फिल्मों से हताश सलमान खान के लिए साउथ के रीमेक के तौर पर आई फिल्म रेड्डी ने कामयाबी के ट्रैक पर उनकी वापसी करा दी और फिर इसी ट्रैक पर सलमान ने बाडीगार्ड और दूसरी रीमेक फिल्मों की लाइन लगा दी। बजरंगी भाईजान को अपवाद मानें, तो साउथ की फिल्मों के रीमेक ने सलमान को शुरुआत में सफलता जरुर दिलाई, लेकिन सेंसबल फिल्मों की दुनिया से उनको दूर कर दिया। हाल ही में राधे और किसी का भाई, किसी की जान के बाक्स आफिस रिजल्ट सलमान की रीमेक स्टोरी की नाकामयाबी को दोहराती रहीं। जवान में शाहरुख खान ने साउथ की लाइन पकड़ी है। वे साउथ के सितारों और डायरेक्टरों को साथ लेकर फिल्में जरुर बनाएं, लेकिन सिर्फ रीमेक की पटरी पर दौड़े, तो उनको भी सलमान जैसा ही अनुभव होगा। 

जवान आने वाले वक्त में बाक्स आफिस पर कामयाबी के नए इतिहास रचती रहेगी और शाहरुख खान के सुपर स्टारडम का डंका बजता रहेगा। जवान में राजनैतिक और सामाजिक मुद्दों की मौजूदगी इस फिल्म की सफलता का ऐसा सच है, जिसने इस सफलता में चार चांद लगा दिए। 


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https://anujalankar.blogspot.com/2023/08/2.html

https://anujalankar.blogspot.com/2023/05/blog-post.html

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1 comment:

Anonymous said...

शाहरुख पर बेहतरीन समीक्षा लिखी आपने

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