Saturday, June 24, 2017

ट्यूबलाइट जलेगी तो जरुर, मगर.....?




ट्यूब लाइट रिलीज हुई और सलमान खान के चाहने वालों के लिए ईद से पहले ईद हो गई। ये कई सालों से चली आ रही रस्म है, जब ईद के मौके पर सलमान की फिल्में रिलीज होती हैं और हिट भी हो जाती हैं। इसे लेकर बहस की गुंजाइश नहीं बचती। मीडिया में तो ट्यूब लाइट को स्विच आफ करार दे दिया गया। इससे सलमान के करोड़ों फैंस को शायद ही कोई फर्क पड़े। सोमवार को ईद मनाई जाएगी, तो इस फिल्म की कमाई के आंकड़ों की रफ्तार तेज होगी। 4300 से ज्यादा थिएटरों पर रिलीज हुई ये फिल्म आंकड़ों की कमाई में तो नुकसान का सौदा नहीं साबित होगी, मगर.....

इस मगर के साथ ये सवाल जुड़ता है कि क्या ट्यूब लाइट उम्मीदों पर खरी उतरती है? और अगर ये जवाब ना में सामने आता है, तो इसके कारण भी होंगे, जो कुछ परदे पर नजर आए और कुछ का ताल्लुक परदे के पीछे रहा। ट्यूब लाइट के निर्देशक कबीर खान और सलमान खान को ये समझना मुश्किल नहीं रहा होगा कि बजरंगी भाईजान के बाद वे ट्यूब लाइट लेकर आएंगे, तो दोनों फिल्मों में तुलना होगी। कबीर के साथ सलमान ने 2012 में पहली फिल्म एक था टाइगर की थी और इसके तीन साल के गैप के बाद बजरंगी 2015 में आई थी। बजरंगी के साथ ट्यूब लाइट की तुलना के और भी कारण बन जाते हैं। बजरंगी की तरह ट्यूब लाइट में सलमान एक भोलेभाले किरदार में है, जो सिर्फ अपने दिल की बात को मानता है। बजरंगी मे सलमान का किरदार एक बच्ची को घर छोड़ने के लिए सीमा पार जाता है। यहां मिशन चीन के साथ लडाई में गए अपने भाई को वापस लाने का है। बजरंगी में पवन के साथ एक बच्ची जुडती है, तो ट्यूब लाइट में लगभग उसी उम्र का बच्चा जुड़ता है। ये बात भी कम अहम नहीं हो जाती कि बजरंगी जैसा किरदार सलमान ने पहली बार किया था, जिसको हर किसी ने पसंद किया। यहां न चाहते हुए भी अगर ट्यूब लाइट से उसकी तुलना होती है, तो इसके लिए सलमान और कबीर खान की जोड़ी ही ज्यादा जिम्मेदार है। फिर भी ये तर्क माना जा सकता है कि दो फिल्मों और उनके किरदारों की तुलना न्यायसंगत न हो, मगर.....




इस मगर की गाथा को और आगे लिए चलते हैं। बात कबीर खान की करते हैं, जो इन दोनों फिल्मों के निर्देशक रहे हैं। ट्यूब लाइट का तो लेखन भी कबीर ने ही किया है और इसे ही फिल्म की बड़ी कमजोरी माना जा रहा है। क्या कबीर खान नहीं जानते थे कि सलमान के किरदार का भोलापन, पहले बच्ची और अब बच्चे से लगाव दोनों फिल्मों की तुलना का आधार बन जाएंगे। यहां तक कि फिल्म के गानों की धुनें और उनका फिल्मांकन भी जब बजरंगी की याद दिलाता है, तो इसके लिए देखने वाले तो कसूरवार नहीं हो सकते। कबीर खान ने अगर एक था टाइगर के किरदार से बजरंगी के किरदार को बिल्कुल अलग रखा था, तो बजरंगी से ट्यूब लाइट के किरदार को अलग रखने की जिम्मेदारी भी उन पर ही थी, जिसे समझने में वे नाकाम रहे।

बजरंगी और ट्यूब लाइट के निर्माण के दौरान परदे के पीछे भी तमाम ऐसी बातें हुईं, जो ट्यूब लाइट की निराशा के साथ जुड़ जाती हैं। एक था टाइगर की सिक्वल (टाइगर जिंदा है) का निर्देशन सुलतान वाले अली अब्बास जाफर को मिलना भी कम अहम बात नहीं थी। इस खबर ने कबीर और सलमान के बीच बढ़ते मनमुटाव की खबरों को हवा दी। आम तौर पर सिक्वल का निर्देशन पहली फिल्म के निर्देशक को ही मिलता है। ट्यूब लाइट के शुरु होने से पहले जब एक था टाइगर की सिक्वल की खबर पहली बार चर्चा में आई थी, तो बजरंगी भाईजान के बाद अपनी अगली फिल्म फैंटम (सैफ अली खान-कैटरीना कैफ) के प्रमोशन के दौरान कबीर खान संकेत दे रहे थे कि सिक्वल वही बनाएंगे। मगर ट्यूब लाइट की शुरुआत होने के बाद एक था टाइगर की सिक्वल का मामला खबरों में लौटा, तो कबीर खान का पत्ता कट चुका था। यहां तक कि ट्यूब लाइट के पहले शेड्यूल के दौरान सलमान और कबीर खान के बीच मतभेदों के संगीन होने की खबरों के बीच ये हवा भी हो गई थी कि सलमान कबीर की जगह ट्यूब लाइट को पूरा करने की जिम्मेदारी अली अब्बास जाफर को सौंपना चाहते हैं। चर्चा रही कि सलमान के पापा सलीम की दखल अंदाजी से मामला सुलझा और कबीर खान ही फिल्म के निर्देशक बने रहे, लेकिन कबीर और सलमान के बीच लड़ाई की खबरों का आना जारी रहा। सोचना और समझना मुश्किल नहीं होता कि जब किसी फिल्म के बीच डायरेक्टर और हीरो के बीच लड़ाईयां बढ़ जाएं, तो इसका बुरा असर फिल्म पर होता है और यहां से बस किसी तरह से फिल्म को पूरा करने की औपचारिकता मात्र रह जाती है। इसे भी संयोग नहीं माना जा सकता कि ट्यूब लाइट की शूटिंग पूरी होने के फौरन बाद से कबीर खान की अगली फिल्म के लिए रितिक रोशन के नाम की चर्चा होने लगी। इसका ये भी मतलब लगाया गया कि अब कबीर खान और सलमान किसी फिल्म में साथ नहीं होगे। सलमान की आने वाली फिल्मों की लिस्ट भी इसी बात का इशारा करती है। कबीर खान भी इसे लेकर चुप हो जाते हैं, मगर....

मगर की इस गाथा के तीसरे पड़ाव पर नजर आते हैं सोहेल खान, जिनको ट्यूब लाइट की एक कमजोर कड़ी माना जा रहा है। सोहेल को सलमान ने अगर सिर्फ इसलिए अपने भाई का रोल दिया कि वे सगे भाई है, तो कहा जा सकता है कि सलमान की ये भाईगिरी फिल्म को भारी पड़ी। सोहेल खान ने बतौर एक्टर पहले भी बहुत कोशिश की है और पब्लिक ने ही उनकी फिल्मों को खारिज कर दिया है। कौन भूल सकता है कि वांटेड से शुरु हुई सलमान की कामयाबी के दौर में इकलौती बड़ी नाकामयाबी जय हो रही, जिसका निर्देशन सोहेल खान ने किया था। सोहेल के लिए इससे पहले सलमान ने किसान भी बनाई थी, उसमें बतौर कलाकार और बतौर निर्देशक सोहेल खान दोनों रुप में फेल हुए थे। भाई के साथ ऐसा लगाव हैरान नहीं करता, लेकिन फिल्म की वाट लगती है, तो ये बड़ा मुद्दा बन जाता है, जिसे सलमान तो मानने से रहे, मगर.....


अगर-मगर के इस खेल के अगले मोहरे बने शाहरुख खान, जिनका ट्यूब लाइट में गेस्ट एपीरिएंस है। ये समझना मुश्किल नहीं कि सलमान के साथ दोस्ती के टूटे रिश्तों के फिर से जुड़ने के बाद शाहरुख इस फिल्म का हिस्सा बने। दो दिग्गज खान सितारों की कैमिस्ट्री को लेकर जो उम्मीदें की जा रही थीं, इस मामले में भी ट्यूब लाइट फुस्स हो गई।
फिल्म में शाहरुख खान की मौजूदगी असरदार नहीं रही। दोनो के फिर से दोस्त बन जाने के बाद  पहली बार  दोनों के एक साथ बड़े परदे पर आने को लेकर उम्मीदें तो बहुत थीं, मगर....

मगर की अगली कड़ी में खुद सलमान के किरदार की कमजोरियां हैं। सलमान बहुत गंभीर किस्म के एक्टर नहीं माने जाते। सलमान स्टाइलिश स्टार हैं, जो परदे पर एक्शन करता है, तो पब्लिक खुशी से ताली बजाकर झूमती है। वे रोमांस करते हैं, तो कन्याओं के दिलों की धड़कन बढ़ जाती है। एक था टाइगर में कैटरीना हों या बजरंगी में करीना हों, सलमान रोमांस का रंग जमाने में मास्टर माने जाते हैं।

ट्यूब लाइट में इन दोनों ही मामलों में वे कमजोर हैं। एक्शन करने की बारी आती है, तो वे एक अदने से किरदार से थप्पड़ खाते रहते हैं, जो उनके फैंस को कभी हजम नहीं होगा और रोमांस करने के लिए इस बार कोई स्कोप ही नहीं दिया गया। चीनी अभिनेत्री जु जू अपने बेटे के साथ हैं, जिनका सलमान के साथ कोई रोमांटिक एंगल नहीं है।
एक्शन का चैंपियन एक के बदले चार थप्पड़ मारे और अपने पति को खो चुकी चीनी अभिनेत्री से रोमांस का रिश्ता जमाता, तो भी बात जम जाती, मगर....

मगर के आखिरी पड़ाव में जिक्र होगा उनकी शर्ट का, जो ट्यूब लाइट में उनके शरीर पर ही जमी रही। बजरंगी भाईजान में पाकिस्तानी जेल में वे जब उस एक शाट में बिना शर्ट के नजर आते हैं, तो ही थिएटर सीटियों से गूंज उठा था।
ट्यूब लाइट में तो उनकी शर्ट भी ऐसी, जिसके बटन गले तक बंद रहे। सलमान की इस शर्ट लैस अदा पर कुवांरियों के दिल धड़कते हैं, तो उनकी मसल देखकर उनके फैंस अपने सिंगल पसली होने का गम भूल जाते हैं।
ट्यूब लाइट में सलमान ने एक सीन में भी शर्ट को निकाल फेंका होता, तो कुछ बात बन सकती थी, मगर....

अगर-मगर  की इस गाथा से ट्यूब लाइट की बाक्स आफिस पर होने वाली कमाई पर कोई असर नहीं होगा। शाय बजंरगी भाईजान जैसी लाजवाब फिल्म न आई होती, तो सलमान की फार्मूला फिल्मों की सफलता के इतिहास में ट्यूब लाइट भी कहीं न कहीं फिट हो जाती। ट्यूब लाइट ने उन लोगों को ज्यादा निराश किया, जो बजरंगी भाईजान के बाद इस जोड़ी से एक और बेहतर फिल्म की उम्मीद कर रहे थे। ट्यूब लाइट जलेगी, जरुर जलेगी, मगर....


एक अच्छी फिल्म की कसौटी पर निराश करने वाली ट्यूब लाइट यहां आकर अटक जाती है कि फ्यूज बल्ब हो या ट्यूब लाइट,,, जल जा जल जा सुनकर दिल को ही जलाती है और अगर-मगर की गाथा भी इस मायूसी के सामने फीकी पड़ जाती है। इस ईद की बात तो मुकम्मल हो गई, अगले साल फिर से ईद होगी। फिर से भाई अपनी फिल्म से ईदी देंगे, मगर.......


1 comment:

Anonymous said...

Very well analysed. Sir. Very apt.
Paresh B Mehta.

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