Saturday, June 3, 2017

बालीवुड और हालीवुड में कामयाबी का बुनियादी फर्क


चमत्कार हमारे देश में होते रहते हैं और हमारी फिल्मी दुनिया में भी। चमत्कार को अमूमन तब नमस्कार किया जाता है, जब किसी को अप्रत्याशित कामयाबी मिले। ये मामला उल्ट समझा जा सकता है। उम्मीदों के टूटने को चमत्कार कहना शायद सही न हो, लेकिन चमत्कार कहने से ये बात जल्दी समझ में आएगी, जिसके एक छोर पर दीपिका पादुकोण और दूसरे छोर पर प्रियंका चोपड़ा और ठीक बीच में वो एक शब्द, जिसने इन दोनों देसी देवियों के अरमानों का जनाजा निकाल दिया। इस शब्द को हालीवुड की दुनिया कहा जाता है।

बालीवुड में स्टारडम को जीने के बाद प्रियंका और दीपिका ने जब हालीवुड का रुख करने का फैसला किया, तो इन दो फैसलों की वजह अलग अलग मानी गई। कौन जानता था कि अलग अलग वक्त पर रिलीज हुईं उनकी हालीवुड की पहली फिल्मों के नतीजे दोनों को एक ही कश्ती का सवार बना देगा। हमारी देसी जनता ने अपनी देसी देवियों की इन विदेशी फिल्मों को क्यों खारिज कर दिया, ये कहीं से भी न तो शोध का मामला बैठता है और न ही चौंकाने वाला लगता है। अगर दोनों में से किसी भी फिल्म को कामयाबी मिल जाती, तो मुमकिन था कि इसे चमत्कार ही मान लिया जाता।

शब्दों की बाजीगरी से थोड़ा आगे जाकर अगर बात को सीधे तौर पर समझने की कोशिश करें, तो मामला बेहद सपाट है। दीपिका और प्रियंका की फिल्मों में कामन बात ये रही कि दोनों को कमजोर रोल मिले और सिवाय एक्सपोजर के दोनों को कुछ खास करने को नहीं मिला। ये बात भी उन लोगों को कतई नहीं चौंकाती, जो बालीवुड और हालीवुड के बुनियादी अंतर को मानते हैं। अंतर बहुत साफ है। बालीवुड की फिल्में हमारे परिवेश में बनती हैं और हालीवुड की फिल्में वहां के परिवेश में। हालीवुड में भारतीय कलाकारों को भारतीय किरदारों में ही काम मिल सकता है और वहां की फिल्मों में भारतीय किरदार बहुत ज्यादा नहीं होते। अगर दीपिका या प्रियंका ये मानकर हालीवुड गई थीं कि वो दुनिया उनके बालीवुड के स्टारडम से प्रभावित हो सकती है, तो ये गलतफहमी आज इन दोनों की फिल्मों की नाकामयाबी के साथ सामने आ चुकी है। हमारी फिल्मों में भी कभी कबार कोई अंग्रेज या कोई विदेशी किरदार होता है, तो हम उनको कितनी अहमियत देते हैं? बाब क्रिस्टो (आस्ट्रेलियाई कलाकार)  जिंदगी भर हमारी फिल्मों में जूनियर कलाकार के रोल करते रहे।

इसका मतलब ये नहीं कि पूरा मामला ही निराश करने वाला रहा हो। हालीवुड में हमारे कई कलाकारों ने अपनी जगह बनाई है और अच्छा काम किया है। इरफान से लेकर नसीरुद्दीन शाह, अनुपम खेर और दिवंगत ओमपुरी ने हालीवुड की फिल्मों में अपना रुतबा कायम किया और कामयाबी तथा सम्मान दोनों को हासिल किया, जो कम बड़ी बात नहीं कही जा सकती। कुछ दिनों पहले ही आस्कर के मंच से ओमपुरी को जिस तरह से याद किया, वो भारतीय कलाकार के तौर पर ओमपुरी का सम्मान है।

हालीवुड जाने की बात सोचने में कोई बुराई नहीं है। बड़ी बात ये है कि हमारे कलाकार क्या सोचकर वहां जाते हैं।प्रियंका और दीपिका के मामलों में सबसे बड़ी कमजोरी ये रही कि ये दोनों इस सोच के साथ वहां पंहुची कि वे बालीवुड की बड़ी स्टार हैं, तो उनके स्टारडम पर मंत्रमुग्ध होकर वहां उनको बड़ी फिल्मों में मजबूत रोल मिलेंगे। ये खोखलापन इन दोनों को भारी पड़ा। अगर हालीवुड को ग्लैमर के पीछे भागना हो, तो वहां ऐसी सुंदरता की कमी नहीं, जो उनकी फिल्मों की जरुरत को आसानी से पूरा कर सकती हैं। उनको अपनी फिल्मों के लिए भारतीय सुंदरता की जरुरत नहीं होती।

कहते हैं कि वक्त से बड़ा सबक कोई नहीं होता। दीपिका और प्रियंका के पास भी अपनी अपनी गलतियों से सबक सीखने का मौका है। बालीवुड ने उनको स्टार बनाया। भारतीय जनता ने उनको स्टारडम दिया। प्रियंका और दीपिका सिर्फ सुंदर नहीं, अभिनय के मामले में भी वे अपनी काबिलियत को साबित कर चुकी हैं। हालीवुड कभी भी उनकी क्षमताओं का पैमाना न था, न ही हो सकता है। वक्त का तकाजा तो यही है कि बालीवुड का इंटरनेशनल फेस बनने की ललक की हकीकत को पहचानकर अगर ये दोनों अपनी अपनी हालीवुड की फिल्मों के नतीजों के प्रति ईमानदारी से सोचें, तो जवाब बहुत सहज रहेगा कि कहीं जाने की जरुरत नहीं है।

ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में कमर्शियल सिनेमा के बाजार के विस्तार में अगर हालीवुड की दुनिया हमारी दुनिया का हिस्सा बनना चाहती है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आखिरकार दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाली भारतीय फिल्म इंडस्ट्री मौजूदा वक्त में इतनी मजबूत तो बन चुकी है कि हालीवुड को अपनी शर्तों पर यहां कारोबार करने का मौका दे। इन शर्तों में पहली और एकमात्र शर्त यही हो सकती है कि हमारे कलाकारों के सम्मान और काबिलियत को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। अगर हम अपने रुख को लेकर स्पष्ट और मजबूती से खड़े रहें, तो हालीवुड को हमारी शर्तों पर काम करना होगा।
प्रियंका और दीपिका की फिल्मों का नतीजा अगर किसी को नहीं चौंकाता, तो इसलिए कि ये होना ही था। बहुत ज्यादा मायूसी की जगह अगर हकीकत के ठोस धरातल को पहचान कर दीपिका और प्रियंका पहले बालीवुड की उस जमीन को मजबूत करें, जिनके बूते वे स्टारडम के शिखर पर पंहुची हैं, तो आने वाले कल में मुमकिन है कि हालीवुड का पेशेवर बाजार उनके साथ हमारी दुनिया, हमारी जमीन पर हमारी शर्तों के साथ काम करे और वो दिन जब आएगा, तो चमत्कार को नमस्कार करने की जरुरत नहीं होगी।

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