Tuesday, September 12, 2017

हैलो सिमरन....



सिमरन, तुम परदे पर आने के लिए तैयार हो। हंसल मेहता के निर्देशन ने और फिल्म की अतिरिक्त लेखिका  के लेखन ने तुमको किस रुप में ढाला है, ये समझने और समझाने का वक्त अब बहुत दूर नहीं बचा है।


सिमरन, तुमको ये तो एहसास होगा कि तुमको कैमरे के सामने और पीछे तुमको सिमरन बनाने में कितनी मेहनत की गई, लेकिन क्या तुम जानती हो, रिलीज से पहले तुम्हारे नाम पर प्रचार के लिए किस कदर मेहनत की गई?

सिमरन, तुम्हारे साथ न तो किसी खान सितारे का नाम था और न किसी बड़े कारपोरेट घराने का नाम था, वरना तुम्हारे प्रमोशन पर लाखों-करोड़ो का बजट बनाता और शहर-दर-शहर और सीरियलों-गेम शोज और न जाने कहां कहां विचरण करने की रस्मों को निभाया जाता।

सिमरन, तुम जैसे छोटे किरदारों के साथ बनने वाली फिल्मों को प्रमोशन के लिए भी अलग रास्ते खोजने पड़ते हैं। इन रास्तों पर ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ता। बस एक कोई मीडिया हाउस की अदालत हो, जहां एक पत्रकार जज की कुर्सी संभालें और दूसरे पत्रकार उन सवालों के बम फोड़ें, जिनसे इस कोर्ट में तालियां बजानेवाले और टीआरपी के गेम में माल बंटोरने का मामला फिट हो जाए।

सिमरन, रही बात तुम्हारी, तो तुम्हारा इस चैनल की अदालत से क्या लेना-देना। यहां तो उन किस्सों की कब्र खोदनी थी, जिनसे टीआरपी के खेल होते हैं। उस अदालत में कहीं सिमरन के किरदार का जिक्र भी हो तो याद करना और याद दिलाना...

सिमरन, तुमको फिर भी इस चैनल की कोर्ट का अभारी होना चाहिए, जिसने विवादों के पिटारे खोलकर दूसरे मीडियावालों को नींद से जगा दिया और उन मीडिया वालों को भी थैंक यू, जिन्होंने याद रखा कि सिमरन एक फिल्म का भी नाम है, जो अब रिलीज होने वाली है।

सिमरन, शुक्र मनाओ कि इन मीडिया वालों की बदौलत प्रेमकथाओं की गाथाओं के साथ तुम्हारा प्रचार तो हो गया.... और सोचो कि अगर ये प्रेम के अधूरे किस्से न होते, तो तुम्हारा प्रचार कैसे होता... कौन देता तुमको अहमियत...

सिमरन, तुमको कंफ्यूज होने की कोई जरुरत नही कि प्रचार की जरुरत तुमको थी या इस चैनल पर लक्ष्मीबाई घोषित की जा चुकी एक ऐसी बेबाक अदाकारा को, जिसने कभी किसी के साथ गलत नही किया और कभी किसी ने उसके साथ कुछ सही होने नहीं दिया।

सिमरन, तुम तो सोच भी नहीं सकती हो, जब एक स्ट्रलगर लड़की, जिसका फिल्म लाइन में अपना कोई गॉड फादर नहीं होता, तो उसे कैसे अपनी उम्र से छोटी लड़की के पापा से अफेयर करना कितना जरुरी हो जाता है, ताकि उसकी उंगली थामकर अपने कैरिअर को आगे बढ़ाने का रास्ता खोजा जाए। उसके दिए हुए मकान मे रहने से लेकर उसकी पत्नी के महंगे गिफ्ट कबूलने में क्या लिहाज। दुनिया भर में उत्पात मचाने वाला सितारा मुंबई पुलिस की लता़ड़ से सहमकर भीरू न बनता, तो सोचो, न जाने क्या क्या जुल्म करता...

सिमरन, तुमको एहसास भी नहीं होगा कि एक गैर फिल्मी परिवार से आई लड़की को फिल्म इंडस्ट्री में क्या क्या करना पड़ता है। अफेयर नंबर वन के बाद एक टीवी के सितारे के बेेटे से  अफेयर नंबर टू में भी कोई बुराई नहीं। अफेयर के बाद भी वो स्टार नहीं बना, तो उसे झटकने की समझदारी भी जरुरी हो जाती है। किसी फ्लाप हीरो को अपने साथ लटकाने में कोई फायदा नहीं, ये समझने के लिए फिल्मी या गैर फिल्मी परिवार से होने की अनिवार्यता नहीं होती।

सिमरन, अब ये सुनकर प्लीज, आंखे मत फाड़ो कि दो-दो रिलेशनशिप के बुरे नतीजों के बाद एक नई ट्राई करने में कानूनन मनाही नहीं है। हीरो बड़ा स्टार हो और ये भी शादीशुदा हो (हाय री किस्मत), बाल बच्चों वाला हो और मोबाइल के इस जमाने में ईमेल-ईमेल का खेल खेले, तो क्या हुआ... डूबते को तिनके का सहारा वाली कहावत नहीं सुनी क्या. ये तो तिनका नहीं, पूरा जहाज था... अफेयर के बदले फिल्म में काम देता रहा.. बर्थ डे पार्टी में  फ्लोर पर लोटपोट कर नागिन डांस करता रहा....एक और फिल्म में कास्ट किया... फिल्म नहीं चली, तो सालों बाद फिर एक नई फिल्म में कास्ट किया...और एक दिन दुनिया को पता चलता है कि वो सिली एक्स है....

सिमरन, क्या बताएं इस सत्यानासी फिल्म इंडस्ट्री का, जहां बिगड़े बाप के बिगड़ैल बेेटे अक्सर अपने स्टारडम के नशे में मासूम लड़कियों के साथ प्यार के नाम पर खेल खेलते हैं... गैर फिल्मी परिवार से आई लड़कियां तो आसानी से उनके जाल में फंस जाती है और फिर वो स्टार उनके प्यार को बदनाम करता है और रास्ता भी बदल लेता है... डियर सिमरन, ये किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, ये एक सत्यकथा है, जिसे सुनकर किसी को भी सहानुभूति तो होगी ना...
     
सिमरन, क्या तुम नहीं जानती हो कि महिला आयोग बिकाऊ होता है... यहां कि महिलाएं फिल्म इंडस्ट्री के बड़े लोगों से दोस्ती के चलते एक जरुरतमंद लड़की की मदद नहीं करतीं... (छि) .... लेकिन जब सवाल होता है कि क्या महिला आयोग में कोई लिखित में शिकायत की गई, तो मामला आंय बांय शांय.. हो जाता है। मोहरतमा गैर फिल्मी परिवार की थीं, इसलिए इल्म नहीं होगा कि महिला आयोग कोई टीवी की अदालत नहीं होती, जहां सिर्फ लफ्फाजी से सब कुछ फिट हो जाए। आयोग में लिखित में शिकायत और सबूत जमा कराने पड़ते हैं... ताकि आयोग एक्शन ले सके...

सिमरन, तुमको फरवरी याद होगा, जब एक बड़ी फिल्म रिलीज होने वाली थी और इसके लिए बड़े सामान्य तरीके से मीडिया के साथ प्रमोशनल इंटरव्यू हुए और बड़ी सहजता के साथ मीडिया को बताया गया था कि अतीत को भूलकर अब आगे बढ़ने का वक्त आ गया है। बुरा बस ये हुआ कि बाक्स आफिस पर बेरंगी हुई फिल्म ने सत्यानाश कर दिया। 

सिमरन, तुमको अप्रैल की याद तो होगी।। जब गंगा घाट किनारे मीडिया के हुजूम के सामने एक भव्य फिल्म का मुहूर्त हुआ था और उस मौके पर भी सिली एक्स की बातों को अनदेखा किया गया था। सिमरन, कुछ तो याद रखा करो.. 

सिमरन, अब तो तुमको समझ में आ गया होगा कि फिल्मी परदे के लिए कहानी और किरदार गढ़ना कितना आसान होता है, लेकिन उसके लिए प्रमोशन करना कितना मुश्किल होता है। कितना कुछ कहना पड़ता है। कितना कुछ करना पड़ता है। ये सब करना पड़ता है सिमरन... 

सिमरन, बस और दो-तीन दिन की बात है। फिर तुमको भूलना होगा कि कौन सी अदालत, कौन से शर्मा जी, कौन महिला आयोग, कौन स्टार, कौन मुंबई पुलिस और कैसा ईमेल का फंडा.... बोला न करना पडता है। बोलना पड़ता है। 

सिमरन, ये फिल्म इंडस्ट्री है, जहां हर फ्राइ डे को सितारों की तकदीरें तय होती हैं। किसी सितारे की टेंशन तो तुम नही समझोगी, जिसकी पिछली फिल्म को बाक्स आफिस पर बुरी तरह से मार खानी पड़ी हो, तो कितना मुश्किल हो जाता है। 

सिमरन, तुम महज एक किरदार हो ना, बस किरदार ही रहो। किसी हीरोइन की जिंदगी का असली किरदार बनने की कोशिश मत करना... वरना न जाने क्या क्या पता चले कि जगमग दुनिया में रिश्तों के नाम पर रि्ते अक्सर स्याहा हो जाते हैं...

सिमरन, परदे पर आओ और छा जाओ.. तुम्हारे लिए हर तरह से मेहनत की गई है। अब वक्त है कि एक बड़ी स्टार के साथ होने वाले अन्याय की गाथाएं सुनकर हिंदुस्तान और दुनिया के दर्शक सिमरन देखें और ये साबित कर दें कि सहानुभूति का एक फिल्म के प्रमोशन से कोई वास्ता नहीं होता.... वो तो बस यूं ही...

सिमरन, बरसों पहले भी एक सिमरन आई थी फिल्मी परदे पर। वो फिल्म नहीं, एक किरदार का नाम था। न कोई विवाद, न रिश्तों की प्रेम कहानियां। सिमरन आई और दर्शकों के दिलों में बस गई और ऐसी बसी कि अब तक बसी हुई है। उस सिमरन को याद करके इस सिमरन का मामला बिगाड़ने की जरुरत नहीं।

सिमरन, तुम्हारा खेल अगले दो-तीन दिनों में पूरा हो जाएगा। कान करीब लाओ, तो एक राज की बात अभी से बता देते हैं। तुम्हारी किस्मत की लाटरी का मामला फिट हो गया, तो ठीक वरना...अगले साल अप्रैल में एक नए अंदाज में तुम्हारे दीदार होना तय है.... 

शु्क्रिया सिमरन, सिनेमा, स्टारडम, प्यार, अफेयर, मैरिड मैन से अफेयर और सिली एक्स की वो बातें, जो न जाने किस खुराफाती फिल्म वाले को एक और सिमरन की कहानी बनाने का मसाला थमा दे... ऐसा होगा क्या? 

कृप्या ध्यान दें- 
इससे पहले सिमरन के नाम पर हुई धींगामुश्ती को लेकर लिखे ब्लाग को पढकर इस किस्से का एक दूसरा पहलू समझा जा सकता है-

कंगना एक, जंग अनेक
http://anujalankar.blogspot.in/2017/09/blog-post.html









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