Tuesday, May 16, 2023

आर्यन, यू टर्न, नो टेंशन



पहली नजर में ये मामला शाहरुख खान और उनके बेटे आर्यन के साथ नर्गिसी न्याय का मामला माना जा रहा है। Narcotics Control Bureau के समीर वानखेड़े के खिलाफ सीबीआई का एक्शन पहली नजर में आर्यन के साथ हुई नाइंसाफी का बदला कहा जा रहा है, क्योंकि सीबीआई ने आर्यन वाले मामले में वानखेड़े के खिलाफ 25 करोड़ की रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया है। सीबीआई की चार्जशीट कहती है कि वानखेड़े ने अपने लोगों के मार्फत आर्यन को ड्रग्स के मामले से निजात दिलाने के एवज में 25 करोड़ की रिश्वत का जाल तैयार किया था। चार्जशीट में ये बात साफ नहीं है कि वानखेड़े और उनके लोगों को कितनी रिश्वत मिली। मीडिया के मुताबिक, 25 करोड़ मांगे गए, 18 करोड़ में मामला सैटेल हुआ था और एडवांस के तौर पर 50 लाख की रकम दी गई थी, जिसे मीडिया के बकौल शाहरुख खान की मैनेजर पूजा ने वानखेड़े के दोस्तों को दिया था। इससे आगे क्या हुआ, इसे लेकर सीबीआई की चार्जशीट में साफगोई नहीं है। 

आर्यन खान के केस को समझना कभी किसी के लिए भी मुश्किल नहीं था। एनसीबी की मुंबई टीम के बॉस समीर वानखेड़े और उनके गैरकानूनी साथियों की टीम ने आर्यन को सिर्फ इसलिए शिकार बनाया था, क्योंकि आर्यन के दमदार रसूख रखने वाले परिवार अक्सर अपने बच्चों की खातिर महंगी फिरौती देने में वसूली नहीं करते। वानखेड़े के गैरकानूनी दोस्तों को आर्यन जैसे शिकार तलाशने में ज्यादा मशक्कत करने की जरुरत नहीं होती। ज्यादातर ऐसे मामलों का सच कभी सामने नहीं आता। आर्यन खान वाले मामले में अगर माना जाए कि वानखेड़े एंड टीम 25 करोड़ की रकम चाहते थे, तो किसी को इसमें कोई शक-सुबहा नहीं हो सकता कि ये रकम देने में शाहरुख खान को कुछ सोचना नहीं पड़ता। सवाल ये बना रहा कि आर्यन का मामला पेंचीदा कैसे हुआ। क्या ये सिर्फ उस किरण गोसावी की उस हरकत के चलते हुआ, जिसने एनसीबी के दफ्तर में बैठाए गए आर्यन के साथ सेल्फी सोशल मीडिया में डालकर अपना रुतबा दिखाने का शौक पूरा किया और इस हरकत ने वानखेड़े का गेम बिगाड़ दिया। मामला शाहरुख खान के इकलौते बेटे का था और सियासती गलियारों में हर कोई जानता है कि मोदी की सियासत में कभी शाहरुख खान उनकी शतरंज की बिसात पर कहीं से भी फिट नहीं हुए। इस वजह से भाजपा और उसके समर्थित हिंदुत्ववादी दलों ने शाहरुख खान को हमेशा निशाने पर रखा। वानखेड़े के अनाड़ी दोस्त गोसावी की हरकत की बदौलत सोशल मीडिया पर आर्यन खान की वायरल हुई तस्वीर ने एक तरफ मीडिया में हंगामा मचाया, तो दूसरी तरफ शाहरुख से चिढ़ने वाला मोदी समर्थित भाजपा के हिंदुत्ववादी दलों को भी एक मौका दे दिया। वानखेड़े को जब तक कुछ समझ में आता, मामला उनके हाथ से निकलकर दिल्ली दरबार में पंहुच चुका था, जहां तमाम एक्सपर्ट गौर करने लगे कि बेटे के नाम पर शाहरुख खान के खिलाफ कैसे एक नया कैंपेन शुरु किया जाए। जाहिर था कि इस कैंपेन को नोएडा के गिद्ध जैसे गोदी मीडिया के न्यूज चैनलों का पूरा समर्थन मिला हुआ था। नोएडा के चैनलों से लेकर सोशल मीडिया पर शाहरुख खान और उनके बेटे की नशे की लत से लेकर वानखेड़े को सिंहम जैसा ईमानदार अफसर प्रोजेक्ट करने की सारी कवायदें एक साथ शुरु हुईं। भला हो शाहरुख खान का, जिन्होंने अपने बेटे के नाजुक मामले को लेकर अपना संयम नहीं खोया। यहां तक कि एक महीने बाद आर्यन के जेल से बाहर आने को लेकर शाहरुख खान ने इस पूरे मामले को लेकर कभी कोई ऐसा कमेंट नहीं किया, जिसके इंतजार में नोएडा वाला गोदी मीडिया अरसे से लालायित हुआ बैठा था। 
वानखेड़े के प्लान को बर्बाद करने वाली सेल्फी 

समीर वानखेड़े की फजीहत की कहानी आर्यन के मामले से कहीं ज्यादा शरद पवार की पार्टी के दमदार नेता नवाब मलिक ने आगे बढ़ाई, जिन्होंने अपने घर पर तकरीबन रोज मीडिया वालों को बुलाकर वानखेड़े के खिलाफ ब्रेकिंग न्यूज देने का सिलसिला शुरु किया। इस अभियान से तिलमिलाए वानखेड़े की याचना पर नवाब मलिक को एक दूसरे मामले में जेल भेज दिया गया, जिससे वानखेड़े को राहत मिली, लेकिन नवाब मलिक के खुलासों की झड़ी ने सोशल मीडिया पर समीर वानखेड़े की ईमानदारी को न सिर्फ तार तार किया, बल्कि उनके सियासी कनेक्शनों को भी बेपर्दा कर दिया। समीर की एक्ट्रेस पत्नी क्रांति रेडकर ने इसे मराठी मुलगी के सम्मान का मामला बनाने के लिए महाराष्ट्र भाजपा के आला नेताओं से इंसाफ की गुहार लगाई, जिसे भाजपा की नफरती गैंग ने खुलकर हवा दी, लेकिन ये बात जल्दी साफ हो गई कि मुंबई और महाराष्ट्र तो ठीक है, लेकिन भाजपा के दिल्ली दरबार में समीर वानखेड़े को कोई सहारा नहीं मिला। दिल्ली दरबार ने समीर वानखेड़े को मुंबई आफिस से हटाकर दिल्ली भेजने का पहला कदम उठाया, जिससे साफ हुआ कि दिल्ली में भाजपा के हाई कमान में वानखेड़े के लिए कोई जगह नहीं है। सीधी सी बात थी कि दिल्ली के जिस दरबार में अरबों-खरबों की डील तय होती हैं, वहां पच्चीस करोड़ की चिंदीचोरी के केस को ज्यादा अहमियत नहीं मिलती है। भाजपा वाले ये भी जानते थे कि शाहरुख खान पर एक हद से ज्यादा प्रेशर करने से मुस्लिम देशों में इसे लेकर मोदी की इमेज पर बुरा असर पड़ सकता था। मुंबई से दिल्ली भेजे जाने के बाद समीर वानखेड़े का खेल तो लगभग खत्म हो गया था। सवाल ये जरुर रह जाता है कि एक अरसे बाद वानखेड़े के खिलाफ चार्जशीट दर्ज करने को लेकर ये कौन सा खेल शुरु हुआ है और इस सवाल का दूसरा पहलू ये है कि इससे शाहरुख या उनके बेटे आर्यन का क्या बनेगा या बिगड़ेगा। 

बिगड़ने वाली बात इसलिए बेदम है, क्योंकि आर्यन खान को एनसीबी दफ्तर और कोर्ट से क्लीन चीट मिल चुकी है, जिसके बाद उनके नशे के मामले में शामिल होने का सवाल भी खत्म हो जाता था। सवाल रह जाता है कि आर्यन खान को फ्री करने के एवज में मांगी गई पच्चीस करोड़ की रिश्वत का मामला कितना संगीन माना जाए और इसे साबित करने के लिए कोर्ट के सामने सीबीआई क्या सबूत पेश कर सकती है। वैसे वानखेड़े तो कतई नहीं चाहेंगे कि ये मामला किसी तरह से सीरियस हो जाए, क्योंकि उनकी इज्जत का वैसे हीबहुत जमकर फालूदा बन चुका है।  और मजेदार बात ये है कि शाहरुख खान भी नहीं चाहेंगे कि ये मामला सीरियस हो, क्यों, इसलिए कि भारतीय कानूनों की दफाओं में रिश्वत लेना अपराध है, तो रिश्वत देना भी अपराध है। अगर सीबीआई कोर्ट में किसी भी तरह से साबित करती है कि शाहरुख खान की तरफ से वानखेड़े या उनके दोस्तों को रिश्वत का एक भी पैसा दिया, तो भाजपा का पालतू मीडिया इसमें बेटे की जगह अब शाहरुख खान को दोषी ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। साबित करने देने और न करने देने को लेकर शाहरुख और भाजपा की टीमें अपने अपने पत्ते आगे जरुर करेंगी। एक लाइन में कहा जाए, तो 25 करोड़ की रिश्वतखोरी के सीबीआई के इस मामले में समीर वानखेड़े के नाम पर शाहरुख खान की फजीहत करने की मंशा ज्यादा साफ तौर पर समझी जा सकती है। रही बात समीर वानखेड़े की, तो उनको जेल पंहुचाने के लिए सीबीआई के पास गंभीर मामलों की कमी नहीं है। 

आर्यन को टारगेट करके शाहरुख के खिलाफ निशाना साधने वाले भाजपा की हिंदुत्व बिग्रेड से लेकर नोएडा के पालतू न्यूज चैनल उसी वक्त हरकत में आएंगे, जब सीबीआई कोर्ट में सबूत देगी कि शाहरुख खान की तरफ से रिश्वत देने का अपराध किया गया है। इसमें भी कतई सुबहा नहीं कि इस मामले में सीबीआई की कामयाबी सबूतों से ज्यादा भाजापा के हेडक्वार्टर से मिलने वाले संदेशों पर निर्भर रहेगा। रही बात समीर वानखेड़े की, तो ये शख्स अब सियासत के दरबार में किसी के काम का नहीं रहा है। आर्यन और यूटर्न के इस मामले में टेंशन किसे होगी, इसका सीधा-सरल जवाब है- किसी को नहीं। क्या अब भी कोई इस मामले को सीरियसली लेगा। नहीं ना 





3 comments:

ओमप्रकाश तिवारी said...

Good analysis

Anonymous said...

👏👍

Anonymous said...

Kamal ka calculation. Ekdam sateek.

कंगना मतलब...

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